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सड़क दुर्घटना के महीनों बाद भी बेड पर पड़ी पत्रकार की इस बिटिया को ये कौन हंसा गया!

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सत्येंद्र पी सिंह-

आज आदरणीय सुरेंद्र सिंह चौधरी महक से मिलने आए। उनकी बातें महक को बहुत मज़ेदार लगीं और उनके जाने के बाद भी उनकी बात मुझे सुना सुनाकर हंस रही है।

महक से उन्होंने कहा कि इतने नामचीन आदमी की बेटी होकर तुम बिस्तर पर कैसे पड़ी रह सकती हो। तुमको ठीक होना पड़ेगा। हम लोग तुमको ठीक करेंगे।

हमारे गांव के पास फेमस तालाब है। वहां की मछली और कालानमक चावल का भात खाने से मनुष्य सीधे स्वर्ग जाता है, ऐसी मान्यता है और उस मछली में इतनी पॉवर है। तुमको वहां ले चलेंगे। मछली और भात खिलाएंगे और तुम ठीक हो जाओगी।

अभी परसों एक आदमी को 7-8 झापड़ मार दिया। फिर बहुत अफसोस हुआ कि 70 साल से ऊपर उम्र हुई, ऐसा मुझे नहीं करना चाहिए। यह सब सामंती मानसिकता है। शाम को वह आदमी आया। मैंने आसपास देखा कि कोई पट्टीदार देख तो नहीं रहा है तो मैंने उसके सामने हाथ जोड़कर कहा कि गलती हो गई, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। वह भावुक हो गया और रोने लगा कि आप मेरे बुजुर्ग हैं, हाथ जोड़ेंगे तो मेरे ऊपर पाप पड़ेगा।

एक बार आंदोलन कर रहा था। 7 थानों की पुलिस जुटी थी। थाने वाले तो कुछ नहीं बोल रहे थे, लेकिन पीएसी वालों ने मुझे 4 घण्टे तक पीटा और मैं उनको गरियाता रहा। जब एसएसपी को सूचना मिली तो वह डॉक्टर लेकर आए। उन्होंने क्षमा मांगी कि ऐसा नहीं होना चाहिए था आपके साथ। मुझे कुछ नहीं हुआ। अगर मैं मर जाता तब जरूर गड़बड़ हो जाती और उसके बाद आगजनी, थाने फूँके जाने से रोकने के लिए मैं नहीं रहता। बड़ी घटना बच गई मेरे जिंदा रहने से!

तुमको पैसे रुपये की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मैं किसान हूँ। हर साल 15 लाख रुपये का केवल काला नमक धान बेचता हूँ। तुम हम सबकी बेटी हो।

महक पूरे एक्शन के साथ यह कहानियां सुना रही हैं और कह रही हैं कि आपके फ्रेंड्स बहुत मजेदार हैं। कुछ सीखिए इनसे। वो 70 साल के है और अभी भी आपसे यंग हैं! और आपका बात बात पर चेहरा उतर जाता है।

मैं खुद ही भावुक हूँ। कैसे कैसे मेरे मित्र हैं और कहां कहां से भागे चले आते हैं। आश्वस्त करके जाते है कि हर तरह से मैं आपके साथ हूँ।

सत्येंद्र पी सिंह बिज़नेस स्टैण्डर्ड अख़बार दिल्ली में कार्यरत हैं. इनकी बेटी महक रोड एक्सीडेंट में बुरी तरह घायल हो गईं थी. अब भी वे पूरी तरह से खड़े होकर चल पाने में असमर्थ हैं.

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