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पत्रिका के कार्यक्रम ‘हमराह’ को लेकर नवज्योति के मालिक दीनबंधु चौधरी का इगो टकरा गया!

राजस्थान पत्रिका और दैनिक नवज्योति की लड़ाई इतवार 14 दिसंबर की सुबह अजमेर की सड़कों पर नजर आई। पत्रिका का कार्यक्रम और नवज्योति के मालिक दीनबंधु चौधरी का इगो टकरा गया। पत्रिका ने पिछले कुछ दिनों से एक कार्यक्रम शुरू किया है, ‘हमराह’, इसके लिए इतवार की एक सुबह के लिए एक ऐसी सड़क का कुछ मीटर हिस्सा तय किया जाता है जहां दो घंटे सुबह 7 से 9 बजे तक शहर के लोग आकर बेलौस अंदाज में अपनी गतिविधियों, प्रतिभाओं का प्रदर्शन कर सकें।

राजस्थान पत्रिका और दैनिक नवज्योति की लड़ाई इतवार 14 दिसंबर की सुबह अजमेर की सड़कों पर नजर आई। पत्रिका का कार्यक्रम और नवज्योति के मालिक दीनबंधु चौधरी का इगो टकरा गया। पत्रिका ने पिछले कुछ दिनों से एक कार्यक्रम शुरू किया है, ‘हमराह’, इसके लिए इतवार की एक सुबह के लिए एक ऐसी सड़क का कुछ मीटर हिस्सा तय किया जाता है जहां दो घंटे सुबह 7 से 9 बजे तक शहर के लोग आकर बेलौस अंदाज में अपनी गतिविधियों, प्रतिभाओं का प्रदर्शन कर सकें।

पत्रिका ने इसके लिए चुना आनासागर झील के किनारे चौपाटी वाले रोड को। बजरंगगढ़ से चौपाटी के सिरे को इसके लिए चुना गया। शायद इसलिए भी कि इस सड़क का एक वैकल्पिक मार्ग जवाहर रंगमंच से होता हुआ वापस बजरंगगढ़ पहुंच जाता है। दो तीन दफा तो यह कार्यक्रम हो गया परंतु 14 दिसंबर को सबकुछ ठीकठाक नहीं रहा। जिस सड़क के छोटे से हिस्से पर यह कार्यक्रम होता है, उसी पर आनासागर झील के सामने नवज्योति के मालिक और प्रधान संपादक दीनबंधु चौधरी का भी मकान है। प्रतिद्वन्द्वी अखबार और उनके आंगन में उछलकूद मचवाए और अपना नाम कमाए। छोटा सा शहर है, सो कुछ छिपा नहीं रह पाता। पता लगा दीनू जी ने शहर के पुलिस कप्तान को इस आयोजन की अनुमति नहीं देने की एक लिखित शिकायत, बड़ी न्यूसेंस होती है, कहते हुए करवा दी। जिन लोगों से शिकायत करवाई गई वे पिछले आयोजन के फोटो में कुछ प्रभावशाली लोगों के पीछे हाथ बांधे खडे नजर आ रहे थे।

खबर तो यह भी है कि पुलिस कप्तान को फोन भी किया गया जवाब में उन्होंने यह कहते हुए कि हमने किसी को अनुमति ही नहीं दी है, मामला टाल दिया। अगले दिन इस बात पर भी बड़ा एतराज करवाया गया कि ट्रैफिक डाइवर्ट क्यों किया जा रहा है। पुलिस ने फिर टका सा जवाब दे दिया कि हम कहां डाइवर्ट कर रहे हैं, हम तो खडे़ हुए हैं। पत्रिकावाले खुद डाइवर्ट मे लगे हुए हैं। चौपाटी शहरवासियों के लिए घूमने की जगह भी है, पता लगा कि उसके गेट पर ताला लगवा दिया गया। लोगों ने बड़ा एतराज किया। कुछ ने गुस्से में आकर ताला वाला तोड़कर फेंकफांक दिया। सुबह की सैर को आए लोगों ने दीनू जी के घर के बाहर ही उनकी हाय हाय के नारे लगा डाले।

अगले दो दिन के नवज्योति में ‘हमराह’ को ‘शहर की अराजकता’ जैसा संदेश देने वाले समाचार छपे। खैर हमराह तो हो हवा गया परंतु मुसीबत तो नगर निगम और विकास प्राधिकरण की है। पत्रिका अब खबर छाप रहा है कि चौपाटी पर ताला किसने लगाया। नगर निगम और विकास प्राधिकरण क हुक्मरान कह रहे हैं कि हमने नही लगवाया, लगा था तो गलत है, पता नहीं किसने लगवाया। दोनों अखबारों की लड़ाई में उनकी शामत आई हुई है। बात चली है तो आपको बताते चले कि हमराह जिस हिस्से पर आयोजित हुआ, वही हिस्सा है जिसपर पूरे शहर में मात्र इसी हिस्से पर करीब एक दशक तक एकतरफा यातायात रहा। यह किसके आदेश से होता था और क्यों, इसका जवाब हर शहरवासी की जबान पर है। सवाल तो और भी बहुत सारे हैं चौपाटी, आनासागर, टापू, काउंसिल, प्रेस क्लब वगैरह-वगैरह, बोलता कोई नहीं है। किसकी जीत-किसकी हार के बीच खबर यह है कि पत्रिका अगला हमराह 21 दिसंबर की सुबह शहर के दूसरे कोने में स्थित चंदबरदाई खेल स्टेडियम में आयोजित करने जा रहा है। 

राजस्थान से राजेंद्र हाड़ा की रिपोर्ट. संपर्क: [email protected]

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