भारतीय मीडिया ने नेपाल में उतारी रिपोर्टरों की फौज, वे भी वहां के गंभीर हालात से हो रहे दो-चार

भारतीय न्यूज चैनलों और अखबारों ने बड़ी संख्या में अपने रिपोर्टरों की फौज नेपाल के मोरचे पर तैनात कर दी है। उन्हें प्रतिकूल हालात में प्राकृतिक आपदा से जूझते हुए सूचनाएं लगातार अपडेट करनी पड़ रही हैं। बीती आधी रात बाद तक भारतीय पत्रकार नेपाल की पल पल की स्थितियों पर नजर रखे रहे। वायु सेवाएं असामान्य होने, होटल-बाजार बंद होने, संचार और बिजली सेवाएं ध्वस्त होने का खामियाजा नेपाल में खबरें बटोर रहे पत्रकारों को भी उठाना पड़ रहा है. इस प्राकृतिक आपात काल को इस नजरिए से भी सोशल मीडिया देख रहा है कि भारतीय किसानों पर प्रकृति की मार, गजेंद्र सिंह आत्महत्याकांड और आम आदमी पार्टी की करतूतों, भूमि अधिग्रहण अध्यादेश जैसे ज्वलंत मसलों पर मीडिया गतिविधियां आश्चर्यजनक ढंग से अचानक तटस्थ हो गई हैं।  

बिहार में अफवाहों का बाजार गर्म है. सोशल मीडिया इसे हवा दे रहा है। नासा ने भूकंप की कोई भविष्यवाणी नहीं की है। भारत सरकार को भी आगाह करना पड़ा है कि सोशल मीडिया के जरिए फैलाई जा रही अफवाहों को नजरअंदाज करें. फेसबुक, ट्विटर समेते ऑनलाइन मीडिया के विविध स्रोतों पर व्यस्त ऐसे लोगों की भी तादाद अच्छी खासी है जो अफवाहों पर लगातार लोगों को आगाह कर रहे हैं. खुराफातियों की हरकतों से सावधान रहने की अपीलों के साथ विज्ञानसम्मत समझ के साथ हालात पर नजर रखने की हिदायत दे रहे हैं. इसके अलावा भूकंप जैसी आपदा के लिए खनन माफिया, रीयल स्टेट, जंगल-जल-जमीन के धंधेबाजों पर भी तीखी और जायज टिप्पणियां करते उन्हें ही ऐसे हालात के लिए कुसूरवार ठहरा रहे हैं.  

सोशल मीडिया के जरिय़े खबर फैलाई जा रही है कि चांद उल्टा और अजीब तरह का दिख रहा है . बिहार में इस अफवाह की वजह से लोग दहशत में रहे. पता नहीं कैसे कैसे मैसेज बताए जा रहे हैं कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के हवाले से भेजे जा  रहे हैं जबकि नासा, इसरो या विज्ञान के पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जो भूकंप या किसी प्राकृतिक आपदा का समय बता सके.

उधर, नेपाल में सोमवार सुबह भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। काठमांडू में सुबह 6:25 मिनट पर भूकंप के झटके से अफरातफरी मच गई. नेपाल के राष्ट्रपति राम बरन यादव समेत लाखों लोग लगातार दो दिन से खुले आसमान के नीचे शरण लिए हुए हैं. नेपाल में भूकंप से अब तक 66 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. बीती रात हुई बारिश के कारण ऑपरेशन को थोड़ी देर के लिए रोकना पड़ा.

नरेश बोहरा अपने एफबी वॉल पर बताते हैं कि कल सुबह से ही whatsapp तथा फेसबुक के साथ SMS द्वारा लोग 10 से लेकर 15 की रिक्टर स्केल पर तीव्रता के भूकंप आने की चेतावानी तनमन से सभी को भेजने में लगे हुए हैं. किसी में नासा द्वारा जारी तो किसी में मौसम विभाग द्वारा जारी बताया जा रहा है. एक मेसेज तो डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर शिमला द्वारा जारी बताया गया. सबसे पहले सामान्य जानकारी कि आज तक दुनिया में ऐसी कोई तकनीक ईज़ाद ही नहीं हुई जिससे भूकंप के आने के दिन समय और तीव्रता की भविष्यवाणी की जा सके. दूसरी बात भूकंप की जानकारी इंडियन मेटरोलॉजिकल विभाग दे सकता है मौसम विभाग सिर्फ मौसम की जानकारी तथा नासा अंतरिक्ष की या पृथ्वी के ऊपरी सतह की जानकारी देता है. सबसे महत्वपूर्ण बात आज तक 9.5 से अधिक की तीव्रता का भूकंप कभी नहीं आया है. पढ़े लिखे लोग भी ऐसी चेतावनियों को फॉरवर्ड करते दिखे. आप ऐसा कोई सन्देश आता है तो सिर्फ 2 या 3 मिनट लगेंगे गूगल या याहू पर सर्च कर देख सकते हैं या न्यूज चैनल पर मालूम कर लें कि ऐसी कोई चेतावनी जारी हुई है या नहीं. इन्हीं अफवाहों के चलते कल रात हज़ारों लोगों ने खुले आसमान में सड़कों और बगीचों में रात गुज़ारी. सबसे हास्यास्पद रहा कि पृथ्वी पर भूकंप आया और आसमान में चाँद उल्टा हो गया. अपने खुद के दिमाग का इस्तेमाल करें किसी और की चुहलबाजी का शिकार न होईये.

पत्रकार श्रीकांत सिंह अपने एफबी वॉल पर लिखते हैं- क्‍यों कांप रही है धरती…प्रकृति से छेड़छाड़, भूमि अधिग्रहण विधेयक, किसानों की आत्‍महत्‍या, सबकुछ हड़प लेने की चतुराई—बंद करो यह सब. प्रकृति को चतुराई, चालाकी और धूर्तता सहन नहीं. मुकेश यादव लिखते हैं- भूकंप एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन भूकंप में मौतें मानव जनित त्रासदी. दिल्ली में ‘खड़ी ईंटों’ पर खड़ी इमारतें इस बात की गवाही देती हैं.

इस बीच भूकंप की तत्काल सूचना पाने के लिए एक आईटी इंजीनियर ने मामूली सी तरकीब बताई है, जो सबके काम की हो सकती है- एक उल्टी गिलास फर्श पर रख दें, उसके ऊपर सीधी गिलास रख दें और उसके ऊपर स्टील की छोटी सी प्लेट रख दें. मामूली सा भी कंपन होने पर दोनो गिलास और प्लेट झनझनाकर लुटक जाएंगी…और आप नींद में होंगे, तब भी चौकन्ने हो जाएंगे.

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