चारसौबीसी के चक्कर में जेल की चक्की पीसेंगे मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार शलभ भदौरिया!

पत्रकार नेता शलभ भदौरिया

किसी भी तरह पैसे कमाने के चक्कर में एक बड़े पत्रकार नेता नप गए हैं. मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष शलभ भदौरिया को तीन साल जेल की सजा और पचास हजार रुपये जुर्माने को झेलना पड़ेगा. इन पर चारसौबीसी समेत कई आरोप लगे थे. ये आरोप जांच में सही पाए गए तो कोर्ट ने इनके खिलाफ सजा सुना दी. इन पर आरोप है कि इन्होंने झूठे दस्तावेज बनाए, फिर इन दस्तावेजों के सहारे सरकारी विज्ञापन लिया. इन्होंने डाक विभाग से भी सच छिपाया.

पत्रकार शलभ भदौरिया के खिलाफ एक पत्रकार ने ही शिकायत दर्ज कराई थी. शलभ भदौरिया के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 420, 467, 468, 471 भादवि के तहत मुकदमा दर्ज था. इस प्रकरण की जांच मध्य प्रदेश का आर्थिक अनवेषण ब्यूरो कर रहा था. भोपाल में EOW की टीम ने लगातार जांच कर इस मामले को अंजाम तक पहुंचाया. यह मुकदमा 23 फरवरी वर्ष 2006 को लिखा गया था जिसका क्रमांक 05/06 है. इसी मामले में भोपाल के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी शलभ भदौरिया (मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष) के खिलाफ निर्णय सुनाया. शलभ को 3 साल जेल और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई.

एमपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार राधावल्लभ शारदा ने वर्ष 2003 के फरवरी माह में राज्य आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो, भोपाल में शिकायत दर्ज कराई थी. इस प्रकरण की जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने सुबूत व गवाह कोर्ट में पेश किए. दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने सजा देने का फैसला सुनाया. इस प्रकरण की विवेचना भोपाल इकाई के पुलिस अधीक्षक सुधीर लाड़ ने की थी. आरोपियों ने आंध्र प्रदेश में रजिस्टर्ड तेलगू समाचार पत्र के आरएनआई प्रमाण पत्र और अन्य फर्जी दस्तावेज लगाकर सरकारी विज्ञापन प्राप्त किए। इसी प्रकार आरोपी शलभ भदौरिया ने फर्जी दस्तावेज लगाकर डाक पंजीयन भी करवाया और अवैध रूप से आर्थिक लाभ भी प्राप्त किया।

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Comments on “चारसौबीसी के चक्कर में जेल की चक्की पीसेंगे मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार शलभ भदौरिया!

  • K K Agnihotri says:

    मध्य प्रदेश कम से कम भोपाल में पत्रकार ही पत्रकार के दुश्मन हैं, इस बात को इस खबर ने ही सिद्ध कर दिया है, शलभ भदौरिया ने जो किया सो किया, अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे पत्रकारों ने टांग खिंचाई के अलावा और क्या किया… दोष सिद्ध होगा या नहीं यह अभी ऊपर के दो और कोर्ट तय करेंगे।

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  • अशोक शर्मा says:

    ऐसे पत्रकारों को सजा हुई समझो कानून ने अपना काम किया बधाई

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