इसी महीने झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार रवि प्रकाश को वर्ल्ड लंग कैंसर कांफ्रेंस (डब्ल्यूसीएलसी-2024) में पेशेंट एडवोकेट एजुकेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें बधाई भी दी थी. लेकिन आज शुक्रवार 20 सितंबर को सोरेन को दु:ख प्रकट करना पड़ा. कारण रहा, कैंसर से महीनों सालों तक जूझने के बाद पत्रकार रवि प्रकाश की सांसे थम चुकी हैं.
रवि प्रकाश जनवरी, 2021 से लंग कैंसर के चौथे स्टेज के मरीज थे. अब तक उनकी बीमारी दो बार प्रोग्रेस कर चुकी थी और उनके फेफड़ों का कैंसर मस्तिष्क तक पहुंच गया था.
साल 2021 के जनवरी माह में रवि प्रकाश को लंग कैंसर के होने का पता चला था.
इसके बाद इस घातक बीमारी से लड़ने की उनकी जंग शुरू हुई और इस दौरान मुंबई के टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट में उनका लंबा इलाज चला.
बीबीसी में लिखे गए उनके एक लेख के अनुसार, वह किसी प्रकार का धूम्रपान नहीं करते थे फिर भी उन्हें लंग कैंसर हुआ, इसके बाद उनकी यह धारणा टूट गई कि सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही लंग कैंसर होता है.
फरवरी 2021 में ही उनका इलाज शुरू हो गया था. डॉक्टरों ने बताया था कि उनके पास 18 महीनों का ही वक्त है. बावजूद इसके रवि ने अदम्य जीवटता का परिचय दिया और भारत में लंग कैंसर के मरीजों के सामने आने वाली दिक्कतों पर अलग-अलग मंचों पर बोलते, लिखते और जागरूकता फैलाते रहे.
रवि ने कैंसर को भारत में महामारी घोषित कर नोटिफाइड बीमारी की कटेगरी में रखे जाने के लिए लगातार लिखा. उन्होंने कैंसर की दवाइयों की कीमत को लेकर भी तमाम लेख लिखे थे.
उनका एक बेटा है जो आईआईटी दिल्ली से बीटेक कर रहा है. वहीं, उनकी पत्नी संगीता इस पूरे संघर्ष में उनके साथ आखिरी सांस तक साए की तरह रहीं. बहरहाल, रवि प्रकाश को बचाया नहीं जा सका.
ये भी पढ़ें….
4th स्टेज के कैंसर का भुजाएं लहराकर मुकाबला करते पत्रकार को पत्नी का भरपूर साथ मिला
यह पुरस्कार आप सबको और कैंसर के लाखों मरीज़ों को समर्पित है- रवि प्रकाश
अंतिम स्टेज के कैंसर से लड़ रहे पत्रकार रवि प्रकाश सचमुच जीवटता की मिसाल हैं!



