रेरा कानून से बेखौफ बिल्डर, परेशान हैं उपभोक्ता!

भास्कर गुहा नियोगी-

वाराणसी। बिल्डरों की गुंडई और मनमानी से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए जिस रेरा (रियल इस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट 2016) को सरकार लेकर आयी थी बेखौफ बिल्डर इस क़ानून का माखौल उड़ा रहे है हां इतना जरूर हो रहा है कि मेरा घर हो अपना का सपना आंखों में लिए खरीददार खून के आंसू रो रहा है।

बिल्डर अतीक गुड्डू को फ्लैट के लिए साढ़े आठ लाख देने के बाद भी महताब किराये के मकान में जिंदगी बसर कर रहा है जब कि बिल्डर अतीक लाखों रुपए हजम करने के बाद भी बेफिक्र होकर घूम रहा है ये सबकुछ तब हो रहा है जब अतीक के खिलाफ अदालत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे चुकी है मुकदमा चेतगंज पुलिस को दर्ज करना है सूत्रों के अनुसार चेतगंज थाने से लेकर पानदरीबा चौकी तक अतीक को लेकर नर्म कोना रखता है कारण अतीक मौके-बेमौके थाने से लेकर चौकी तक छोटा-मोटा निर्माण कार्य संबंधी सेवाएं भी देता रहता है।

चौकी पर उसका आना-जाना भी लगा रहता है नहीं तो तीन महीने पहले पुलिस कमिश्नर के यहां मेहताब के शिकायत पर जो जांच अतीक के खिलाफ आयी थी और आरोप जितने गंभीर और पुख्ता थे उस स्थिति में पूरे मामले को हवा-हवाई कर देना पुलिस के नीयत को भी कटघरे में खड़ा करता है। उपभोक्ता के हित में कानून कुछ भी बन जाए लेकिन जमीन पर बिल्डरों के गठजोड़ के आगे सब बेमानी साबित हो जाता है।

रेरा कानून में कहा गया है कि बिल्डर को उपभोक्ता से लिए गए पैसे का सत्तर फीसदी हिस्सा अलग से बैंक खाते में जमा करना होगा। निर्माण कार्य में देरी और कब्जा न देने की स्थिति में खरीददार को ब्याज सहित पैसा बिल्डर को वापस करना होगा लेकिन यहां तो महताब फ्लैट पाने के लिए बीते तीन साल से बिल्डर के फेरे लगा रहा है।

बनारस के गली-कूचों में बिल्डर जिस तरह से नियम-कायदे को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से निर्माण कार्य करवा रहे है उसमें महताब जैसे सैकड़ों फंसे पड़े हैं जिनके मेहनत की पाई-पाई बिल्डरों ने हड़प लिया है और वो घर पाने के लिए बिल्डर से लेकर अदालत तक का चक्कर काट रहे है सुनवाई के नाम पर इंतजार के साथ।

-बनारस से भास्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट.

मूल खबर पढ़िए-

बिल्डर का मारा किधर जाए बेचारा, अदालत ने दिया ठग अतीक गुड्डू के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश



 

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One comment on “रेरा कानून से बेखौफ बिल्डर, परेशान हैं उपभोक्ता!”

  • मनीष भट्ट says:

    हर प्रदेश में रेरा का यही हाल है। भोपाल के एक ख्यात रहे और अब डूबते हुए बिल्डर के विरुद्ध न जाने कितने मामले रेरा के समक्ष है। मगर सिवाए रस्म अदायगी के कुछ नहीं हो रहा। यदि बिल्डर सब बेच के भाग भी जाएगा तो भी रेरा कुछ नहीं करने वाला। रही सही कसर सरकारी नौकर पूरी कर देते हैं। पुलिस प्रकरण दर्ज नहीं करती और तहसीलदार – पोस्टर वाले – आर आर सी जारी नहीं करते।

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