पत्रकार से पॉवर ब्रोकर बने डॉ प्रणय रॉय का पाखंड और एनडीटीवी का पतन – भाग (5)

पार्ट चार से आगे…. ऐसे में आप यह सोच रहे होंगे कि “प्रचार के औजार” में और शुद्ध तौर पर मीडिया संस्थान में क्या अंतर होता है? इसे समझने के लिए आपको आजतक और एनडीटीवी के बीच के अंतर को समझना होगा. आजतक शुद्ध तौर पर मीडिया संस्थान है. इसलिए वह अपने पत्रकारीय धर्म और …

पत्रकार से पॉवर ब्रोकर बने डॉ प्रणय रॉय का पाखंड और एनडीटीवी का पतन – भाग (4)

नियम अद्भुत होते हैं. नियमों को तोड़ना सरल नहीं होता. उनके विरुद्ध किसी काम के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है. उदाहरण के लिए गुरुत्वाकर्षण बल को ही लीजिए. पृथ्वी की सीमा में आसमान से कोई चीज धरती पर ही गिरेगी. आइजक न्यूटन ने इसका एक फॉर्मूला भी बताया है. उस फॉर्मूले पर चर्चा …

पत्रकार से पॉवर ब्रोकर बने डॉ प्रणय रॉय का पाखंड और एनडीटीवी का पतन – भाग (1)

Samarendra Singh “अगर कोई “खबर” से हट कर “कुछ करना” चाहता है तो उसके लिए बाहर जाने के रास्ते खुले हुए हैं” – डॉ प्रणय रॉय की यह बात आज भी कानों में गूंजती है. ऐसे लगता है कि जैसे यह घटना कल हुई हो. लेकिन यह घटना अगस्त 2007 की है. उस दिन अचानक …

जब PM मनमोहन के डांटने पर NDTV के मालिक प्रणय रॉय ने ‘बुरे मंत्रियों की सूची’ वाली खबर गिरा दी थी!

Samarendra Singh PMO का दखल और क्रांतिकारी पत्रकारिता…. इन दिनों टीवी के दो बड़े पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी और रवीश कुमार अक्सर ये कहते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तरफ से चैनल के मालिकों और संपादकों के पास फोन आता है और अघोषित सेंसरशिप लगी हुई है. सेंसरशिप बड़ी बात है. जिस हिसाब से …

अखबारों के प्रॉपर्टी सप्लीमेंट का वजन कम हो गया है!

Samarendra Singh : अखबारों के प्रॉपर्टी सप्लिमेंट का वजन कम हो गया है. बस थोड़े ही विज्ञापन दिखते हैं. प्रायोजित खबरों की संख्या भी घट गई है. उन विज्ञापनों में भी इनवेस्टर क्लिनिक या प्रॉपटाइगर जैसी निवेश कंपनियों के विज्ञापन ज्यादा हैं. मतलब प्रॉपर्टी का भाव मंदा है. इसे और मंदा होना चाहिए. इन कंपनियों ने एक अदद घर का सपना दिखा कर न जाने कितने लोगों के जीवन से वर्तमान की अनगिनत खुशियां छीन ली हैं. लोग खून-पसीना लगा कर पैसे बनाते हैं और मकान की किश्त चुकाते हैं. जालसाज कंपनियां लोगों को समय पर फ्लैट नहीं देती. ना घोषित ब्याज देती हैं. ऊपर से अलग-अलग बहाने से दाम बढ़ाती चली जाती हैं. उपभोक्ताओं के खिलाफ इतनी बड़ी और भद्दी साजिश शायद ही किसी कारोबार में रची गई हो. और इस साजिश में सरकार और बैंक सब शामिल हैं.

अमिताभ ने किसान चैनल से पैसे नहीं लिए तो करोड़ों रुपये कौन डकार गया?

Samarendra Singh : ‘किसान’ चैनल से पैसे नहीं लेकर अमिताभ बच्चन ने अपना मान बढ़ाया है. उनके जैसे किसी भी बड़े आदमी से इसी तरह के व्यवहार की उम्मीद की जाती है. अमिताभ बच्चन पहले से ही इतने ऊंचे मुकाम पर हैं कि वहां पहुंचना किसी फिल्मी सितारे के बस की बात नहीं. और आज इस फैसले से बिग बी का कद और अधिक बढ़ा है. अब यह पता चलना चाहिए कि बिग बी ने पैसे नहीं लिए तो लिंटास ने उनके नाम पर पैसे कैसे लिए?

अर्णब गोस्वामी और नविका कुमार को एजेंट घोषित किया जाएगा…

Samarendra Singh : इस्तीफा तो देना ही चाहिए. नैतिकता का तकाजा तो यही कहता है. लेकिन सुषमा के बचाव में जिस तरह समूचा संघ परिवार मैदान में उतरा है उससे लगता नहीं की हाल-फिलहाल कोई इस्तीफा होगा. तो फिर क्या होगा? हंगामा होगा और इस हंगामे की अगुवाई कांग्रेस करेगी. हंगामा तो लोहिया और जयप्रकाश नारायण जी के चेलों को भी करना चाहिए, लेकिन अपराध और भ्रष्टाचार में गर्दन तक डूबे समाजवादियों की ऐसी हैसियत और नीयत – दोनों नहीं है कि वह कोई नैतिक मांग कर सकें. और क्या होगा?

इस सदी के स्वघोषित सबसे बड़े महानायक केजरीवाल की नाक जड़ से कट गई…

Samarendra Singh : जिसका अंदेशा था वही हुआ. अभय कुमार दुबे की बात सही निकली. किसी एक की नाक जड़ से कटनी थी और इस सदी के स्वघोषित सबसे बड़े महानायक की नाक जड़ से कट गई. कमाल के केजरीवाल जी दुखी हैं. बोलते नहीं बन रहा है. इसलिए अदालत के फैसले का इंतजार किये बगैर उन्होंने अपने क्रांतिकारियों को अपने बचाव में आगे कर दिया है. तोमर की डिग्री फर्जी है, यह मानने के लिए अब उन्हें किसी अदालत के फैसले की जरुरत महसूस नहीं हो रही है. अब उनके क्रांतिकारी कह रहे हैं कि माननीय को गहरा सदमा लगा है. तोमर ने उन पर जादू कर दिया था. फर्जी आरटीआई दिखा कर भ्रमित कर दिया था. हद है बेशर्मी की. बार-बार झूठ बोलने पर जरा भी लाज नहीं आती.

कुछ ईसाइयों ने कुछ कुत्सित हिंदुओं के साथ मिल कर दुर्गा को ‘वेश्या’ साबित करने की कोशिश की है

( File Photo Samarendra Singh )

Samarendra Singh : इन दिनों मेरे पास कुछ ई-मेल आ रहे हैं महिसासुर के बलिदान को लेकर। यह किसी दंगाई की सोच रही होगी जिसे लगता होगा कि वह इतिहास दुरुस्त कर देगा। ठीक वैसे ही जैसे कुछ लोग अयोध्या में इतिहास दुरुस्त करना चाहते हैं। अरे भई अब तक कोई ऐसा क्रांतिकारी पैदा ही नहीं हुआ जो अतीत को करेक्ट कर सके। फिर यह तो अतीत भी नहीं … अतीत का एक धार्मिक मिथक है। मैं इस दंगाई सोच का विरोध करता हूं और उन तमाम क्रांतिकारियों से अपील करता हूं कि मुझे ई-मेल नहीं भेजा करें। मुझे शांति से जीने दें। इस ई-मेल में संविधान का हवाला दिया गया है। तो क्या संविधान यह इजाजत देता है कि कोई मूर्ख किसी के भगवान या खुदा का अपमान करे? क्या यह अधिकार मुझे है कि किसी दिन मैं किसी भी धर्म के नायक को अपराधी करार देते हुए उसके विरोधियों को खुदा घोषित कर दूं?