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ग़ाज़ीपुर से अमेरिका पहुँचे इस शख़्स ने शुरू की नई कम्पनी, आज करोड़ों का धंधा और ढेर सारे पेटेंट!

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अजीत साही-

मियामी (फ़्लोरिडा) : तीन महीने पहले रईस अहमद भाई से मुलाक़ात हुई. रईस भाई उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर में एक बड़े ख़ानदान में पैदा हुए थे. पैंतीस साल पहले अमेरिका आ गए. यहाँ फ़्लोरिडा राज्य के मायामी शहर में रहते हैं. रईस भाई डबल पीएचडी हैं. विषय है बायोटेक्नॉलोजी. अमेरिका में अपनी कम्पनी लगाई जो करोड़ों का धंधा करती है. कई पेटेंट हैं इनके नाम. फ़्लोरिडा की एक जानीमानी यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर भी रहे. मैंने कहा, सर, मैं तो बमुश्किल बीए पास हुआ निठल्ला हूँ. मेरे इंडिया में न होने से कोई नुक़सान नहीं है. लेकिन आप जैसे ज्ञानी देश छोड़ दें इससे देश का बहुत नुक़सान है.

बाएँ रईस अहमद और दाएँ अजीत साही

रईस भाई हंस के बोले, अजित भाई, मैं इंडिया में जब था तो अपनी फ़ील्ड में टॉप पर था. मुझे पूरी दुनिया से ऑफ़र आता था लेकिन मुझे इंडिया से प्रेम था. मैंने CSIR (Council of Scientific and Industrial Research) के लिए भी काम किया. हमने एक नई टेक्नॉलाजी बनाई जिसके लिए CSIR के हम वैज्ञानिकों को भारत और अमेरिका दोनों में पेटेंट मिला था. लेकिन कुछ साल में मुझे समझ आ गया कि इंडिया में मेरिट के बल पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता है. वहाँ साइंस में भी एक विशेष वर्ग के लोगों का वर्चस्व है और वो अपने वर्ग से बाहर के किसी व्यक्ति को आगे नहीं बढ़ने देते हैं. मुझे पूरी स्कॉलरशिप पर अमेरिका में दूसरी पीएचडी करने का ऑफ़र आया और मैं यहाँ चला आया. तब से यहाँ हूँ और अब अमेरिकी नागरिक हूँ. अमेरिका में मुझे कभी भी ये महसूस नहीं हुआ कि मेरे टैलेंट की क़ीमत नहीं है.

मैंने पूछा, सर, विशेष वर्ग से क्या आपका इशारा ब्राह्मण की ओर है? वो हंस दिए.

आगे सुनिए. रईस भाई ने बताया कि उनको हाल में पता चला कि पैंतीस साल पहले जिस काम के लिए CSIR को भारत में पेटेंट मिला था उसके वैज्ञानिकों की लिस्ट में से रईस भाई का नाम निकाल दिया गया है. मैं हैरान रह गया. मैंने पूछा ऐसा कैसे हो सकता है? वो हँस कर बोले मैं मुसलमान हूँ शायद इसलिए मेरा नाम हटा दिया होगा. मैंने कहा कि आप CSIR को लिखिए और फ़ाइट कीजिए? वो ठहाका लगा कर बोले, अजित भाई, किसके पास इतना टाइम हैं? ये इंडिया के लोग कूप मंडूक हैं. उसी कुएँ में पैदा होते हैं और वहीं ख़त्म हो जाते हैं.

मैंने जल्दी से एक सेल्फ़ी ले ली और पूछा कि क्या मैं आपके बारे में फ़ेसबुक पर पोस्ट कर सकता हूँ? उन्होंने हामी भर दी.

पोस्ट लगाते लगाते मेरे दिल में ख़्याल आया CSIR के बारे में कुछ पढ़ा जाए. गूगल किया तो सामने क्या आया उसका स्क्रीनशॉट नीचे है.

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