‘फेंकू’ बनना ‘पप्पू’ को भारी पड़ गया!

अजय कुमार

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी फिर बने पार्टी के लिए मुसीबत … अमेठी से निकला जिन्ना, सुप्रीम कोर्ट के पिंजड़े में कैद : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की काबलियत पर हमेशा सवाल उठते रहते हैं। बीजेपी ही नहीं, जनता में भी राहुल को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। फिर भी देश की सियासत में राहुल गांधी को एक मुकाम हासिल है। इसके पीछे की वजह राहुल के पीछे खड़ी बुद्धिजीवियों की फौज है, जो राहुल का मेकओवर करते हैं। उन्हें यह बताते हैं कि जनता के बीच क्या बोलना है। राहुल को बकायदा भाषण की स्क्रिप्ट तैयार करके दी जाती है। लेकिन जब इससे इतर राहुल को कुछ बोलना पड़ जाता है या फिर अति-आत्मविश्वास में वह स्क्रिप्ट से अलग बोलने लगते हैं तो न केवल अपने लिए बल्कि पार्टी के लिए भी संकट खड़ा कर देते हैं।

खासकर जब बात पीएम मोदी की आती है तो राहुल गांधी कुछ ज्यादा ही उतावले हो जाते हैं। इसी उतावलेपन में राहुल को अक्सर अदालत का चक्कर लगाना पड़ जाता है। मानहानि का मुकदला झेलना पड़ता है। तब वह कभी माफी मांग कर बच जाते हैं तो कभी मामले को लम्बा खींचने की कोशिश में लग जाते हैं। लेकिन अबकी अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी में नामांकन करने आए राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर मोदी को चोर बताना भारी पड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने न केवल राहुल गांधी को एक सप्ताह में जवाब देने को कहा है बल्कि उसने यह भी साफ कर दिया है कि उसने मोदी को चोर नहीं कहा था।

दरअसल, 10 अप्रैल को अमेठी में रफाल मामले में पीएम मोदी पर टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम ये साफ करना चाहते हैं कि उत्तरदाता (राहुल गांधी) ने जो कुछ सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा है, वो गलत है। कोर्ट ने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है। हम केवल दस्तावेज की एडमिसिबल्टिी पर फैसला करते हैं। कोर्ट ने राहुल गांधी से 22 अप्रैल तक जवाब देने को कहा है। अब मामले में अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने रफाल मामले में बीजेपी सासंद मीनाक्षी लेखी की याचिका पर सुनवाई की। मीनाक्षी लेखी ने राहुल गांधी के खिलाफ पीएम मोदी पर टिप्पणी पर अवमानना की याचिका दाखिल की है।

मीनाक्षी लेखी ने अपनी याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने रफाल मामले में पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र की प्रारंभिक आपत्ति खारिज करते हुए कहा था कि वो द हिंदू में छपे रक्षा दस्तावेज पर विचार करेगा, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से ये बयान दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि ‘चौकीदार चोर’ है। चौकीदार ने 30 हजार करोड़ रूपए अनिल अंबानी की जेब में डाले हैं। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट ने आदेश में ऐसा कुछ नहीं है इसलिए ये कोर्ट की अवमानना है।

ज्ञातव्य हो कि राफेल डील को लेकर कांग्रेस और भाजपा लगातार आमने-सामने हैं। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। पिछले दिनों राफेल डील मामले में केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से बड़ा झटका लगा था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उन प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिसमें सरकार ने याचिका के साथ लगाए दस्तावेजों पर विशेषाधिकार बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राफेल मामले में रक्षा मंत्रालय से फोटोकॉपी किए गोपनीय दस्तावेजों का परीक्षण करेगा। केंद्र ने कहा था कि गोपनीय दस्तावेजों की फोटोकॉपी या चोरी के कॉपी पर कोर्ट भरोसा नहीं कर सकता। बहरहाल, अमेठी में राहुल ने सुप्रीम कोर्ट की आड़ लेकर चौकीदार चोर है वाला जो जिन्न बाहर निकाला था, दिल्ली में बैठी सुप्रीम अदालत ने उसे पिंजड़े में बंद कर दिया है। अब राहुल गांधी चौकीदार चोर है का नारा लगाते समय सौ बार सोचेंगे। कह सकते हैं ‘फेंकू’ बनना ‘पप्पू’ को भारी पड़ गया!

लेखक अजय कुमार लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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