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पत्रकार संदीप सिंह बर्खास्तगी प्रकरण में हिंदुस्तान अखबार और सांसद वरुण गांधी को नोटिस

पत्रकार के उत्पीड़न पर प्रेस काउंसिल आफ इंडिया गंभीर… उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने उठाया था उत्पीड़न का मामला… पीलीभीत। सांसद वरुण गांधी की शिकायत पर पत्रकार संदीप सिंह को हिंदुस्तान अखबार से जबरन इस्तीफा लेकर निकाले जाने की घटना को श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की शिकायत पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने बेहद गंभीरता से लिया। प्रेस काउंसिल ने इस प्रकरण में हिंदुस्तान समाचार पत्र व सांसद वरुण गांधी को नोटिस जारी कर दिया। प्रकरण पर सुनवाई डेढ़ माह बाद होगी। उत्तर प्रदेश का शायद यह पहला मामला है, जब किसी कर्मचारी से जबरन इस्तीफा लेने पर अखबार के प्रबंधन को प्रेस काउंसिल आफ इंडिया में तलब किया जा रहा है।

हिन्दुस्तान अखबार के समूह संपादक शशि शेखर के आदेश पर पीलीभीत ब्यूरो के प्रमुख संदीप सिंह को 9 अप्रैल को बरेली ऑफिस बुलाकर इस्तीफा ले लिया गया था । संदीप पर ये बड़ी कार्रवाई भाजपा प्रत्याशी फिरोज वरुण गांधी की शिकायत पर की गई थी। वरुण की शिकायत पर हिन्दुस्तान के समूह संपादक शशि शेखर ने 8 अप्रैल की रात को ही बरेली यूनिट के संपादक व स्टेट हेड को मेल जारी कर संदीप सिंह का फौरन इस्तीफा लेकर भेजने का फरमान जारी कर दिया। 9 अप्रैल के अंक में वरुण पर बीएसएनएल की बकाया की खबर तो छपी नहीं बल्कि सुबह दस बजे फोन करके संपादक मनीष मिश्रा ने संदीप को बरेली तलब कर हाईकमान के आदेश से अवगत करा दिया। संदीप ने 9 अप्रैल को दोपहर 12 बजे बरेली ऑफिस में हाईकमान के दवाब में इस्तीफा दे दिया था।

संदीप सिंह के उत्पीड़न के मामले को उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने बड़ी ही प्रमुखता के साथ उठाया। यूनियन के प्रदेश महासचिव रमेश शंकर पांडे जानकारी मिलते ही पीलीभीत आए और उन्होंने संदीप सिंह के उत्पीड़न के मामले की लड़ाई राष्ट्रीय स्तर तक लड़ने का ऐलान कर दिया, जिसके परिणाम स्वरूप मामला भारतीय प्रेस परिषद तक जा पहुंचा। भारतीय प्रेस परिषद ने संदीप सिंह के प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेते हुए हिंदुस्तान प्रबंधन व सांसद वरुण गांधी को नोटिस जारी कर दिया है। यूनियन के प्रदेश महासचिव श्री पांडे ने बताया कि संदीप सिंह के प्रकरण को लेकर अंतरराष्ट्रीय पत्रकार महासंघ की उपाध्यक्ष व इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन की राष्ट्रीय महासचिव सबीना इंद्रजीत बेहद गंभीर हैं, उन्हीं के प्रयासों से मामला भारतीय प्रेस परिषद में पहुंच चुका है। भारतीय प्रेस परिषद ने हिंदुस्तान प्रबंधन व सांसद को नोटिस जारी कर दिया है। डेढ़ माह बाद सुनवाई होनी है। यूनियन संदीप सिंह को न्याय दिलाकर रहेगी ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी अन्य पत्रकार के साथ कहीं भी ना हो।

उत्पीड़न की कहानी संदीप सिंह की जुबानी

बकौल संदीप सिंह 8 अप्रैल को उन्हे ब्यूरो के रिपोर्टर ने बीएसएनएल के अकाउंट ऑफिसर का वह पत्र लाकर दिया, जिसमें जिला निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की गई थी कि वरुण गांधी जब वर्ष 2009-2014 में पीलीभीत के सांसद थे, तब का उनके संसदीय कार्यालय पर लगे टेलीफोन बिल का 38,000 रुपये बकाया है। विभाग से बिना नो ड्यूज लिए वरुण गांधी ने पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र से नामांकन कराया है लिहाजा उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। इस पत्र पर संदीप ने डीएम, टीडीएम व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के ओएसडी आनंद लाल चौधरी का वर्जन लेकर खबर बनाकर बरेली संपादक को भेज दी, जब शाम को वरुण चुनावी दौरे से लौटे तो ओएसडी ने उनको इस खबर की जानकारी दी, तो वरुण गांधी बौखला गए और रात में ही सीधे हिन्दुस्तान के समूह संपादक शशि शेखर से शिकायत की कि उनका पीलीभीत ब्यूरो चीफ संदीप सिंह लगातार उनको चुनाव में नुकसान पहुँचाने को खिलाफत में खबरें छाप रहा है। संदीप ने पिछले दिनों चार भाजपा विधायकों द्वारा आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में भी सबसे ज्यादा सवाल करके विधायकों को मेरे व मेरी मां मेनका के विरुद्ध भड़काने का प्रयास किया। प्रेस कांफ्रेंस की जो खबर छापी, वह भी अन्य अखबारों से भिन्न थी और मुझे नुकसान पहुंचाने वाली थी। इसके बाद नो ड्यूज की खबर तो नहीं छपी उल्टा उनको बरेली तलब करके इस्तीफा ले लिया गया।

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