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उत्तर प्रदेश

नोएडा पुलिस के एक विवेचक की कारस्तानी, पीड़ित के बयान लिए बगैर ही लगा दी क्लोजर रिपोर्ट!

29 जनवरी 2021 को डाक्टर अर्चना के 70 वर्षीय पिताजी को उसके ससुराल वालों ने कुछ बदमाशों के साथ मिलकर मारपीट कर उनके कपड़े, पैसे तथा चश्मा तक छीन लिया और कड़क सर्दी में मरने के लिए छोड़ दिया। जब डाक्टर अर्चना को पता चला तो उस वक्त वो चाह कर भी कुछ ना कर सकी। ग्रेटर नोएडा की पुलिस थाना बीटा 2 में अपने पिता की एफआईआर लिखवाने के लिए गई किंतु थाने में सुनवाई ना हुई।

डाक्टर अर्चना ने हार नहीं मानी और अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। दिनांक 11.08.2023 को ढाई बरस बीत जाने के बाद माननीय न्यायालय द्वारा एफआईआर दर्ज करने के आदेश हुए।

दिनांक 7.09.2023 को अंतर्गत धारा 147,148,323,395 IPC थाना बीटा 2 में माननीय न्यायालय के आदेश के सामने मजबूर होकर एफआईआर दर्ज की गई। इस बीच थाना बीटा 2 की पुलिस अभियुक्तों के साथ मिली भगत कर पूरे मामले को ठंढे बस्ते डालने में जुट गई।

डाक्टर अर्चना द्वारा बार-बार विवेचक को फोन कर अपने पिता का बयान लेने के लिए अनुरोध किया गया लेकिन विवेचक ने ऐसा नहीं किया. पिता एफआईआर दर्ज होने के उपरांत से ही अपने स्थाई निवास काशीपुर उत्तराखंड में रहने चले गए. इस दौरान विवेचक ने न उनसे संपर्क किया और न ही उनका बयान लेने के लिए कोई प्रयास किया।

कई महीने बीत जाने के उपरांत जब एफआईआर से संबंधित कोई जानकारी डाक्टर अर्चना को नहीं मिली तो उन्होंने आईजीआरएस के माध्यम से थाना बीटा 2 से रिपोर्ट मांगी. तब जाकर उन्हें पता चला कि बिना उनके पिता के बयान दर्ज किये तथा दो वर्ष से फरार व कोर्ट द्वारा वांछित अभियुक्त से मिलीभगत करते हुए एफआईआर में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी गई है.

डाक्टर अर्चना बताती हैं कि जो अभियुक्त रवि कुमार राणा दो वर्षों से इसी बीटा 2 थाने की पुलिस को नहीं मिल रहा है और लगातार यह पुलिस मान्य न्यायालय के समक्ष रिपोर्ट लगा रही है कि उसे अभियुक्त का कुछ आता पता नहीं है तब वह अचानक किस प्रकार इन विवेचन महोदय को मिल गया और उसके बयान इन्होंने दर्ज कर लिए?

अर्चना द्वारा पूछे जाने पर विवेचक ने कहा कि अभियुक्तों के विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं मिला.

सच्चाई यह है कि विवेचक ने अर्चना के पिता के बयान ही नहीं लिए. उन्हें साक्ष्य देने का अवसर ही नहीं दिया. सभी साक्ष्य न्यायालय में प्रेषित किए गए प्रार्थना पत्र के साथ पहले से ही संलग्न है.

विवेचक को फोन कर डाक्टर अर्चना ने पूछा कि आपने तो मेरे पिता के बयान ही नहीं लिए तब आपने किस प्रकार उक्त मुकदमे में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी है क्योंकि इस पीरियड में जब से मुकदमा दर्ज हुआ है मेरे पिता तो उत्तराखंड में हैं, तब आपने किस प्रकार उनके बयान ले लिए… इस पर उस विवेचक के पास इसका कोई उत्तर नहीं था।

डाक्टर अर्चना का सवाल माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी तथा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह जी से है कि क्या पुलिस को ट्रेनिंग पीड़ितों को धोखा देने और आरोपियों से लाभ लेने की दी गई है?

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