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उत्तराखंड

पेपर लीक प्रकरण : CBI जांच की मांग पर अड़े युवा, देहरादून के परेड ग्राउंड में चार दिन से धरना जारी

देहरादून। 21 सितंबर को हुई स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के पेपर लीक प्रकरण ने उत्तराखंड की सियासत और सड़क दोनों को गर्मा दिया है। युवाओं ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ दिया है। राजधानी देहरादून इसका मुख्य केंद्र बना हुआ है, जहां परेड ग्राउंड के बाहर सैकड़ों बेरोजगार युवा पिछले चार दिनों से डटे हुए हैं।

प्रशासन का प्रयास नाकाम

रविवार को देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल और एसएसपी अजय सिंह धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से बातचीत कर धरना खत्म करने की अपील की। लेकिन बेरोजगार युवाओं ने जिला प्रशासन के प्रस्ताव को ठुकराते हुए साफ कह दिया कि जब तक सीबीआई जांच की घोषणा नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

डीएम सविन बंसल ने युवाओं को भरोसा दिलाया— “छात्र-छात्राओं का भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच एजेंसियों ने मिले इनपुट्स पर कार्रवाई की है और दोषियों पर शिकंजा कसा गया है। सरकार और मुख्यमंत्री युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील हैं।”

सरकार का दावा – 25 हजार नौकरियां दीं

डीएम ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने पिछले चार वर्षों में 25 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं और सभी नियुक्तियां पारदर्शी रहीं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने नकल विरोधी कानून लागू कर नकल माफियाओं पर नकेल कसी है।

SIT कर रही जांच

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जांच सिर्फ हरिद्वार के केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में परीक्षाओं की जांच हो रही है। पेपर लीक मामले की तह तक जाने के लिए एएसपी जया बलूनी की अध्यक्षता में विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। यह टीम एक माह में रिपोर्ट सौंपेगी और जांच की निगरानी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज बीएस वर्मा करेंगे।

पेपर लीक का पूरा घटनाक्रम

  • 21 सितंबर: यूकेएसएसएससी ने 416 पदों के लिए स्नातक स्तरीय परीक्षा कराई।
  • परीक्षा के दौरान ही प्रश्न पत्र के पन्ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए।
  • 20 सितंबर: नकल माफिया हाकम सिंह और सहयोगी पंकज गौड़ गिरफ्तार।
  • 24 सितंबर: मास्टरमाइंड खालिद मलिक हरिद्वार से पकड़ा गया, जिसने पेपर लीक की साजिश कबूल की।
  • उसी दिन सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा— “नकल जिहाद चलाने वालों को मिट्टी में मिला देंगे।”
  • 25 सितंबर: SIT का गठन हुआ। एक सेक्टर मजिस्ट्रेट और असिस्टेंट प्रोफेसर निलंबित, दारोगा और सिपाही पर कार्रवाई हुई।
  • सीएम पुष्कर धामी ने बयान दिया— “यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि नकल का प्रकरण है।”

विपक्ष और छात्रों का आरोप

कांग्रेस ने छात्रों के आंदोलन को समर्थन दिया है। युवाओं का कहना है कि गिरफ्तार किए गए लोग केवल मोहरे हैं और असली मास्टरमाइंड अभी भी फरार हैं। इसी वजह से वे इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।

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