Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

झारखंड

गोल बनाकर पत्रकारों ने अभिभावक संघ अध्यक्ष की पगड़ी उछाली, खबर नहीं छापी

बड़े अखबार और उनके बेलगाम रिपोर्टर किस तरह गुटबंदी कर किसी की भी पगड़ी उछालने लगें, इसकी एक बानगी भर है अभिभावक संघ के अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह की आपबीती। अब तो सचमुच लगता है, पानी नाक से ऊपर हो चुका है। उनका कहना है कि स्थानीय रिपोर्टर्स ने एक तो गोल बनाकर उनकी पगड़ी उछाली, दूसरे खबर नहीं छापी। वह पूछते हैं कि क्या सामाजिक कार्यों का मीडिया को इस तरह विरोध करना चाहिए?

बड़े अखबार और उनके बेलगाम रिपोर्टर किस तरह गुटबंदी कर किसी की भी पगड़ी उछालने लगें, इसकी एक बानगी भर है अभिभावक संघ के अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह की आपबीती। अब तो सचमुच लगता है, पानी नाक से ऊपर हो चुका है। उनका कहना है कि स्थानीय रिपोर्टर्स ने एक तो गोल बनाकर उनकी पगड़ी उछाली, दूसरे खबर नहीं छापी। वह पूछते हैं कि क्या सामाजिक कार्यों का मीडिया को इस तरह विरोध करना चाहिए?

भुरकुंडा, रामगढ़ (झारखंड) के भारतीय अभिभावक संघ के अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह बताते हैं कि उन्होंने निजी विद्यालयों के शोषण के विरुद्ध 27 मार्च 2015 को भूख हड़ताल के माध्यम से सत्याग्रह करने की सूचना सरकार को दी थी। इससे संबंधित खबर को केवल ‘आज’ और ‘खबर मन्त्र’ ने सचित्र छापा था। हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर के स्थानीय रिपोर्टर ने खबर नहीं प्रकाशित करने की योजना बना ली। मसला अखबारों के आला प्रबंधन पर डाल दिया गया, जबकि क्षेत्र के सामान्य जन को भी इनके और स्थानीय निजी विद्यालय श्री अग्रसेन स्कूल से काफी मधुर संबंध का पूर्णतः ज्ञान है। 

प्रमोद कुमार सिंह बताते हैं कि जब उन्होंने इस संबंध में हिन्दुस्तान के समूह संपादक शशि शेखर को इस घटनाक्रम से अवगत कराया, उसके बाद तो मानो भूचाल आ गया। हिन्दुस्तान के रिपोर्टर दुर्गेशनंदन तिवारी ने उन्हें गालियां देने के साथ ही धमकाया। अचानक प्रमोद कुमार सिंह को समाजसेवी से अपराधी बना दिया गया। जब उन्होंने इस बारे में भी पुनः शशि शेखर को बताया तो दुर्गेश ने अन्य अखबारों के रिपोर्टरों के साथ मिलकर पत्रकार संघ बना लिया।, जिसका उद्देश्य केवल प्रमोदकुमार सिंह के सामाजिक कार्यों को मीडिया के बल पर बाधित करना था। 

प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि जब रिपोर्टर खबर न छापकर भी उनकी जड़ खोदने में नाकाम रहे तो अभद्रता पर उतर आए। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि निजी विद्यालयों की लड़ाई में पत्रकार क्यों विरोध करने लगे हैं? यदि उनको राजनीति करनी हो या कूटनीति तो पत्रकारिता छोड़ जनता के बीच आएं, न कि किसी के सामाजिक कार्यों को बाधित करें। क्या सम्मानित प्रेस भी मेरे जनहित के कार्य में बाधा पंहुचाना चाहता है या सहायता करना चाहता है? हाल ही में आम लोगों के साथ पुलिस की मनमानी की खबर इसी तरह छिपा ली गई। उनका पूछना है कि क्या भारतीय अभिभावक संघ के सामाजिक कार्यों में अब मीडिया बाधा पहुंचाएगा?

यदि आपको लगता है कि मै और मेरे संघ का कार्य सामाजिक हैँ तो पत्रकारिता धर्म का पालन करते हुये के कार्यों को जन जन तक पंहुचाने का पुनीत कार्य करें और जन जन के सम्मान की रक्षा करें एवम् स्थानीय पत्रकारों को पत्रकार रहते हुये राजनीति न करने का आदेश प्रदान करें ।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
1 Comment

1 Comment

  1. Pramod Kumar Singh

    April 22, 2015 at 8:29 am

    भड़ास के माध्यम से भ्रष्ट पत्रकार एवम् भ्रष्ट पत्रकारिता पर बहस अत्यावश्यक है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन