उमाशंकर मिश्र को डब्ल्यूएचओ की सड़क सुरक्षा फेलोशिप

नई दिल्ली : विज्ञान समाचार सेवा इंडिया साइंस वायर से जुड़े पत्रकार उमाशंकर मिश्र को वर्ष 2019 की विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सड़क सुरक्षा फेलोशिप प्रदान की गई है। उन्हें यह फेलोशिप भारत में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न आयामों को उजागर करने के लिए दी गई है।

सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विमर्श, जागरूकता प्रसार एवं नीतिगत पहल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह फेलोशिप दी जाती है। भारतीय पत्रकारों को दी जाने इस फेलोशिप का संयोजन नई दिल्ली की रिसर्च एवं एडवोकेसी के लिए समर्पित संस्था सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज द्वारा किया जाता है।

इस फेलोशिप के तहत उमाशंकर मिश्र भारत में अभिघात (ट्रॉमा) स्वास्थ्य सेवाओं पर केंद्रित अध्ययन कार्य एवं लेखन करेंगे। वह यह भी पता लगाने का प्रयास करेंगे कि भारतीय सड़कें पैदल यात्रियों, साइकिल सवारों और दोपहिया चालकों को सड़क उपयोगकर्ताओं का सबसे संवेदनशील समूह कैसे बनाती हैं। इसके अलावा, डेटा जर्नलिज्म तकनीकों का उपयोग करके भारतीय सड़कों को सुरक्षित बनाने की चुनौतियों को भी इस फेलोशिप के तहत सामने लाने की कोशिश की जाएगी।

हिंदी वेब पत्रकारिता में पीएचडी कर रहे उमाशंकर एक सुपरिचित विज्ञान पत्रकार और शोधकर्ता हैं। हिंदी मीडिया में लगभग 14 वर्षों के अनुभव के साथ पिछले करीब तीन वर्षों से वह विज्ञान प्रसार द्वारा संचालित विज्ञान समाचार सेवा इंडिया साइंस वायर से जुड़े हैं। इससे पहले वह सात वर्षों तक अमर उजाला और पांच साल तक इंडिया फाउंडेशन फॉर रूरल डेवेलपमेंट की पत्रिका सोपान से जुड़े रहे हैं।

उमाशंकर मिश्र को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अलावा पर्यावरण, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, कृषि, स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, ग्रामीण विकास, मीडिया एवं भाषा और जल, जंगल तथा जमीन जैसे विषयों को मुख्य रूप से कवर करने के लिए जाना जाता है। इंडिया साइंस वायर में वह भारतीय वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में हो रहे शोध एवं विकास संबंधी खबरों को प्रमुखता से उठाते हैं।

उनके आलेख हिंदी, अंग्रेजी और मराठी के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित किए गए हैं। इनमें डाउन टू अर्थ, द हिंदू बिजनेस लाइन, द प्रिंट, फर्स्ट पोस्ट, कैच न्यूज़, मेघालय गार्जियन, द वायर, आउटलुक, जनसत्ता, योजना, कुरुक्षेत्र, सकाल समूह का मराठी दैनिक एग्रोवन, देशदूत, दैनिक जागरण, अमर उजाला, प्रभात खबर, राष्ट्रीय सहारा, पंजाब केसरी, हिंदुस्तान, चौथी दुनिया, शरद कृषि, लिगेसी इंडिया और भारतीय पक्ष मुख्य रूप से शामिल हैं।

एक बातचीत में उमाशंकर मिश्र ने बताया कि “भारत में हर साल करीब दो लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवा बैठते हैं। इनमें 30-35 आयु वर्ग के युवाओं की संख्या सबसे अधिक होती है। यह भी महत्वपूर्ण तथ्य है कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और चोटों का वितरण उम्र, लिंग, महीनों और समय के अनुसार बदलता रहता है। सड़क हादसे और उनमें हताहत होने के मामले गंभीर सामाजिक एवं स्वास्थ्य समस्या हैं। इसीलिए, इसके विभिन्न आयामों पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है।”

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