मोदी राज में (कु)चर्चित हुईं मादी शर्मा और उनकी करतूत जानिए

Dilip Khan : कश्मीर में सैर-सपाटा करने वाले यूरोपियन पार्लियामेंट के 23 सांसदों का ख़र्चा वहन करने वाली संस्था और मादी शर्मा के बारे में जानिए.

मादी शर्मा
  1. इन 23 सांसदों के लिए कश्मीर आधिकारिक तौर पर सैर-सपाटा ही है. वे यूरोपियन पार्लियामेंट के सांसद की हैसियत से कश्मीर नहीं गए. वे उसी तरह गए, जैसे कोई सैलानी जाता है. यूरोपियन यूनियन ने बयान जारी कर रहा कि ये उसका आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नहीं है. ये अब लगभग सब जानते हैं कि ये सभी सांसद धुर-दक्षिणपंथी पार्टियों से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन मामला इससे बड़ा है.
  2. यूरोपियन पार्लियामेंट के सांसद क्रिस डेविस को भी कश्मीर में होना था, लेकिन उन्होंने एक शर्त रख दी कि वे सुरक्षा के ताम-झाम के बग़ैर लोगों से खुलकर बातचीत करना चाहते हैं. डेविस का पत्ता काट दिया गया, लेकिन डेविस ने बदले में इस प्रायोजित दौरे को बेनकाब कर दिया. उन्होंने मादी शर्मा की तरफ़ से आया मेल सार्वजनिक कर दिया. NDTV वाले श्रीनिवासन जैन ने उस चिट्ठी को ट्वीट कर दिया.
  3. मोदी सरकार की आधिकारिक लाइन पर बयान जारी कर रहे इन सभी सांसदों का ख़र्च कौन उठा रहा है? क्या ये लोग अपने पैसों से कश्मीर घूमने आ गए? क्या वाक़ई ये लोग इतने घुमक्कड़ हैं? इनका ख़र्च उठा रहा है इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ नॉन-एलाइंड स्टडीज़ (IINS) नामक संस्था.
  4. मादी शर्मा का इस संस्था से सीधे तौर पर कोई लेना-देना अब तक साबित नहीं हुआ है. मादी शर्मा का कनेक्शन अलग है. IINS दिल्ली के सफदरजंग इनक्लेव के पते पर पंजीकृत है. श्रीवास्तव समूह इस IINS का मालिक है. प्रमिला श्रीवास्तव इस समूह की मालकिन हैं. शिक्षा और मीडिया इनका मुख्य धंधा है. लेकिन, ऊर्जा, एयर स्पेस, स्वास्थ्य, प्रकाशन और नैचुरल रिसोर्स में भी कंपनी ने पैर पसार रखे हैं. नीरा राडिया की तरह फिक्सिंग का काम इन्हें बहुत पसंद है. ये सब कंसल्टेंसी के नाम पर होता है. मामला भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इनका ज़्यादातर खेल यूरोप से चलता है.
  5. प्रमिला श्रीवास्तव एक साप्ताहिक भी निकालती हैं. न्यू डेल्ही टाइम्स. इसी न्यू डेल्ही टाइम्स में मादी शर्मा यदा-कदा लिखती हैं. कश्मीर पर केंद्र सरकार के फ़ैसले के बाद भी उन्होंने इसमें एक लेख लिखा. श्रीवास्तव समूह की एक मासिक पत्रिका यूरोप में छपती हैं. EP Today यानी यूरोपियन पार्लियामेंट टुडे नाम से. इस पत्रिका पर आरोप लगे हैं कि रूसी मीडिया समूह RT की ख़बरें हू-ब-हू वहां छाप दिया जाता है. एंटी-पाकिस्तानी नैरेटिव के साथ ये पत्रिका यूरोपियन यूनियन के सांसदों को ‘मीडिया कंटेंट’ मुहैया कराता है.
  6. यूरोपियन पार्लियामेंट के सांसदों को टारगेट करने में श्रीवास्तव ग्रुप को मादी शर्मा सबसे ज़्यादा मदद पहुंचाती हैं. मादी शर्मा का ट्विटर खाता देखेंगे तो कवर इमेज पर बड़ा-सा ‘ऊं’ लिखा है. वो ख़ुद को ‘इंटरनेशनल बिजनेस ब्रोकर’ (बिजनेस की अंतरराष्ट्रीय दलाल) कहती हैं. बिजनेस दलाल का पॉलिटिक्स से क्या लेना-देना जैसे सवाल अगर मन में उठे तो तत्काल नीरा राडिया को याद कर लीजिए. तब समझ में आएगा कि बिजनेस ही सच है, बाक़ी सब उसके अनुकूल परिस्थितयां पैदा करने की कवायद हैं.
  7. पिछले साल जब मालदीव में राजनीतिक संकट पैदा हुआ था तो यूरोपियन संसद के तीन सांसदों को मादी शर्मा ठीक इसी तरह वहां लेकर गई थी. ये तीन सांसद थे: टॉमस ज़ेकोवस्की, मारिया गैब्रिला ज़ोआना और रिज़ार्ड ज़ारनेकी. ये तीनों कश्मीर दौरे पर आई टीम में भी शामिल हैं.
  8. 2015 में ब्रसल्स में ज़ारनेकी, मादी शर्मा और प्रमिला श्रीवास्तव की मीटिंग हुई. इसमें ‘भारत में शिक्षा व्यवस्था सुधारने’ पर चर्चा की गई. भारत में शिक्षा व्यवस्था को पिछले दो-तीन दशकों से ऐसे ही लोग सुधार रहे हैं. अटल बिहारी वाजपेयी ने उच्च शिक्षा को सुधारने के लिए मशहूर शिक्षाविद मुकेश अंबानी और कुमार मंगलम बिड़ला की कमेटी बनाई थी. दोनों ने जो सरकार को रिपोर्ट सौंपी, उसका एक हिस्सा आप इंटरनेट पर सर्च करके पढ़ सकते हैं। पूरी रिपोर्ट मौजूद नहीं है.
  9. मादी शर्मा यूरोपियन सांसद की European Economic and Social Committee (EESC) में भी शामिल हो गई हैं. जब यूरोप के इन 23 सांसदों के जत्थे को इकट्ठा कर मादी शर्मा मोदी से मिलने पहुंचीं तो सबसे पहले मादी-मोदी के बीच प्राइवेट मीटिंग हुई. इसमें EESC के पूर्व अध्यक्ष हेनरी मलोसे भी मौजूद थे. मलोसे का अब EESC से कोई लेना-देना नहीं है. वो वोकल यूरोप नामक संस्था चलाते हैं. इन्हीं मलोसे को साथ लेकर मादी जी मोदी जी से मिलीं. PIB ने तस्वीर के नीचे कैप्शन दे दिया कि यूरोपियन यूनियन के सांसद मोदी जी से मिल रहे हैं!

ये सभी जानकारी स्क्रोल, टेलीग्राफ़ और अन्य विदेशी वेबसाइटों पर इस विषय में छपी रिपोर्ट्स और लेख से ली गई है. हिंदी में चीज़ें नहीं छपतीं तो ढूंढ़कर पढ़ा कीजिए.

युवा पत्रकार दिलीप खान की एफबी वॉल से.

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