इस पूर्व आईएएस ने योगीजी की निवेश और रोजगार पर आंकड़ेबाजी को झूठा करार दिया!

Surya Pratap Singh : औद्योगिक निवेश व रोजगार पर योगी सरकार का सफेद झूठ! संलग्न अखबार में प्रायोजित खबर में लिखा है कि 1.16 लाख करोड़ रु. का निवेश हुआ व 28 लाख नौकरी दी गयी। योगी सरकार में हिम्मत है तो सूची जारी करो और मुझे सत्यापन की अनुमति दें….मैं चुनौती स्वीकार करता हूं। प्रदेश में निवेश आ नहीं रहा अपितु उक्त घोषणा से अधिक पलायन कर गया या बंद हो गया है, मैं ये सिद्ध कर दूंगा। यहाँ कुछ दृष्टांत दे रहा हूँ।

योगी सरकार ने पूर्व इन्वेस्टमेंट समिट में 4.25 लाख करोड़ रु. के संभावित निवेश के झूठे यानी उद्योगों से जबरन प्राप्त आंकड़े दिए थे। और आज ग्राउंड ब्रेकिंग से पूर्व ही 1.16 करोड़ के निवेश की बात रख दी, कितनी साफगोई से झूठ बोला जा रहा है।

मैं उद्योगों के प्रदेश से पलायन के कुछ दृश्टान्त अपनी बात सिद्ध करने के लिये नीचे रख रहा हूँ और योगी सरकार को चुनौती देता हूँ कि वे मुझे झूठा सिद्ध कर के दिखाएं :

ग्रेटर नोएडा से सटी उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक निगम (यूपीएसआइडीसी) का एक इंडस्ट्रियल एरिया है जिसमे करीब दो हजार उद्योगों में से 50 फीसद उद्योग में उत्पादन नहीं हो रहा है। चालू उद्योग 2018 में से 1135 बंद हो चुके है। 480 भूखंड खाली पड़े हैं।

नोएडा इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अनुसार 40 हजार कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। पलायन करना इसी वर्ष उत्पादन बंद करने वाली आठ कंपनियों के नाम यहाँ दे रहा हूँ, योगी सरकार सत्यापन करा लें:

1- सीएनएच इंडस्ट्रियल इंडिया प्रा. लि. (न्यू हॉलैंड ट्रैक्टर्स प्रा. लि.)
2- श्री जगदम्बा नाट्स प्राइवेट लिमिटेड
3- एक्सपर्ट मेटलटेक प्राइवेट लिमिटेड
4- जीटी कार्गों फिटिंग प्राइवेट लिमिटेड
5- मैटेरियल मोविल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
6- आरएस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड
7- राहुल योनटेक प्राइवेट लिमिटेड
8- विमल डाइंग प्राइवेट लिमिटेड

नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों का भृष्टाचार व योगी सरकार के झूठ को दर्शाते हुए एक उद्द्योग का फ्रॉड उजागर कर रहा हूँ:

इस वर्ष नोएडा में 1,200 करोड़ रुपये निवेश के वादे के साथ भूटानी इंफ्रा को नोएडा के सेक्टर 90 में एक फैक्ट्री लगाने के लिये करीब 45 लाख वर्गफुट की भूमि दी गयी। यह एक रियल स्टेट कंपनी है जिसने वादे के विपरीत कोई फैक्ट्री न लगा के 35 लाख वर्ग फुट को कार्यालय और सात लाख वर्ग फुट शॉपिंग मॉल व बाकी में 500 स्टूडियो अपार्टमेंट बनाने का नक्शा पास कराया है।

लखनऊ के ही दृश्टान्त देख लीजिए, दिए तले अंधेरा तो ठीक करें योगी जी। लखनऊ के पॉटरी उद्योग दम तोड़ चुका है। उप्र लघु उद्योग विकास निगम परिसर में पॉटरी की 11 इकाइयों में 400 से अधिक कारीगर हर दिन काम करके अपनी रोजी रोटी का इंतजाम करते थे। आज सब बंद हैं, पहले इन्हें तो पुनर्जीवित करिये। उद्योगों में 80%रोजगार लघु व मझले उद्योगों से आता है।

कानपुर से लगभग सभी बड़ी इकाइयां या तो बंद हो गयी है या पलायन कर चुकी हैं। केन्द्र सरकार ने गत वर्ष कानपुर के चमड़े उद्योग को बढ़ावा देने के लिए रु.2300 करोड़ के पैकेज तो दिया लेकिन आया एक भी पैसा नही अपितु 400 टेनरी बंद हो गई हैं और बंगाल के लिए पलायन कर गयी हैं। हरदोई के संडीला में इन इकाइयों को शिफ्ट कराना था जो नहीं हो पाया। 60,000 कर्मी बेरोजगार हो चुके हैं।

UPSIDC की कन्नौज में प्लास्टिक, व इत्र की योजना ठंडे बस्ते में चली गयी है। ट्रांस गंगा परियोजना कानपुर पर पूर्व सरकार में शुरू हुआ काम भी बंद हो गया है।

आज नोयडा, ग्रेटर नोएडा, व यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण में 50% से अधिक औद्योगिक प्लॉट्स खाली पड़े हैं। रियल एस्टेट उद्योग बंद पड़ा है।

नोएडा के सेक्टर 11-12 में पुराने उद्योग थे, आज 80%बंद होकर गुरुग्राम, व राजस्थान जा चुके हैं।

पिछले इन्वेस्टर समिट में अडानी व अम्बानी के इन्वेस्टमेंट का हाइप क्रिएट किया गया था। अम्बानी ने रिलायंस जियो के फ़ोन निर्माण के लिए 400 करोड़ की बात की थी, आज तक 4 करोड़ फ़ोन का वितरण देश में हुआ है, 100% चीन मे निर्मित हुआ। उत्तर प्रदेश में कोई इन्वेस्टमेंट नही आया।

इसी इन्वेस्टर मीट में अडाणी ग्रीन समेत छह सौर बिजली उत्पादन कंपनियों से सौर ऊर्जा से बिजली बनाने की योजना से 80 मेगा वाट बनाने की बात हुई थी कि अडानी रु.4,000 करोड़ का निवेश करेगा। अडानी ने यह निवेश राजस्थान में शिफ्ट कर दिया। पॉवर कारपोरेशन ने सौर ऊर्जा बिजली खरीदने का करार अडानी के साथ समाप्त कर दिया। UPNEDA के भृष्टाचार से सौर ऊर्जा क्षेत्र में कुछ होना संभव नहीं लगता।

सौर ऊर्जा में जिन निम्न कंपनियों ने वादा खिलाफत की अर्थात पलायन कर गयी, ये हैं:

-सुधाकर इन्फ्राटेक प्रा. लि.

  • टेक्नीकल एसोसियेट्स लखनऊ – सहस्रधारा इनर्जी प्रा. लि.,
  • अवध रबर प्रोप मद्रास इलास्टोमर लि. – अडाणी ग्रीन इनर्जी लि.
  • पिनाकल एयर प्रा. लि.
    एचसीएल, अमूल व समसुंग कंपनियों के जिस निवेश जी बात योगी सरकार कर रही है वह भी पूर्व सरकार के समय का है और वह भी आधा अधूरा….अर्ध सत्य।
    पलायन करने उद्योगों की सूची इतनी लंबी है कि लिखते लिखते माह लग जाएंगे।

मेरी चुनौती:

योगी सरकार को मेरी चुनौती है कि यदि योगी सरकार के ढाई वर्ष में कोई भी नया निवेश आया है तो उसकी सूची …
उद्योग बंधु के वेबसाइट पर फैक्ट्रीज के नाम व दिए रोजगार के साथ क्यों नहीं डालते?
अलीगढ़ का ताला, मुरादाबाद का पीतल, खुर्जा का पॉटरी, मिर्जापुर का कालीन, बनारस के सिल्क कानपुर के चमड़ा उद्योग बढ़ा नहीं, घट रहा है। टेक्सटाइल/स्पिनिंग मिल्स बंद होकर गुजरात जा चुकी हैं, खादी में केवल पॉवरलूम का माल बिक रहा है। पिलखुआ, अम्बेडकर नगर का चादर उद्योग बंद होने के कगार पर है, इसे बचा लो, महोदय।
गाय, गोबर, बटबृक्ष,कुम्भ, कांवर, दीपदान, मूर्ति से कुछ समय निकाल कर ….. नौकशाही के चंगुल से निकल कर धरातल पर कुछ substantive काम होगा, तो आपको प्रदेश याद करेगा।

अभी चुनाव में कुछ समय है….निवेश के झूठी बात कर बेरोजगार युवाओं को भृमित न करें।

जय हिंद-जय भारत।

यूपी कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे सूर्य प्रताप सिंह की एफबी वॉल से.

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