संजय कुमार सिंह
आज के अखबारों में माइक्रोसॉफ्ट के कारण दुनिया भर में हुई परेशानी की खबर सबसे महत्वपूर्ण है और मेरे सात में से छह अखबारों में वही लीड है। पर यह कॉलम ऐसी खबरों के लिए नहीं है। आज यहां मैं प्रशिक्षु आईएएस के झूठ और यूपीएससी के भोलेपन की चर्चा करूंगा और वो सवाल उठाउंगा जो यूपीएससी की विज्ञप्ति के बाद उठने चाहिये थे। उससे पहले इंडियन एक्सप्रेस की आज की लीड कम दिलचस्प नहीं है। यह खबर आज नवोदय टाइम्स में बॉटम भी है। इससे पता चलता है भाजपा की सरकारें जब देश भर को फल और खाने की चीजें बेचने वालों के नाम और धर्म में उलझाकर रखने की कोशिश कर रही हैं तो मामला राजभवनों और राज्यपालों को मिली प्रतिरक्षा पर विचार का भी है। हाल में आपने सुना होगा कि भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण चुनाव हार गये रघुवर दास को राज्यपाल बना दिया गया था और उनके बेटे ने राजभवन के कर्मचारियों से मारपीट का मामला चल रहा है। बंगाल के राज्यपाल पर महिला कर्मचारी से छेड़छाड़ का आरोप है। महिला कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। केरल की सरकार ने राष्ट्रपति और राज्यपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शिकायत कर रखी है। तमिलनाडु के राज्यपाल एक मंत्री को हटाने का फैसला करके विवादों में रह चुके हैं। कई राज्यपालों के जब गैर भाजपाई सरकारों से भिड़े रहने की खबर है तब खबर यह भी है तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने 13 विधेयकों को मंजूरी दे दी है। पूर्व में आरएन रवि भी राज्य सरकार से भिड़ते रहे हैं। इसी 22 मार्च को एक खबर थी, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती पर तमिलनाडु के राज्यपाल ने बदला फैसला।
राज्यपालों से संबंधित ये कुछ मामले हैं जो मुझे याद हैं और इनमें बंगाल व उड़ीशा के राज्यपालों का मामला सबसे ताजा और कानून व्यवस्था का सामान्य मामला होने के बावजूद राज्यपाल से संबंधित होने के कारण उन्हें मिली छूट के मद्देनजर पीड़ितों को न्याया नहीं मिल रहा है। ऐसे में आज सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस ने इसे लीड बनाया है तो आप समझ सकते हैं कि मीडिया अपनी जिम्मेदारी कितनी गंभीरता से निभा रहा है। या हेडलाइन मैनेजमेंट हो रहा है तो कितना बढ़िया। वैसे, आज के हेडलाइन मैनेजमेंट में माइक्रोसॉफ्ट की भूमिका कम नहीं है। राज्यपालों से संबंधित खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपालों को मिली छूट पर विचार करेगा। अदालत ने कहा है कि इस मामले में दाखिल याचिका में केंद्र को भी पक्ष बनाया जायेगा और अटॉर्नी जनरल से मदद मांगी गई है। बंगाल सरकार को भी नोटिस जारी किया गया है। अभी राज्यपालों को किसी भी तरह के आपराधिक अभियोजन से प्रतिरक्षा है। यही राज्यपाल निर्वाचित मंत्रियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देते हैं। नैतिकता का ताकजा है कि किसी आरोपी को राज्यपाल नहीं बनाया जाये और अगर पद पर रहते हुए कोई आरोप लगे तो इस्तीफा देकर मामले का सामना करें। (या कम से कम निर्वाचित मुख्यमंत्रियों के खिलाफ पीएमएलए जैसे मामले में कार्रवाई की अनुमति नहीं दें)। नरेन्द्र मोदी के बनाये केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में निर्देश दिया है कि उनके आदेशों के खिलाफ मुकदमा चलाने वाले कुलपतियों और विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों को अपने निजी खर्च पर ऐसा करना चाहिये। दूसरी ओर, एक राज्यपाल और राष्ट्रपति के खिलाफ राज्य सरकार की अपील सुप्रीम कोर्ट में है। अब आईएएस प्रशिक्षु के खिलाफ कार्रवाई पर आता हूं।
आईएएस प्रशिक्षु के खिलाफ कार्रवाई
यह कर्रवाई तब हुई है जब नीट, नेट और तमाम दूसरी परीक्षाओं में घपले-घोटाले के आरोप हैं। 10 साल में परीक्षा की पवित्रता नष्ट-भ्रष्ट हो चुकी है। प्रश्न पत्र लीक होने के आरोप हैं और नीट परीक्षा रद्द करने से बचने के लिए एक ऐसी संस्था की रिपोर्ट का सहारा लिया गया जिसका एनटीए से संबंध है और इस रिपोर्ट में भी गड़बड़ी है। नरेन्द्र मोदी की सरकार परीक्षा ढंग से कराने में तो नाकाम रही ही है जो व्यवस्था की है वह ढंग से काम नहीं कर रही है और तमाम मामले हैं। पिछले दस साल में यही कहा जाता रहा है कि इन सबके बावजूद यूपीएससी की परीक्षा पर कोई दाग नहीं है। उसके प्रश्नपत्र लीक नहीं होते और चयन में गड़बड़ी की शिकायत नहीं है। पर पूजा खेदकर के मामले ने पूरी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। यूपीएससी की विज्ञप्ति के अनुसार उसने अपनी पहचान बदल ली। पर क्या यह इतना आसान है या संभव है तो सिर्फ पूजा ने ऐसा किया इसकी क्या गारंटी है। यही नहीं, अगर ऐसा हुआ है तो सिस्टम में दोष है या फिर किसी ने कहीं कोई लापरवाही की है – उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं या कब होगी। उसकी पहचान कैसे होगी। यूपीएससी की उम्मीदवारी के लिए नाम बदलने का मतलब है हाईस्कूल से लेकर डिग्री तक के सर्टिफिकेट बदलना। क्या पूजा के मामले में ऐसा हुआ है। अगर हां तो जाहिर है, कई लोग जिम्मेदार हैं। पूरी व्यवस्था भ्रष्ट है और अगर नहीं तो यूपीएससी के स्तर पर जिसे इस गड़बड़ी को पकड़ना था – वह कौन है और क्या मामला लापरवाही का है, रिश्वतखोरी का या फिर सिफारिश का? यूपीएससी ने इस विज्ञप्ति में अपनी प्रशंसा कम नहीं की है पर बात उससे नहीं बनेगी। उपरोक्त सवालों का जवाब चाहिये होगा। ये सवाल आज मीडिया को करना चाहिये था पर कहीं कुछ ऐसा दिखा क्या?
ओम बिरला की बेटी का मामला
यह मामला इसलिए भी गंभीर है कि लोकसभा स्पीकर की बेटी के पहली ही बार में चयन से संबंधित विवाद भी है। भाजपा सरकार ने सोशल मीडिया से तमाम मामले हटवाये हैं पर यह मामला लोगों को मिलता रहता है और हाल में ध्रुव राठी के पैरोडी अकाउंट से इसका उल्लेख किया गया था तो एफआईआर धुव राठी के नाम से कराई गई औऱ खबरें भी छपीं। जाहिर है, मूल आरोप पर यह स्पष्टीकरण है कि उनका चयन विधिवत हुआ है। उनने परीक्षाएं दी हैं और चुनी भी गई हैं। जो एक बात अक्सर नहीं बताई जाती है और लोग नहीं जानते हैं वह यह है कि 2019 की परीक्षा का नतीजा चार अगस्त 2020 को घोषित हुआ था। इसमें 829 परीक्षार्थी सफल हुए थे। आजतक के फैक्ट चेक के अनुसार अंजलि का नाम इस परीक्षा की रिजर्व लिस्ट में था। लिखा नहीं है पर इसका मतलब हुआ कि चुने गये उम्मीदवारों की सूची में नहीं था। रिजर्व लिस्ट के बारे में बताया गया है कि इसमें 89 परीक्षार्थी थे जिसका एलान चार जनवरी 2021 को हुआ। संबंधित नोटिफिकेशन के अनुसार यूपीएससी रिजर्व लिस्ट भी बनाता है। इसके 89 उम्मीदवारों में एक, अंजलि बिड़ला भी हैं। इस लिस्ट में एक नोट है इसके अनुसार यह लिस्ट बदल सकती है और ऐसा माननीय अदालतों के समक्ष लंबित मामलों में अदालतों के आदेश से हो सकता है। जाहिर है, रिजर्व लिस्ट का मामला साफ नहीं है।
यही नहीं, आज तक की खबर के अनुसार, यूपीएससी की ओर से सात जनवरी, 2021 को एक स्प्ष्टीकरण भी जारी किया गया था। इसके मुताबिक कमीशन, चयनित उम्मीदवारों के अलावा एक कंसोलिडेटेड रिजर्व लिस्ट भी बनाता है। इसमें सामान्य और आरक्षित वर्ग, दोनों के उम्मीदवार होते हैं जिनके नाम की सिफारिश की जाती है। इसमें मुद्दा यह है कि 89 लोगों की लिस्ट में किसी एक का चयन किस आधार पर हुआ और बाकी सब का नहीं हुआ तो क्यों नहीं माना जाये कि जिसका हुआ उसका सिफारिश से हुआ। या सबका हो गया तो यह बताया क्यों नहीं जा रहा है। आजतक की ही रिपोर्ट में लिखा है, अंजलि ने इस मसले पर द क्विंट से बात करते हुए कहा था, “यूपीएससी ने पहले 927 रिक्तियां जारी की थीं, लेकिन जब अगस्त, 2020 में फाइनल रिजल्ट आया तब 829 रिक्तियां ही थीं। मैं आठ नंबर से कटऑफ मार्क के पीछे रह गई थी। लेकिन जनवरी 2021 में जब और अधिक रिक्तियां आईं तो रिजर्व लिस्ट से मेरा सेलेक्शन हो गया। सवाल है कि आठ नंबर कम थे तो यह संभव नहीं है कि अंजलि से ज्यादा नंबर किसी और का नहीं होगा तथा चुने गये अंतिम उम्मीदवार का नंबर अंजलि से आठ ज्यादा होगा। और अंजलि ही अगली उम्मीदवार होंगी। इंटरव्यू के अंकों से ऐसा संभव है। पर इंटरव्यू के अंक के बारे में आप जानते हैं। मेरा मानना है कि अंजलि को बताना चाहिये या फैक्ट चेक में यह स्पष्ट होना चाहिये कि 829 के बाद जब रिक्तियां बढ़ीं तो अंजलि का स्थान 830 वां है या ज्यादा। आठ नंबर के अंतर के बावजूद उनका स्थान 830 वां ही है इसमें मुझे शक है। मुझे नहीं पता कंसोलिडेटेड रिजर्व लिस्ट बनाने का आधार नंबर ही है या कुछ और तथा इस लिस्ट में नाम किस आधार पर हैं। कंसोलिडेट रिजर्व लिस्ट से उस साल सिर्फ अंजलि को चुना गया तो किस आधार पर और अगर सब को नहीं चुना गया तो जिन्हें छोड़ा गया उन्हें किस आधार पर।
जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा तब तक यह मानना पड़ेगा कि अंजलि को लोकसभा स्पीकर की बेटी होने का लाभ मिला है। मूल खबर जरूर गलत थी कि बिना परीक्षा दिये चयन हो गया पर अंजलि को पूजा जैसी सुविधा नहीं मिली यह तभी स्पष्ट होगा जब इसकी भी जांच हो। पूजा के मामले की जांच हो गई क्योंकि मामला मीडिया में चर्चित हो गया, इस मामले में लीपा-पोती होती रही। एफआईआर का डर रहा। यूपीएससी बचाव करता रहा और पूजा के मामले में भी यूपीएससी ने अपना दामन साफ दिखाने की पूरी कोशिश की है जबकि कई सवालों के जवाब नहीं हैं।
दो सेना प्रमुखों की दो किताबों का लोकार्पण टला
इंडियन एक्सप्रेस में आज एक और महत्वपूर्ण खबर है। इसके अनुसार पूर्व सेना प्रमुखों की दो किताबें जो लोकार्पण के लिए तैयार हैं उनका लोकार्पण रुक गया है। प्रकाशकों का कहना है कि रक्षा मंत्रालय / सेना के अधिकारियों ने क्लियरेंस के लिए पुस्तकों को वापस मंगा लिया है। मुझे याद नहीं है कि इमरजेंसी में और उसके बाद किसी किताब के प्रकाशन में कोई व्यवधान हुआ हो। फिल्म किस्सा कुर्सी का मामला जरूर विवाद में आया था लेकिन उसे सरकारी स्तर पर नहीं रोका गया था। जहां तक मुझे याद है उसे नष्ट करने का आरोप संजय गांधी पर था और सीबीआई ने उसकी जांच की थी। एनके सिंह की किताब द प्लेन ट्रुथ में एक अध्याय इसपर भी है और इसकी जांच मारुति के तबके कारखाने में भी की गई थी जो उस समय बन रही थी या शुरुआती अवस्था में थी। अघोषित इमरजेंसी में एक पूर्व सेना प्रमुख की किताब छह महीने से ज्यादा समय से लटकी हुई है। दूसरी का लोकार्पण दो अगस्त को होना निर्धारित हुआ था पर अब फिर टाल दिया गया है क्योंकि दोनों के प्रकाशकों को रक्षा मंत्रालय के संदेश का इंतजार है। इन दो पुस्तकों में एक 2002 से 2005 तक सेना प्रमुख रहे एनजी विज की किताब, अलोन इन द रिंग है जबकि 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे जनरल एमएम नरवने की किताब, फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी पहले से लंबित है और छह महीने में उसे भी क्लियरेंस नहीं मिली है।
जम्मू में तीन हजार सैनिक और
जम्मू में पिछले दिनों आतंकवादी वारदातें बढ़ने की खबर आपने पढ़ी होगी। उसी में चर्चा थी कि जम्मू में सैनिकों की कमी के कारण वारदातें बढ़ गई हैं। आज खबर है कि वहां तीन हजार सैनिक और तैनात किये गये हैं। अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सीएपीएफ के जवान भी तैनात किये जाएंगे और सब मिलकर जम्मू क्षेत्र में आतंकवादी वारदातों का मुकाबला तेज करेंगे।
बांग्लादेश में अशांति और हिंसा
बांग्लादेश में अशांति और हिंसा की खबर भी आज हमारे लिए महत्वपूर्ण है। द हिन्दू ने इसे सेकेंड लीड बनाया है। खबर के अनुसार 105 लोग मारे जा चुके हैं। टीवी समाचारों का प्रसारण बंद है। लोगों ने जेल पर हमला करके कैदियों को आजाद कराया और आग लगा दी।
दिल्ली के लिए 10 हजार करोड़ आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल का बजट 23 नवंबर को पेश किया जाना है। बैसाखी वाली सरकार के बजट को लेकर बहुतों को उत्सुकता है। दूसरी ओर सरकार ने जीएसटी के आंकड़ों को प्रचारित कर जनता को यही बताया है कि सब बढ़िया चल रहा है। ऐसे में लोगों को सरकार से काफी उम्मीद है। बजट को लेकर तरह-तरह की अटकलें तो सरकार की ओर से यह प्रचार भी कि बैठकें हो रही हैं। ऐसे में आज की एक बड़ी खबर दिल्ली के लिए केंद्र से 10,000 करोड़ रुपये की मांग भी महत्वपूर्ण है। खबर के अनुसार दिल्ली वालों ने केंद्र को 2.07 लाख करोड़ का आयकर और 25,000 करोड़ रुपये जीएसटी दिया है। बदले में केंद्र ने दिल्ली को एक पैसा भी नहीं दिया है। यही नहीं, दिल्ली की जनता ने अपनी सातों सीटें भाजपा को दी हैं और एनसीआर की भी सारी सीटें भाजपा को गई हैं। दिल्ली विधानसभा में भाजपा की हालत आप जानते हैं ऐसे में आम आदमी पार्टी की यह मांग महत्वपूर्ण है। देखा जाये।


