नक्षत्र न्यूज हिन्दी (बिहार-झारखण्ड) भी स्ट्रिंगरों को नहीं दे रहा पैसा, आर्थिक तंगी के चलते घर-परिवार चलाना मुश्किल

नक्षत्र न्यूज हिन्दी (बिहार-झारखण्ड) की हालत बेहद खराब हो चुकी। चैनल में काम करने वाले स्ट्रिंगरों को पिछले 2 सालों से पैसा नहीं मिला है। आर्थिक तंगी के कारण घर-परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। इस पत्र को लिखने के पीछे मेरा उद्देशय चैनल की छवि खराब करना नहीं है और न ही मैनेजमेंट को बदनाम करने की साजिश। मैं तो सिर्फ इस पत्र के माध्यम से अपने जैसे सैकड़ो स्ट्रिंगरों की बात लोगों तक पहुंचाना चाहता हूं।

नक्षत्र न्यूज हिन्दी चैनल ने शुरुआती दौर बड़े-बड़े दावे किये थे। अपने आपको एक अलग चैनल बताया गया था। स्ट्रिंगरों को बड़े -बड़े सपने दिखाए थे। कहा गया था सिर्फ आपको खबरों पर ध्यान देना है, आपको पैसों की चिंता बिलकुल नहीं करनी है। आपको हर महीने आपकी खबरों का पैसा मिलता रहेगा।

बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि चैनल ने कुछ ही दिनों पहले अपनी दुसरी वर्षगांठ हेड ऑफिस (रांची) झारखण्ड में मनायी है। एक तरफ खुशी तो दुसरी ओर दुःख। यह कैसा न्याय है? शुरू के पहले महीने 5000 रूपये पारिश्रमिक के तौर पर दिया गया था। आगे सब ठीक करने की बात कही गयी, लेकिन जैसे ही चैनल को कुछ महीने गुजरे तो चैनल की हालत खराब होती चली गयी। असाइमेंट की टीम में भी फेरबदल होने शुरू हो गए। अच्छे लोग इस चैनल को गुड बॉय बोल गए और फंस गए बेचारे हम जैसे स्ट्रिंगर।

ये तो भला हो भड़ास 4 मीडिया का जिसके माध्यम से अपना दुःख कहने का मौका मिल रहा है। अन्यथा चैनल के अंदर तो स्ट्रिंगरो का दर्द सुनने को कोई तैयार नहीं है। अभी कुछ ही दिनों पहले जब मैंने अपनी स्टोरी के पेमेंट की बात की तो कहा गया कि जल्द ही आपका पैसा आप तक पहुंच जाएगा लेकिन अबी तक मुझे पेमेंट नही मिला है। यह हालत सिर्फ मेरी अकेले की नहीं है बल्कि मेरे जैसे अन्य स्ट्रिंगरों की भी है। काफी संख्या में स्ट्रिंगरों ने तो खबर भेजनी भी चैनल को बंद कर दी है। अब एक आखिरी उम्मीद सिर्फ भड़ास4मीडिया से ही है जो हमारी आवाज उन चैनल के मालिक तक पंहुचा सकता है जिन्हे स्ट्रिंगरों की तकलीफ समझ नहीं आ रही। भड़ास4मीडिया हमेशा ही हमारे जैसे हजारों लोगों की आवाज उठाता रहा है।

धन्यवाद
XYZ

नक्षत्र न्यूज (बिहार-झारखण्ड) के एक स्ट्रिंगर द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित



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Comments on “नक्षत्र न्यूज हिन्दी (बिहार-झारखण्ड) भी स्ट्रिंगरों को नहीं दे रहा पैसा, आर्थिक तंगी के चलते घर-परिवार चलाना मुश्किल

  • नितीश कुमार, नालंदा, says:

    साधना न्यूज का भी यही हाल है तीन साल से पैसा नहीं दिया है…

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