इस होली जरा अपने जिले के आबकारी कार्यालय जाना तो…

आजकल पीएम साहब से लेकर प्रधान तक चौकीदार बने पड़े हैं। लेकिन अब दो दिनो तक एक जगह चौकीदारों की भारी कमीं पड़ेगी। वह है आपके जिले का आबकारी कार्यालय। जी हां होली का हुल्हड़ हो या फिर दिवारी की फुलझडिय़ा मौसम…इन खास दोनो त्योहारों में एक जमात आबकारी शराब ठेकों के वजाए आबकारी अधिकारी के कार्यालय पर भीड़ लगाते हैं…तो आबकारी विभाग भी तथाकथित उच्चों की चौखटों पर पहुंचता है।

यह सब होता है सिर्फ नौकरी बचाने की खातिर…और नहीं तो का भैया और कोई दूसरा कारण है ही नहीं…कुछ लोग बुरा मानेंगे लेकिन तब भी एक अन्य वर्ग को बताऊंगा की कैसे आपके असल चौकीदार ही चोरी करने पर तुले हुए हैं…देश के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले भवनों के बाशिंदों ने आबकारी कार्यालयों का चक्कर काटना शुरू कर दिया है…महज एक, दो या बड़े भवन से हैं तो तीन इससे ज्यादा खंभा आपको नहीं मिलने वाला है… एक खंभे की कीमत बुमिश्कल ८००-९०० ही होती है… इतने में ये स्तंभ बेशर्मी से अपनी हंसी दिखाता हुआ अपनी कलम गिरवी रख आता है वहां…

अब इनकी भी सुनो जरा…ये आबकारी विभाग के रक्षक भी…बेहतर पैकिंग करते हुए खंभों की वैल्यू बढ़ाते हुए सूरज ढलते ही उच्चों की चौखट पर पहुंचेंगे…दरबान से कहेंगे कि साहब से कहना हम आएं हैं…इंतजार करेंगे…साहब निकले तो तत्काल पैर छुवैनी करते हुए बैग सधा देंगे…साहब और कुछ आदेश रहे हमारे लिए तो बता दीजिएगा…बस…कुछ उच्च चौखटों के साहब सेवन ही नहीं करते तो वह जब बैग देखकर फटकार लगाते हैं…तो देने वाले साहब कहते हैं…कि साहब त्योहार है हमें नहीं मालूम था आप शौकीन नहीं है…लेकिन हमारा तो फर्ज था कि आपकी सेवा में हाजिर हों…

ये तो आपके बताएं हैं हम कर्म इन दोनो पक्षों के…अब जरा गौर फरमाइएगा ये सब हुआ किसलिए…सिर्फ इसलिए होली के खंभों तले दबे चौथे स्तंभ… उनकी काली करतूतों को दीवारी तक न छापे…और उच्चों की चौखट पर जो बैग सधाया है…वह चौखट अगले त्योहार तक उन पर कार्रवाई की नोक न तोड़ते हुए…रहम की चादर उढ़ाए रहे…और अगर ऐसा नहीं तो बताए कि आप ये क्यों कर रहे हैं, भाई जाहिर सी बात है कि आप अपने वेतन से तो नहीं कर रहे हैं…आप भ्रष्टाचार कर जो काली कमाई जमा कर रहे हैं…उसमें से आधा हिस्सा इन उच्चों और चौथे स्तंभ पर चढ़ा रहे हैं…शर्म आती है ऐसे कृत्यों पर…और आप उम्मीद कर रहे हैं कि नए भारत का नया सूरज उगेगा…कब तब नौकरी…बचाने के नाम पर चापलूसी, तलवे चांटने का काम करते रहेंगे…शर्म करिए…सुधरिए कुछ…इस सिस्टम को और खोखला मत करिए…भारत को नया भारत बनाने में सहयोग करिए निवेदन है आपसे…

Rahul Dubey
mediarahul92@gmail.com

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