मानना पड़ेगा ‘इंडियन एक्सप्रेस’ अब भी सत्ता विरोधी है, देखें ये खबर

मैंने तय किया था कि अपनी तमाम उपलब्धियों के लिए दोबारा सत्ता में आई सरकार के काम-काज पर नजर रखना छोड़ दिया जाए। मैंने मान लिया था कि सरकार से मेरी अपेक्षाएं अलग हैं और आम जनता की अलग। इसलिए उसमें दिमाग खराब नहीं करूंगा। 12 आयकर अधिकारियों को जबरन हटाए जाने की खबर मैंने इसीलिए पढ़ी भी नहीं। उम्मीद भी नहीं थी कि इतनी जल्दी यह खबर पढ़ने को मिल जाएगी।

आज इंडियन एक्सप्रेस के चार पन्ने विज्ञापन से भरे देखकर लगा भी कि एक सत्ता विरोधी अखबार पूरी तरह व्यवसायिक हो रहा है। लेकिन पहले पन्ने पर ऋतु सरीन की बाईलाइन ने इस खबर को पढ़ने को मजबूर किया। मानना पड़ेगा कि इंडियन एक्सप्रेस (मुमकिन है अपने पुराने रिपोर्टर्स के कारण ही) अभी भी सत्ता विरोधी है।

खबर का लिंक यह रहा https://indianexpress.com/article/india/false-charges-to-remarks-about-women-cloud-over-sacked-senior-tax-officer-5776136/

खबर कहती है कि आयकर के हटाए गए 12 अफसरों में एसके श्रीवास्तव भी हैं जो एनडीटीवी मामले की जांच कर चर्चा में आए थे और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम पर कई आरोप लगा चुके हैं। संक्षेप में श्रीवास्तव का कहना है एनडीटीवी के खिलाफ जांच के कारण उन्हें उस समय के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने प्रताड़ित किया और उन्हें पागल करार दिया गया। मैं पांच साल इंतजार करता रहा कि श्रीवास्तव को चिदंबरम या उनके बेटे के खिलाफ जांच का काम मिलेगा या एनडीटीवी मामले में ही कुछ हो जाएगा – पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। मैंने भी इसे राजनीति मान लिया। चुनाव प्रचार के दौरान आरोप-प्रत्यारोप का जो दौर चला उससे इसकी पुष्टि हुई।

अब इस खबर से पता चलता है कि 23 मई को ही श्रीवास्तव को चार्जशीट दी गई थी और हटाए गए अधिकारियों में वो भी हैं। पढ़िए और समझिए एंटायर पॉलिटिकल साइंस यही है। श्रीवास्तव की परेशानी 2006 से चल रही है और उनका कहना है कि 2015 का एक आदेश है जिसके मुताबिक जिन अधिकारियों के खिलाफ जांच चल रही हो उन्हें जबरन नहीं हटाया जा सकता है। अगर ऐसा है तो उन्हें हटाना पहली नजर में गलत (या जबरदस्ती) लगता है और हटा कौन रहा है? वो सरकार जो चिदंबरम और एनडीटीवी से परेशान है या परेशान करना चाहती है। इस सरकार के समर्थक दोनों पर तरह-तरह के आरोप लगाते हैं जबकि सामान्य स्थिति में दोनों मामलों की जांच श्रीवास्तव कर रहे होते। इसी को कहते हैं, गजब भयो रामा जुलुम भयो रे …

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

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