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मलेशिया में सम्मानित किये गए कवि अरविन्द श्रीवास्तव

वैश्विक स्तर पर ब्लॉगरों को एकजुट कर साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को प्राणवायु देने के उद्देश्य से आठवाँ अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन मलेशिया की राजधानी क्वालालम्पुर से 390 किलोमीटर दूर जोहोर बहरू शहर के सुरिया सिटी सभागार में आयोजित किया गया. इसमें मधेपुरा के ब्लॉगर व चर्चित कवि डॉ. अरविन्द श्रीवास्तव को वर्ष 2017 का प्रतिष्ठित ‘अविनाश वाचस्पति स्मृति परिकल्पना सम्मान’ से सम्मानित किया गया.

वैश्विक स्तर पर ब्लॉगरों को एकजुट कर साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को प्राणवायु देने के उद्देश्य से आठवाँ अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन मलेशिया की राजधानी क्वालालम्पुर से 390 किलोमीटर दूर जोहोर बहरू शहर के सुरिया सिटी सभागार में आयोजित किया गया. इसमें मधेपुरा के ब्लॉगर व चर्चित कवि डॉ. अरविन्द श्रीवास्तव को वर्ष 2017 का प्रतिष्ठित ‘अविनाश वाचस्पति स्मृति परिकल्पना सम्मान’ से सम्मानित किया गया.

स्मरण रहे कि गतवर्ष यह सम्मान छतीसगढ़ की ब्लॉगर डॉ. उर्मिला शुक्ला को प्रदान किया गया था. इस अवसर पर उन्हें अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र व ग्यारह हजार की धनराशी परिकल्पना संस्थान द्वारा प्रदान की गयी . हिंदी विकिपीडिया के प्रबन्धक माला चौबे ने बताया कि अरविन्द श्रीवास्तव के नेतृत्व, कौशल और हिंदी साहित्य की विश्वव्यापी गतिविधियों के समर्थन में रचनात्मक सहयोग देने तथा भारतीय संस्कृति के गौरवान्वयन हेतु किये जा रहे उनके प्रयासों की अनुशंसा हेतु यह सम्मान शुभाकांक्षाओं सहित भेट करती हूँ.

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व नगर विकास मंत्री श्री नकुल दुबे ने कहा कि समकालीन हिन्दी कविता के युवा हस्ताक्षर और प्रखर ब्लॉगर अरविन्द श्रीवास्तव एक ऐसे समर्पित साहित्यकार और ब्लॉगर हैं, जिन्होंने जनसंवेदना को एक नया आयाम देकर शब्दों का ऐसा ताना बाना बुना कि देखते-देखते उनकी जन पक्षधरता का मुरीद हो गया हमारा पूरा समकालीन समाज। परिकल्पना के सम्पादक रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि अरविन्द  बिहार से हिन्दी के युवा कवि हैं, लेखक हैं। संपादन-रेखांकन और अभिनय -प्रसारण जैसे कई विधाओं में वे अक्सर देखे जाते हैं। जितना वे प्रिंट पत्रिकाओं में छपते हैं, उतनी ही उनकी सक्रियता अंतर्जाल पत्रिकाओं में भी है। इस अवसर पर पूर्व पुलिस अधिकारी श्रीमती सत्या सिंह, रेवान्त पत्रिका की सम्पादक अनीता श्रीवास्तव, उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार श्री नीरज कुमार नैथानी, अवधी लोक गायिका कुसुम वर्मा, चित्रकार जे के पैन्यूली, पुरातत्वविद डॉ. रमाकांत कुशवाहा, सचिंद्रनाथ मिश्र, शुभ चतुर्वेदी आदि मौजूद थे।

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