अलीगढ़ मुठभेड़ की जांच करने गई टीम के दो सदस्यों के खिलाफ पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज कर दिया!

अलीगढ मुठभेड़ : मृतक के परिवार ने यूपी पुलिस पर लगाए संगीन आरोप… मुस्तकीम और नौशाद को घर से उठा कर ले गयी थी पुलिस… इस महीने 20 सितम्बर को अलीगढ़ पुलिस द्वारा कथित दो वांछित अपराधियों के लाइव एनकाउंटर के मामले में मानवाधिकार संगठन ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट ने बड़ा खुलासा किया है। जांच टीम जब पीड़ित परिवार के यहां पहुंची और थाने जाकर तथ्य बटोरे तो उसके तुरंत बाद पुलिस ने जांच टीम के दो सदस्यों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया।

मानवाधिकार संगठन की जांच टीम ने एनकाउंटर में मारे गए नौशाद और मुस्तकीम के घरवालों से मुलाकात की और पुलिस के तमाम बयानों की जांच के बाद दावा किया है कि अलीगढ़ पुलिस ने दोनों का एनकाउंटर नहीं बल्कि लाइव मर्डर किया है।

पीड़ित परिवार ने इस मामले में इंसाफ की गुहार लगाई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस जांच टीम में वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन, अमित सेनगुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता नदीम खान, जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।

हालांकि इस मामले में सामजिक संगठन रिहाई मंच ने पहले से ही यूपी पुलिस के इस मुठभेड़ को फ़र्ज़ी क़रार दिया था। इन्हीं सब मामले को लेकर कल शनिवार मृतक मुस्तकीम और नौशाद की मां ने दिल्ली के प्रेस क्लब आफ इंडिया में प्रेस वार्ता कर यूपी पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस वाले हमारे लड़कों को घर से उठा कर ले गए और बाद में मार दिया. अपने साथ हुए अत्याचार और बेटों के ग़म में छलकते आंसुओं के बीच वो कह रहीं थीं कि हमारी मदद करने वालों को भी पुलिस परेशान कर रही है। हमारे घर खाना लेकर आने वाले पड़ोसी तक को रोका जा रहा है। हमारे घर के बाहर पुलिस बैठा दी गयी है। हमें हमारे घर में ही क़ैद कर रखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हमारे लड़के कोई चोर-बदमाश नहीं थे. वो कढ़ाई का काम करते थे. इससे पहले कभी भी कोई पुलिस केस नहीं हुआ और न ही जेल गए. 16 सितंबर को पुलिस पूछताछ के बहाने उन्हें घर से बुलाकर ले गई थी. उसके तीन दिन बाद पुलिस ने कहा कि वो उनकी हिरासत से भाग गए हैं. 20 सितंबर को उनका एनकाउंटर कर दिया गया.

मुस्तकीम की मां ने आरोप लगाया- ‘पुलिस 2007 के एक मामले में नौशाद और मुस्तकीम को अपराधी बता रही है. पुलिस कह रही है कि उन्हें इस मामले में डासना जेल में रखा गया था, जबकि मौत के वक्त नौशाद की उम्र 16 साल और मुस्तकीम की उम्र 22 साल थी. अब पुलिस बताए कि 10 और 12 साल के लड़कों ने लूट और गोली चलाने का अपराध कैसे किया होगा? इस उम्र के लड़के बाल सुधार गृह जाएंगे या जेल?’

वह सवाल करती हैं- ‘पुलिस क्यों एनकाउंटर से एक दिन पहले हमारे घर से दोनों लड़कों के आधार और वोटर कार्ड सहित दूसरे कागजात ले गई थी.’ उन्होंने आरोप लगाया कि उन दोनों को मारने के बाद रीति रिवाज भी पूरे नहीं किए गए और उन्हें ऐसे ही मिट्टी में दबा दिया गया।

यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के प्रशांत टंडन ने कहा कि जब फैक्ट फाइंडिंग टीम अलीगढ़ में संबंधित थाने पहुंची तो वहां पुलिस ने हिन्दूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं को बुला लिया. एनकाउंटर से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी. उन्होंने कहा, ‘पीड़ित परिवार की आवाज उठाने के लिए हम उन्हें दिल्ली ले आए, जिसके बाद पुलिस ने परिवार की एक महिला पर दबाव डालकर टीम के दो सदस्यों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया.’

उधर एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन और मशकूर अहमद उस्मानी ने बताया कि वह इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं. इस मामले की जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराए जाने की मांग भी करेंगे.

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