मोदी ड्रोन कथा : फेंकना ग़ैर-क़ानूनी नहीं है, लेकिन अगर आप प्रधानमंत्री हैं तो फेंकने पर भी सवाल खड़े होंगे ही!

अजीत शाही-

कल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भाषण में कहा, “जब कहीं मुझे सरकारी कामों की क्वालिटी को देखना होता है तो मैं अचानक ड्रोन भेज देता हूँ और किसी को पता भी नहीं चलता है कि मैंने सारी जानकारी ले ली है.”

ज़ाहिर सी बात है कि ये ड्रोन प्रधानमंत्री निवास के नीचे किसी तहख़ाने में तो होंगे नहीं जहाँ से रात के अंधेरे में मोदीजी रिमोट निकाल कर इन्हें ख़ामोशी से इधर-उधर उड़ा देते हैं कि जाओ, दया, पता करो, और रात भर ख़ुफ़िया काम करके ये ड्रोन पौ फटने से पहले वापस तहख़ाने में ख़ुद-ब-ख़ुद पहुँच जाते हैं. भारत सरकार के हर काम की तरह इन ड्रोनों का भी कोई तो सरकारी विभाग होगा. कौन सा सरकारी विभाग इन ड्रोनों का इंचार्ज है? किस मंत्रालय के अंतर्गत आता है वो विभाग? उस विभाग को सरकारी बाबू ही चलाते होंगे, भले ही वो लैटरल एंट्री से आए हुए संघी हों. कौन हैं ये सरकारी बाबू? मोदीजी के क्लासमेट की तरह इनका भी कोई नामोनिशान नहीं है क्या? सरकार की किस वेबसाइट पर इस विभाग के ख़ासतौर से इस काम की जानकारी है कि वो प्रधानमंत्री के कहने पर इधर-उधर उड़ते हैं?

अगला सवाल ये है कि कहाँ रखे हैं ये ड्रोन? देश में एक ही जगह हैं या कई अलग अलग जगह हैं? ड्रोन भले ही बग़ैर पायलट उड़ते हों, किसी न किसी इंजीनियर को तो ज़मीन पर रहते हुए उन्हें उड़ाना ही पड़ता है. पूरा तकनीकी महकमा चाहिए इस काम के लिए. ज़ाहिर है ये तकनीकी महकमा हुमायूँ के मक़बरे के बाहर लगी बेंच पर बैठ कर अपना काम तो करता नहीं होगा. कहाँ है वो बिल्डिंग जहाँ से मोदी के आदेश पर ड्रोन उड़ाए जाते हैं? कहाँ हैं वो इंजीनियर जो इन ड्रोनों को मोदी के कहने पर उड़ाते हैं? क्या मोदी उन इंजीनियरों को डाइरेक्टली फ़ोन करते हैं कि फ़लाने ड्रोन को दरभंगा भेज दो, ढिकाने को अरुणाचल? कैसे ऑर्डर देते हैं मोदी उनको? क्या पीएमओ में कोई सचिव है जो इस प्रोजेक्ट का इंचार्ज है जिसके ज़रिए ये काम किया जाता है?

मोदी लोकेशन कैसे तय करते हैं कि किसी ड्रोन को कब किधर भेजना है? क्या सुबह उठ कर भारत के नक़्शे पर उँगली रख कर बोलते हैं, “पेल दो इधर एक ड्रोन आज,” या फिर कोई व्यवस्था है जिसके चलते सरकारी मुलाज़िम मोदी के लिए रोज़ लिस्ट तैयार करते हैं जिसमें से मोदी छाँट कर तय करते कि, हाँ, यहाँ ड्रोन भेजना मस्त रहेगा?

मान भी लें कि ये ड्रोन “रिपोर्ट” लेकर आ गए. मोदी तक कैसे पहुँचती है ये रिपोर्ट? क्या प्रोटोकॉल है? क्या ड्रोन को उड़ाने वाले इंजीनियर सीधे मोदी के पास रिपोर्ट भेजते हैं या कोई सरकारी सिस्टम हैं इन्हें मोदी तक भेजने का? सरकार के किस सिस्टम में ये रिपोर्टें रखी होंगी? एक बार रिपोर्ट मिलती है तो उस पर क्या एक्शन लिया जाता है? कोई सिस्टम है जिससे पता चले कि एक्शन ले लिया गया है? क्या मोदी जनता के सामने ऐसे लिए हुए सभी एक्शन की जानकारी रखेंगे? क्या किसी की नौकरी गई है अब तक इन ड्रोनों से हुए पर्दाफ़ाश की वजह से?

लेकिन सबसे बड़ा सवाल है सरकारी काम की क्वालिटी की निगरानी का. ये कौन से सरकारी काम हैं जिनकी ख़ुफियागिरी ड्रोन से हुई है? क्या फ़ूड कॉर्परेशन ऑफ़ इंडिया के गोदामों के अंदर घुस कर ड्रोन ये बता पाता है कि गेहूँ या चावल की क्वालिटी क्या है? ऐसा कौन सा ड्रोन है जो पुल देख कर बता देता है कि इसके अंदर घटिया सीमेंट लगा है? सरकारी बैंकों के काम पर कैसे ड्रोन से नज़र डाली जा सकती है? अब तक कितने सरकारी कामों की ड्रोन से जाँच कराई है मोदी ने? कोई लिस्ट है कहीं सरकार में? वो लिस्ट जनता के सामने क्यों नहीं है?

फेंकना ग़ैर-क़ानूनी नहीं है. लेकिन अगर आप प्रधानमंत्री हैं तो फेंकने पर भी सवाल खड़े होंगे ही. और हर सवाल पूछने वाले को हरेन पांड्या की तरह मरवाया नहीं जा सकता है.



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One comment on “मोदी ड्रोन कथा : फेंकना ग़ैर-क़ानूनी नहीं है, लेकिन अगर आप प्रधानमंत्री हैं तो फेंकने पर भी सवाल खड़े होंगे ही!”

  • महेन्द्र 'मनुज' says:

    हरेन पांड्या की हत्या सवाल पूछने पर नहीं , मोदी के लिये विधानसभा की अपनी सीट नहीं छोड़ने के कारण हुयी।हरेन पांङ्या के पिता ने नरेन्द्र मोदी पर उंगली उठाई थी।
    अभी खुदाई से वह प्रकरण निकालना बाकी है, जो सुप्रीम कोर्ट पहुँच कर लुप्त हो गया।

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