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टीओआई के राजशेखर झा बताएं, किसके कहने पर नजीब-आईएस वाली ख़बर प्‍लांट की थी?

जेएनयू के लापता छात्र नजीब के बारे में टाइम्‍स ऑफ इंडिया में इसके पत्रकार राजशेखर झा ने फर्जी खबर प्‍लांट की. इस खबर में बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया है कि नजीम यूट्यूब और गूगल पर आईएस (इस्लामिक स्टेट) के बारे में वीडियो आदि खोज देखा करता था, साथ ही वह आईएस की कार्यप्रणाली, विचारधारा, भर्ती आदि के बारे में अध्ययन करता था. खबर में बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने नजीब की लैपटाप के जांच के बाद यह जानकारी हासिल की है. उधर, इस खबर के छपने के बाद दिल्ली पुलिस ने खंडन भेज दिया कि उसने ऐसी कोई जांच लैपटाप की नहीं की और न ही ऐसा कोई नतीजा निकला है.

जेएनयू के लापता छात्र नजीब के बारे में टाइम्‍स ऑफ इंडिया में इसके पत्रकार राजशेखर झा ने फर्जी खबर प्‍लांट की. इस खबर में बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया है कि नजीम यूट्यूब और गूगल पर आईएस (इस्लामिक स्टेट) के बारे में वीडियो आदि खोज देखा करता था, साथ ही वह आईएस की कार्यप्रणाली, विचारधारा, भर्ती आदि के बारे में अध्ययन करता था. खबर में बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने नजीब की लैपटाप के जांच के बाद यह जानकारी हासिल की है. उधर, इस खबर के छपने के बाद दिल्ली पुलिस ने खंडन भेज दिया कि उसने ऐसी कोई जांच लैपटाप की नहीं की और न ही ऐसा कोई नतीजा निकला है.

फर्जी खबर की सच्‍चाई सामने आने के बाद सोशल मीडिया में टीओआई के राजशेखर झा के खिलाफ अभियान चला. फिर भी इस शख्स ने माफी नहीं मांगी. हां, जो उससे सवाल पूछता था उसे वह ट्विटर पर ब्‍लॉक किए जा रहा था. बाद में राजशेखर झा ने अपना फेसबुक एकाउंट बंद कर दिया. अपने ट्विटर एकाउंट की सेटिंग ऐसी कर ली कि केवल वेरिफाइड यूजर्स ही उसके एकाउंट तक पहुंच सकते थे.

नजीब को पुलिस अब तक खोज नहीं पाई है. पुलिस को खुद टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर का खंडन देना पड़ा है. मान लीजिए कि नजीब (कोई और नाम सुविधा के लिए चुन सकते हैं) अगर मौजूद होता और इस अखबार में बिलकुल 21 मार्च वाली खबर छपती कि वह इस्‍लामिक स्‍टेट के बारे में गूगल और यूट्यूब पर खोजता था और उसके नेताओं के भाषण सुनता था, तब कैसा नज़ारा होता? दिल्‍ली पुलिस को उसे गिरफ्तार करने में घंटा भर भी नहीं लगता. उसके खिलाफ़ साक्ष्‍य गढ़ लिए जाते. एक खबर दूसरी खबरों का आधार बन जाती और बड़े-बड़े हर्फों में करार दिया जाता कि आइएस का दिल्‍ली मॉड्यूल जेएनयू से ऑपरेट करता था.

यह कितना खतरनाक हो सकता है, उसे बताने की ज़रूरत नहीं. हम दिल्‍ली के कश्‍मीरी पत्रकार इफ्तिखार गीलानी का हश्र देख चुके हैं जिस मामले में कई पत्रकारों ने गलत रिपोर्टिंग कर के आतंक के मामले में उन्‍हें जेल की हवा खिलवा दी थी. नीता शर्मा ने पुलिस की थ्यूरी के हिसाब से खबर प्‍लांट कर गीलानी को दोषी बना दिया था, जिसकी थर्ड डिग्री सज़ा गीलानी को भुगतनी पडी. इस पत्रकारिता जगत में गीलानी आज भी दिल्‍ली के आइएनएस बिल्डिंग वाले रुफी मार्ग इलाके में दिन-भर दौड़भाग करते पाए जाते हैं जबकि नीता शर्मा सर्वश्रेष्‍ठ रिपोर्टर का तमगा हासिल कर के अपने पाप से मुक्‍त हो चुकी हैं.

चकोलेबाज़ के नाम से एक ट्वीट आया है जिसमें गरीब मुसलमानों की जिंदगी बरबाद करने का आरोप कुछ पत्रकारों पर लगाया गया है. नीता शर्मा का भी उसमें नाम है. नीता शर्मा ने गीलानी की जिंदगी बरबाद की तो नजीब के मामले में टाइम्‍स ऑफ इंडिया के राजशेखर झा ने बहुत गंदा काम किया है.

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