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सियासत

जुमले भी अब थकने लगे हैं!

राकेश कायस्थ-

डोनाल्ड ट्रंप ने नौंवी बार दावा किया है कि उन्होंने व्यापार बंद करने की धमकी देकर भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवा दिया। ट्रंप बेशक बड़बोले हों लेकिन सवाल ये भी है कि अगर भारत स्थायी सैन्य तनाव वाला क्षेत्र बन जाता है तो कोई बड़ा निवेशक यहां पैसा क्यों लगाएगा?

बतौर पत्रकार और नागरिक हम सब लोगों ने पहले भी आतंकवादी हमले देखे हैं। मीडिया आसमान सिर पर उठाकर रखता था कि सुरक्षा चूक कैसे हुई और साजिश किस तरह रची गई, जो लोग इसमें शामिल हैं, उन्हें अब तक पकड़ा क्यों नहीं गया। लेकिन ये सारे सवाल सिरे से गायब हैं।

नरेंद्र मोदी पूरे देश में इस तरह घूम रहे हैं, जैसे क्रिकेट मैच जीतकर आये हों। ये पैटर्न ठीक उसी तरह का है, जैसा पुलवामा हमले के बाद था। फर्क सिर्फ इतना है कि पुलवामा के वक्त चुनाव नजदीक था और उसे तत्काल भुना लिया गया। पुलवामा की गुत्थी अनसुलझी रही और अभी तक रूझान बता रहे हैं कि पहलगाम के दोषियों को सजा दिलाने में किसी की रुचि नहीं है।

पाकिस्तान के खिलाफ सैनिक कार्रवाई की जो परतें खुल रही हैं, वे परेशान करने वाली और बहुत हद तक शर्मसार करने वाली भी है। देश के सीडीएस ने एक विदेशी चैनल को दिये गये इंटरव्यू में पहली बार स्वीकार किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय विमान गिराये गये। उनका कहना है कि यह महत्वपूर्ण नहीं है कि कितने विमान गिरे बल्कि ज्यादा अहम ये है कि हमने इससे क्या सीखा। पूर्व थलसेना अध्यक्ष वी.पी. मलिक ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर से हमें क्या हासिल हुआ यह केवल इतिहास तय करेगा।

नरेंद्र मोदी इतिहास बदलना चाहते हैं लेकिन उन्हें डर है कि कहीं वर्तमान उनके हाथ से ना फिसल जाये। उनकी पूरी कोशिश वर्तमान को साधे रखने की है। जिस तरह देशभर में घूम-घूमकर प्रधानमंत्री पाकिस्तान को सबक सिखाने की कहानियां बांच रहे हैं, उससे यही लगता है कि उनके पास कोई और नई कहानी बची नहीं है। आगे पूरे राजनीतिक जीवन में सिर्फ युद्धोन्माद से काम चलाना पड़ेगा।

हौंक दिया, पटक के मारा, उल्टा टांग दिया, खाट खड़ी कर दी, जुमले भी अब थकने लगे हैं। लेकिन एक बात तय है कि वो ये कि प्रधानमंत्री के इस देश के आम नागरिकों के असाधारण रूप से मूर्ख होने पर अटल विश्वास है। मुहल्ला स्तरीय राजनीति के अंतरराष्ट्रीयकरण का क्रेडिट तो उन्हें मिलना ही चाहिए।

प्रधानमंत्री उसी वाराणसी के सांसद है, जहां मशहूर अस्सी घाट है और वहां गपोड़ों का प्रसिद्ध अड्डा यानी पप्पू की चाय की दुकान है। तन्नी गुरु अगर मिलते तो अपने अंदाज में इनसे यही कहते—सुनो गुरु वीर चक्र, महावीर चक्र, परमवीर चक्र जो लेना है सब ले लो। आर्मी वाली वर्दी सिलाई, नेवी और एयरफोर्स वाली सिलवाओ, फोटो खिचवाओ, हाथी हो, घोड़ा हो, गदहा हो या फिर हवाई जहाज जहां मन आये चढ़ जाओ लेकिन गुरू बस अब और चाटो मत….

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