भारतीय मूल के पालानी को खोजी रिपोर्टिग पर मिला पुलित्जर पुरस्कार

खोजी रिपोर्टिग के लिए अंतर्राष्ट्रीय समाचारपत्र ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के पुलित्जर पुरस्कार से इस बार भारतीय मूल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर पालानी कुमानन को ग्राफिक्स टीम के साथ सम्मानित किया गया है। 

 ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के खोजी संपादक माइकल सिकोनोल्फी के अनुसार पलानी कुमानन इस समाचारपत्र को प्रकाशित करने वाली संस्था डॉ जोन्स में एक सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट एवं तकनीकी प्रमुख हैं. पलानी विजयी प्रोजेक्ट की ग्राफिक्स टीम का हिस्सा हैं.

इस समाचारपत्र ने तहकीकात संबंधी अपने व्यापक प्रोजेक्ट ‘मेडीकेयर अनमास्क्ड’ के लिए पत्रकारिता का शीर्ष पुरस्कार जीता. इसकी घोषणा सोमवार को हुई. प्रोजेक्ट में एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अमेरिका की सरकार से जुटाया गया डाटा शामिल किया गया था.

समाचारपत्र के लेखों ने चिकित्सा जगत में व्याप्त धोखाधड़ी एवं करीब 4.3 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों एवं गंभीर विकलांगता वाले करीब 90 लाख लोगों को कवर करने वाले सरकारी स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम के अपव्यय को बेनकाब किया. इन खुलासों ने कांग्रेस को जांच और आपराधिक मुकदमे चलाने की राह दिखाई.

पलानी तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से स्नातक हैं. उन्होंने चिकित्सकों एवं अस्पतालों सहित 8,80,000 से अधिक चिकित्सा सेवा प्रदाताओं को किए जाने वाले सरकारी भुगतान का विश्लेषण करने के लिए मेडीकेयर बिलिंग पर इंटरैक्टिव डाटाबेस विकसित किया.

‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की गीता आनंद वर्ष 2003 में कॉरपोरेट घपलों पर अपनी रिपोर्ट की वजह से पुलित्जर की साझा विजेता रहीं. अगले साल उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में नियंत्रित वितरण पर जो एक श्रृंखला बनाई, वह पुलित्जर की अंतिम सूची में रही.



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