दैनिक जागरण मेरठ से मनोज झा का तबादला, मुकेश सिंह नए संपादकीय प्रभारी

दैनिक जागरण मेरठ से बड़ी खबर आ रही है। जागरण मेरठ के संपादकीय प्रभारी मनोज झा को प्रबंधन ने हटा दिया है। उनका तबादला नोयडा यूनिट किया गया है। मनोज झा को फ़िलहाल प्रतीक्षा सूची में रखते हुए अलीगढ़ के संपादकीय प्रभारी मुकेश सिंह को मेरठ यूनिट का दायित्व सौंपा गया है।

दैनिक जागरण मेरठ यूनिट की पिछले दिनों हुई छीछालेदर और विवादों में घिरने के चलते प्रबंधन ने मनोज झा का पत्ता साफ किया है। मुकेश सिंह की जगह अलीगढ यूनिट में कार्यरत सिटी चीफ नवीन पटेल को प्रमोट करते हुए अलीगढ यूनिट का नया संपादकीय प्रभारी बनाया गया है। चर्चा है कि मनोज झा को नोएडा में सेंट्रल डेस्क पर काम करने के लिए भेजा गया है।



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Comments on “दैनिक जागरण मेरठ से मनोज झा का तबादला, मुकेश सिंह नए संपादकीय प्रभारी

  • जिन चेलों ने मनोज झा का बाज़ा बजवा दिया वही चेले आईनेक्स्ट के ज़माने से मुकेश सिंह के भी परमपट हैं।कुल मिलाकर कहें तो सिर्फ बोतल बदली है शराब नहीं।

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  • यशवंत जी प्रणाम
    तबादला नहीं हुआ, दैनिक जागरण मेरठ को मुक्ति मिली है। 95% लोग मनोज झा के जाने की ख़ुशी मन रहे हैं। जो मायूस हैं ये वो पांच फीसदी में ढाई प्रतिशत वो लोग हैं जिनकी मनोज झा के सहारे दलाली चल रही थी, जबकि शेष मनोज झा की वसूली की खुरचन से मूंछों पर ताव देते थे। ये कोई पूर्वाग्रह नहीं है, हक़ीक़त है। मनोज झा ने जो गंदगी मचाई वह पत्रकारिता का काला इतिहास है। मनोज झा भ्रष्ट तो था ही, उतना ही अमानवीय भी। जागरण मेरठ के साथियों को सौरभ शर्मा की “हत्या” याद होगी, जिसकी साजिश के मूल में मनोज झा और उसके गुर्गों थे। लंबी बिमारी से उभर रहे व जागरण को सर्वस्व समर्पित कर चुके राजकुमार शर्मा को भी डिप्रेसन में भेजने की या यूँ कहें कि सौरभ शर्मा की तरह दूसरा “शिकार” करने की पूरी प्लानिंग झा और उसके गुर्गों ने गोपनीय मेल भेजकर कर ली थी, लेकिन मेल लीक हो गयी सो मामला उल्टा पड़ गया। मनोज झा ने ऐसी ही मेल सालभर पहले भेजकर कई जिम्मेदार कर्मचारियों का दामन दागदार करने की कोशिश की थी। पत्रकारिता को पूरब-पश्चिम में बाँटती मेल वह भी लीक हुई थी, लेकिन मामला दब गया था। यह अमानवीयता मनोज झा की पिशाची प्रवृति का एक पहलू है, भ्रष्टाचार पर तो पूरा ग्रन्थ तैयार हो जाये। उदहारण के लिए बुलंदशहर का मुशायरा, आईटीआई प्रकरण, खुर्जा सट्टेबाज़ी प्रकरण, बिजनौर से खनन, लकड़ी की अवैध तस्करी से वसूली, शामली में तोड़फोड़ प्रकरण में मंत्री रियासत राणा से 50 हज़ार की वसूली। सहारनपुर से संजीव जैन की माल एन्ड मनी सप्लाइ का मनोज झा अकेला वारिस नहीं, हाँ बड़ा हिस्सेदार जरूर रहा। मैनेजिंग मास्टर संजीव जैन ने ब्रांड के अरुण तिवारी, इनपुट के अनुराग शुक्ला, आउटपुट के सुशील मिश्रा को भी खूब छकाया। बहरहाल, देर से ही सही, सटीक निर्णय ने एक बार फिर यह साबित किया कि ऊपर वाले के यहाँ देर है, अंधेर नहीं।
    जय हिन्द।

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  • प्रखर says:

    सही कहा मदन सर। एक ही उल्लू काफ़ी है बर्बाद-ए-गुलिस्ताँ करने को…लेकिन जागरण की साख पर तो कई उल्लू बैठे हैं। कुछ ब्युरो प्रभारियों की शक्ल में हैं तो कुछ न्यूज़रूम में। इनमें से अहम हैं तथाकथित सेकूलर शुक्ल यानी अनुराग शुक्ल और तथाकथित चिंतनशील पत्रकार यानी सुशील मिश्रा। सोनी लम्बे समय से मनोज झा की साख पर बैठे थे, अंजाम सबके सामने है। जागरण के साख पर बैठे हैं और आगंतुक मुकेश सिंह की साख पर बैठने की तैयारी में हैं तो नतीजा चिपरिचित और दिलचस्प होगा। यह सही है कि अनुराग शुक्ला आइनेक्स्ट के ज़माने से मुकेश सिंह का परमपट है, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि मुकेश सिंह मनोज झा वाली ग़लती दोहरायेंगे। यह बात अलग है कि अनुराग शुक्ला ने मनोज झा के गुर्गों से मुकेश सिंह के नाम पर साई-बधाई और गारंटी लेनी शुरू कर दी।

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  • News Hunter says:

    जैसी करनी, वैसी भरनी। मनोज झा के पाप का घड़ा बहुत पहले भर चुका था। बुलंदशहर डीएम बी. चंद्रकला के खिलाफ अभियान चलवाकर इसने वहां के ब्यूरो में व्याप्त भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का काम किया। कई ब्यूरो से निरंतर वसूली की खबरें प्रबंधन को मिल रही थी। अखबार में कंटेंट के ब जाए सैटिंग गैटिंग के समाचारों को वरीयता दी जा रही थी।

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  • संजीव जैन says:

    मनोज झा तो गए, लेकिन दिनेश दिनकर के दिन कब आएंगे? क्या इनकी सत्ता चलती रहेगी? अब तो सरकारें भी पांच साल से पहले बदल जाती हैं, लेकिन दिनकर की सत्ता चालू आहे। जब तक लाला जी के बैडरूम का प्रभार इनके जिम्मे रहेगा, तब तक इनकी सत्ता कहीं नहीं जाने वाली। दैनिक जागरण के सात सरोकारों की आड़ में इनका निजी सरोकार खूब फल फूल रहा है।

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