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‘बांग्ला भारत’ चैनल के मुखिया उमेश की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

वेस्ट बंगाल के बांग्ला भारत चैनल के मुखिया उमेश कुमार को भी राहत मिल गई है. कोलकाता हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट से उमेश की टीम के कई पत्रकारों को पहले ही गिरफ्तारी से राहत मिल चुकी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ये माना जा रहा था कि उमेश कुमार के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई पर कोर्ट से रोक लग जाएगी.

उमेश व उनकी टीम ने बांग्ला भारत चैनल के लिए पश्चिम बंगाल के कई मंत्रियों का स्टिंग किया. आपरेशन काली नामक इस स्टिंग अभियान के चपेटे में दर्जन भर के करीब छोटे-बड़े मंत्री आए. भ्रष्टाचार की कालिख उजागर होते ही सीएम ममता बनर्जी ने बजाय अपने मंत्रियों को बर्खास्त कर जांच कराने के, स्टिंग करने वालों को ही निशाने पर ले लिया.

इसी कड़ी में एक रिपोर्टर को वेस्ट बंगाल पुलिस ने यूपी में आकर अरेस्ट कर लिया. पर उमेश कुमार व टीम के अन्य लोग अपनी गिरफ्तारी रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की शरण में गए. ये लोग कोर्ट को यह समझाने में कामयाब रहे कि उन्होंने जन हित में भ्रष्टाचार के खिलाफ स्टिंग किया और इस स्टिंग से बौखलाकर स्टेट मशीनरी मीडिया के लोगों के दमन पर उतारू है.

ज्ञात हो कि बांग्ला भारत चैनल के संपादक उमेश कुमार ने 25 जनवरी को प्रेस क्लब आफ इंडिया दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन कर मीडिया के सामने ममता सरकार के चार कैबिनेट मंत्रियों व पांच दिग्गज नेताओं के भ्रष्टाचार को लेकर किए गए स्टिंग का खुलासा किया था.

इस स्टिंग के सामने आने के बाद ममता सरकार बौखला गई और उसने बांग्ला भारत के संपादक व उनकी एसआईटी के खिलाफ क्राईम ब्रांच में एफआईआर दर्ज करा दी. एफआईआर दर्ज होने के बाद पश्चिम बंगाल की पुलिस ने उमेश कुमार व उनकी एसआईटी के खिलाफ न्यायालय से सर्च वारंट व अरेस्ट वारंट हासिल किया था.

अरेस्ट वारंट हासिल करने के बाद पुलिस की टीमें लगातार उमेश कुमार व उनकी एसआईटी को दबोचने ऑपरेशन में जुटी हुई थी. एक रिपोर्टर को अरेस्ट भी कर लिया. पर उमेश व उनकी टीम के शेष लोग कोर्ट से राहत पाने में कामयाब रहे.

Umesh Kumar

बांग्ला भारत चैनल के मुखिया उमेश कुमार कहते हैं- ”स्टिंग सामने आने के बाद ही उनके खिलाफ मुकदमें क्यों दर्ज किए गए. अगर वह चीटर है तो स्टिंग से पहले उनके व उनकी एसआईटी के खिलाफ मुकदमें क्यों नहीं दर्ज किए गए थे. एक ओर तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री राज्य में भ्रष्टाचार न होने का ऐलान करती आ रही है जबकि स्टिंग में उनके मंत्री व नेता भ्रष्टाचार में डूबे दिख रहे हैं. ममता सरकार ने अपने कैबिनेट मंत्रियों व दिग्गज नेताओं के भ्रष्टाचार को लेकर किए गए स्टिंग के सामने आने के बाद उन पर एफआईआर दर्ज कराई. यह अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा सीधा हमला है और मीडिया को डरा धमका कर इस पर लगाम कसने की कवायद है. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने पुलिसिया कार्रवाई पर रोक लगाकर यह बता दिया है कि ममता सरकार और उनकी पुलिस बदले की भावना से मीडिया के खिलाफ काम कर रही है.”

उमेश कुमार की गिरफ्तारी पर रोक के संबंध में एक अखबार में छपी खबर की कटिंग देखें-

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