चिन्मयानंद केस में राजनीतिक साजिश की परतें खुलने लगीं, भाजपा के 2 नेता SIT के रडार पर

स्वामी चिन्मयानन्द यौन उत्पीड़न/ब्लैकमेल कांड में एसआईटी जाँच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है वैसे वैसे राजनीतिक विद्वेष और राजनीतिक हत्या के षड्यंत्र की परतें भी खुलती जा रही हैं। जहाँ वायरल वीडियो से यौन उत्पीड़न और ब्लैकमेल के प्रथमदृष्टया साक्ष्य हैं वहीं स्वामी चिन्मयानन्द के विरुद्ध साजिश के तार का जुड़ाव लखनऊ से लेकर दिल्ली तक देखा जा रहा है। इस कांड के सामने आने पर शुरू से ही राजनितिक क्षेत्रों में इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अस्थिर करने और संघ पर हमले के रूप में देखा जा रहा है।

योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाओं के बाद मुख्यमंत्री बनवाने में स्वामी चिन्मयानन्द का बड़ा हाथ रहा है। स्वामी चिन्मयानन्द अभी से वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाओं के बाद योगी आदित्यनाथ को प्रधानमन्त्री के उम्मीदवार के रूप में संघ की इनर सर्किल में प्रोजेक्ट कर रहे थे। वैसे भी राजनीति के जानकार जानते हैं कि यदि योगी आदित्यनाथ लोकसभा और विधानसभा चुनाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे सबसे बड़े स्टार प्रचारक के रूप में उभरे हैं। ऐसा संघ की पहल पर ही संभव हो सका है, क्योंकि नरेंद्र मोदी कोई समानांतर व्यवस्था के पक्षधर नहीं हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद यौन उत्पीड़न केस की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) के रडार पर अब उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो नेता आ गए हैं। माना जा रहा है कि दोनों नेता वसूली मामले के तीन आरोपियों में से एक संजय सिंह के साथ करीबी संपर्क में रहे हैं। इन नेताओं को वीडियो रिकॉर्डिंग के बारे में विक्रम के जरिए पता चला था। विक्रम मामले का एक अन्य आरोपी है। कथित रूप से उन्होंने संजय से वीडियो रिकॉर्डिंग हासिल करने और संभवत: अपना राजनीतिक हित साधने के लिए इसका उपयोग करने की कोशिश की थी। वे वीडियो हासिल करने के लिए रुपये भी देना चाहते थे। ये नेता आरोपियों के साथ लगातार संपर्क में थे और एसआईटी उनकी भूमिका की जांच कर रही है।

दोनों नेता 30 अगस्त को राजस्थान के दौसा जिले में बालाजी मंदिर के पास उसी होटल में उपस्थित थे, जहां चिन्मयानंद के खिलाफ आरोप लगाने के एक सप्ताह बाद लापता छात्रा बरामद हुई थी। पीड़िता जिस कॉलेज में पढ़ती थी, उसके दो कर्मचारियों से भी एसआईटी पूछताछ कर रही है। पीड़िता ने अपने बयान में कॉलेज के प्रधानाचार्य, सचिव और वार्डन का भी उल्लेख किया था और यौन उत्पीड़न मामले में एसआईटी उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।

इस मामले को देख रही इलाहाबाद हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने एसआईटी द्वारा दाखिल रिपोर्ट पर संतोष व्यक्त किया है। एसआईटी दो मामलों की जांच कर रही है। चिन्मयानंद के आश्रम में संचालित कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा की शिकायत के आधार पर उसने 20 सितंबर को चिन्मयानंद को गिरफ्तार किया था। पीड़िता ने सबूत के तौर पर 40 वीडियो पेश किए थे। दूसरा मामला वलूसी से संबंधित है, जिसमें एसआईटी ने पीड़िता और उसके दोस्त संजय, विक्रम और सचिन को गिरफ्तार किया था।

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट.

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Posted by Bhadas4media on Thursday, October 3, 2019
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