सवाल ये है कि ‘दैनिक भास्कर’ अब तक खामोश क्यों था और किन मुद्दों पर खामोश था?

दैनिक भास्कर अखबार ने फ्रंट पेज पर एक अपना विज्ञापन दिया है… लिखा है कि- ”भास्कर अब तोड़ेगा सबसे बड़ी चुप्पी… खामोशी अब और नहीं… इंतजार कीजिए….” इस विज्ञापन को पढ़कर लोग पूछने लगे हैं कि आखिर अब तक भास्कर खामोश क्यों था और किन किन मुद्दों पर कितने कितने देर तक खामोश रहा…

खुद की ब्रांडिंग वाले इस विज्ञापन से भास्कर की किरकिरी ज्यादा हो रही है. यह माना जाता है कि अखबार तो सच ही बोलेगा.. चुप न रहेगा.. झूठ के आगे खामोश न होगा… पर भास्कर तो खुद कह रहा है कि खामोशी अब और नहीं… फिर वो जनता को बताए कि अब तक वह खामोश क्यों था, किस दबाव में था और किन मुद्दों पर था…

सीकर टाइम्स के संपादक, सोशल मीडिया के चर्चित एक्टिविस्ट और बेबाक पत्रकार यशवंत चौधरी कहते हैं- ”बधाई हो… भास्कर ने आखिर मान ही लिया की वो चुप था… यानि उसके मुंह में जुबान ही नहीं थी। बोले तो, वो मीडिया था ही नहीं। इसकी चुप्पी तोड़ने की गीदड़ भभकी केवल अपने फंडिंग वालों का प्रोपेगंडा ही सिद्ध होगा। इनकी सर्कुलेशन और रेपुटेशन डाउन हो रही है पूरे राजस्थान में।”

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