महाराष्ट्र… यह वही राज्य है जहां तीन महीने में 767 किसानों की आत्महत्या की खबरें आई थीं। आत्महत्या उन किसानों ने की थी जिनपर कर्ज था। यह कर्जा अगर सरकार माफ कर देती तो शायद ये सभी 767 परिवार यह दिन न देखते। लेकिन अन्नदाता सरकार को चुनाव लड़ने का कर्जा नहीं दे पाता है तो सरकार क्यों उसका कर्ज माफ करे। उसे कर्जा तो बड़ी-बड़ी कंपनियां देती हैं, जिनका करोड़ों रुपया सरकार बहादुर चुटकी में साफ कर देती है। ये ताजा मामला पढ़िए…
मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने राजस्व विभाग से सवाल उठाते हुए कहा है कि हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) पर लगाए गए ₹94.68 करोड़ के जुर्माने को कथित रूप से माफ कर दिया गया।
पवार ने महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से पूछा कि आखिर मेघा इंजीनियरिंग को “बम्पर डिस्काउंट के साथ डम्पर रिटर्न” जैसी मेहरबानी क्यों दिखाई गई? उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी पर दिसंबर 2022 में जुर्माना माफ किया गया और उसकी जब्त मशीनरी लौटाने का आदेश भी जारी किया गया।
किसानों पर सख्ती, लेकिन कंपनी को राहत?
रोहित पवार ने सवाल किया कि जिस राजस्व विभाग द्वारा साधारण किसानों पर भी पानी, सड़क या सार्वजनिक कामों के लिए थोड़ी-सी मुरूम निकालने पर कार्रवाई की जाती है, उसी विभाग ने मेघा इंजीनियरिंग को छूट क्यों दी?
उन्होंने एक और मामला सामने रखते हुए कहा कि सातारा ज़िले में सतारा से म्हसवड सड़क निर्माण के दौरान मेघा इंजीनियरिंग ने अवैध खनन किया था। उस समय स्थानीय तहसीलदार और एसडीओ ने कंपनी पर ₹105 करोड़ का जुर्माना लगाया, मशीनरी जब्त की और बैंक खाता भी सील कर दिया था। लेकिन जैसे ही जून 2022 में सरकार बदली, दिसंबर 2022 में कंपनी पर लगा जुर्माना माफ कर दिया गया और उसकी मशीनरी लौटाने का आदेश जारी हुआ।
उन्होंने बावनकुले से पूछा – “क्या यह भी सच है? आखिर राजस्व विभाग और मेघा इंजीनियरिंग के बीच कैसा ‘बॉन्ड’ बना कि इतनी बड़ी रियायत दी गई?”
बावनकुले का जवाब
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि जालना और परभणी के जिलाधिकारियों ने अवैध खनन को लेकर MEIL पर जुर्माना लगाया था। वहीं, सातारा ज़िले की खटाव तहसील में 11 अगस्त 2022 को कंपनी के 16 वाहनों को अवैध खनिज परिवहन के आरोप में जब्त किया गया था।
बीजेपी को सबसे ज्यादा चंदा
मेघा इंजीनियरिंग, पामिरेड्डी पिची रेड्डी और पीवी कृष्णा रेड्डी द्वारा प्रमोट की गई कंपनी है। इसने ₹966 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे, जिनमें सबसे बड़ी रकम भाजपा को दी गई।
कंपनी ने भाजपा को लगभग ₹584 करोड़ का चंदा दिया। इसके अलावा, बीआरएस को ₹195 करोड़, डीएमके को ₹85 करोड़ और अन्य दलों – वाईएसआरसीपी, टीडीपी, कांग्रेस, जदयू, जेडीएस और जन सेना पार्टी – को भी दान दिया।
बताते चलें कि 12 जुलाई 2025 को हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) पर महाराष्ट्र के जलना ज़िले में सड़क निर्माण के दौरान लघु खनिजों की अवैध खुदाई करने के मामले में ₹94.68 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। इसकी जानकारी महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शुक्रवार को विधानसभा में दी। यह उल्लंघन शेगांव और पंढरपुर यात्रा मार्गों पर हुए, जिसके चलते विभाग ने अलग-अलग दंडादेश जारी किए। जलना के अतिरिक्त जिलाधिकारी ने ₹38.70 करोड़ का जुर्माना लगाया, जबकि पारतूर तहसीलदार ने ₹55.98 करोड़ का जुर्माना ठोका था।


इस प्रकरण पर पत्रकार कृष्णकांत लिखते हैं-
मेघा इंजीनियरिंग नाम की कंपनी याद है? इलेक्टोरल बॉन्ड घोटाले में सामने आया था कि इसने बीजेपी को 519 करोड़ का चंदा दिया था।
हाल ही में महाराष्ट्र में अवैध खनन के लिए इस कंपनी पर 94.6 करोड़ का जुर्माना लगा। अब महाराष्ट्र सरकार ने यह जुर्माना माफ कर दिया है।
जनता का खजाना भ्रष्टाचारियों पर लुटाओ, लूट का माल मिल बांटकर खाओ, फर्जी राष्ट्रवाद पर भाषण दो और भक्तों को मेक इन इंडिया के तहत उल्लू बनाओ।
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