Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

सहारा पर मोदी की चुप्पी देशद्रोह! भड़ास के सवालों पर भी मौन है मोदी सरकार

राहुल गांधी ने सहारा पर मोदी से अपने सवालों का सीधा जवाब मांगा. भड़ास ने तो सबसे पहले यह सवाल उठाया था कि आखिर क्यों जब सारे चिटफंडिये जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं तो सहारा और एक-दो चिटफंडियों पर रियायत क्यों? गरीबों के मसीहा बने मोदी सरकार क्यों इस मामले में दरियादिली दिखा रहे हैं. जबकि सहारा मीडिया कर्मचारी भी अपनी सैलरी के लिए सहाराश्री की पोल खोलते हुए सत्ता के तमाम दरवाजों को खटखटा चुके हैं.

राहुल गांधी ने सहारा पर मोदी से अपने सवालों का सीधा जवाब मांगा. भड़ास ने तो सबसे पहले यह सवाल उठाया था कि आखिर क्यों जब सारे चिटफंडिये जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं तो सहारा और एक-दो चिटफंडियों पर रियायत क्यों? गरीबों के मसीहा बने मोदी सरकार क्यों इस मामले में दरियादिली दिखा रहे हैं. जबकि सहारा मीडिया कर्मचारी भी अपनी सैलरी के लिए सहाराश्री की पोल खोलते हुए सत्ता के तमाम दरवाजों को खटखटा चुके हैं.

अब राहुल गांधी ने फिर पूछा कि प्रधानमंत्री साफ करें कि सहारा से उन्होंने पैसे लिए या नहीं. प्रधानमंत्री को अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए. भड़ास का स्टैंड राहुल गांधी से थोड़ा अलग है. हम प्रधानमंत्री जी से पूछना चाहते हैं कि अदालतों को दोष देने से पहले बतायें कि किन प्रशासनिक विफलताओं की वजह से…

-चिटफंडियों के मसीहा समझे जाने वाले सहाराश्री जेल से बाहर कैसे आये?

-सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जो पैसा सहारा कंपनी सेबी में जमा करा रही है वो पूंजी कहां से आ रहा है. कहीं गरीबों से फिर से वसूली जा रही रकम ही तो नहीं है.

-मल्टी लेवल मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव संस्थाओं के जरिए सहारा के ऑफिसों को क्यों पूरे देश में पैसे वसूलने की आजादी मिली है, जिसके कारण सही मायने में संचालित कोऑपरेटिव संस्थायें भी आने वाले समय में बदनाम होंगी.

-सहारा ग्रुप के ऑफिसों से ही मल्टी लेवल मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव संस्थाओं को संचालित किया जा रहा है, सूत्र बताते हैं कि इन संस्थाओं से सहाराश्री ने लिखित रुप से किसी प्रकार का संबंध नहीं रखा है.

-कृषि मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मल्टी लेवल मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव संस्थाओं के जिम्मेदार पदों पर सुब्रत राय सहाराश्री ने अपनी कठपुतलियों को बैठाया है. कार्रवाई किसके दबाव में रूकी है?

-किस कारण सहाराश्री परिवार का अब एक भी सदस्य सहारा इंडिया परिवार का किसी भी अहम पद पर नहीं है, जबकि अच्छे दिनों में बेटा-बहु से लेकर भाई-भतीजा तक सहारा कर्तव्ययोगियों की सलामी (सहारा प्रणाम) लेते रहे हैं और आज भी लेते हैं.

-सहारा जिन मल्टी लेवल मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव संस्थाओं और बीमा कंपनी के जरिए पूंजी जुटा रही है, आखिर उस पूंजी के लेन-देन की दैनिक निगरानी क्यों नहीं की जा रही है जबकि सहाराश्री की गतिविधियां संदिग्धता के दायरे में आ चुकी हैं.

क्या मोदी सरकार उस समय जागेगी, जब गरीब जनता अपने पैसों के लिए फांसी पर झूलने के लिए मजबूर होने लगेगी और फांसी के लिए रस्सी कम पड़ना शुरू हो जायेगी. दबाव बनाने और बेजा फायदे के लिए मीडिया कंपनी खोले सुब्रत राय सहाराश्री की मनमानी के चलते ही सहारा मीडिया भारी घाटे में रीढ़हीन और पंगु दिखती है. सहारा मीडिया के कर्मचारी आज भी अपने एक साल से ज्यादा की सैलरी के लिए सहाराश्री की कृपा की बाट जोह रहे हैं. लेकिन सहाराश्री की मुख्य चिंता बकाये सैलरी से ज्यादा ग्लैमरस पार्टी में होती है.

भड़ास4मीडिया केवल इतना चाहता कि मोदी सरकार स्वीकार करे कि सहाराश्री को मिल रही रियायत के लिए अदालतों से ज्यादा उनकी प्रशासनिक नाकामयाबी है. देश की अस्मिता से जुड़ा सवाल है कि क्या ये फायदे सुब्रत राय सहाराश्री को मोदी सरकार ने लोकसभा चुनावों में पूंजी उपलब्ध कराने के एवज में दी है? अगर ऐसा है तो ये देशद्रोह है. अब बारी मोदी जी की है, तो मोदी जी… बोलिए, देश सुन रहा है…

संबंधित खबरें…

xxx

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन