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सियासत

I.N.D.I.A.

अमृत तिवारी-

नाम में क्या रखा है? नाम में बहुत कुछ रखा है. कल से आपका नाम चुन्नी लाल रख देता हूं या फिर सखरज या दुलारी. दावा है आप भड़क उठेंगे या उठेंगी. बहरहाल, उदाहरण के लिए खेदना, बगेदना, टुनटुन, डिभुक सरीखे नाम भी रखे जा सकते हैं. लेकिन पहले सुझाए नाम, आम तौर पर उत्तर भारतीय समाज में सहज ही प्रचलित रहे हैं. आज की तारीख में ये नाम बच्चों से जुदा हो चुके हैं. प्रचार और बिल-बोर्ड के फैंसी चमकदार दौर में ये नाम ‘कूल’ की अवधारणा से कोसो दूर हैं.

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विज्ञापन प्रधान समाज में नाम और उसकी ब्रांडिंग का काफी महत्व है. यही वजह है कि लोगों ने अपने गांव-समाज के नामों से किनारा करके कथित ‘cool’ नामों की ओर झपट पड़े. रोजाना सास-बहू वाले सीरियलों ने तो नाम के सिलसिले में घोर चरस बोया. विवान, विहान, नहान, अलीसी, मलिसा, चलीसा सब नाम भारतीय समाज में इंजेक्ट कर दिए. छितेसर, बलेसर, मानिकराम, अशोक, ब्रिजलता, कुसुम, कुमकुम, सरोज जैसे नाम आधार कार्ड में छटपटाते देखे गए.

कुल मिलाकर नए दौर में नामों की अपनी एक साइकोलॉजी है. जिसमें कूल, पवार, एक्सेप्टेंस आदि की दावेदारी है. आजकल शहरों की हाउसिंग सोसाइटिज के नाम देख लीजिए; अधिकांश के नाम फ्रेंच या अंग्रेजी में हैं. लॉर्ड पंपिया, एटीएस, केजीएफ, ला मर्सिया.. टाइप काफी ट्रेंडिंग में हैं. किसी भी सोसाइटी का नाम वहां के गांव या स्थानीय नाम पर नहीं मिलेगा. हाल में बने किसी भी हाउसिंग सोसाइटी का नाम आत्मा राम, बेचन प्रसाद, गुलहरिया, सुल्तानपुरी, पुष्प विहार, खतौनी, छितौनी आदि नहीं होगा. अधिकांस के नाम मार्कस ओलंपिया टाइप ही मिलेंगे.

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सौ बात की एक बात- नाम में काफी कुछ रखा है.

विपक्षी दलों का गुट अगर I.N.D.I.A. नाम से अपनी पहचान जारी कर रहा है तो मामला विचार करने योग्य है. विपक्ष भी अपने जनता के मनोविज्ञान और उस तक पहुंचने के आसान संसाधनों को खोज चुका है. विज्ञापन के दौर में जीने वाले विशाल जन-समूह को कैसे अट्रैक्ट करना है और कैसे उनकी सोच प्रभावित करनी है, उसका तोड़ सिर्फ मोदी गुट के पास ही नहीं बल्कि विपक्षी दलों के पास भी आ चुका है.

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‘इंडिया’ इसकी शुरुआत है. यह नाम ऐसा चौकस है कि इसकी साइकॉलजी काफी हद तक चुनावी प्रचार को धार देगी और विरोधियों के प्रचारतंत्र पर स्कोर करेगी. ममता दीदी को यह नाम यूं ही ख्याल में नहीं आया होगा. उदाहरण के लिए नीचे लिखे कुछ स्लग पढ़िए और समझिए-

‘इंडिया’ का NDA पर हमला
‘इंडिया’ ने बीजेपी को दिखाया आईना
‘इंडिया’ का पीएम मोदी पर तंज
‘इंडिया’ ने सरकार से मांगा जवाब
‘इंडिया’ का बयान- बीजेपी फैलाती है सांप्रदायिकता

एक लाइन में: इसके पीछे प्रचारतंत्र का कोई हैवी थिंक टैंक है.

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आखिरी बात: वैसे आपको क्या लगता है, ‘इंडिया’ चक देगा?

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1 Comment

1 Comment

  1. Pravesh

    July 18, 2023 at 9:25 pm

    “INDIA” should BEWARE of “JAICHANDS” like Arvind Kejrival, Mamta Bannerjee, Sharad Pawar, Nitish Kumar, etc.

    Any Doubt?

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