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मजीठिया वेज बोर्ड पर शरद यादव के जोरदार भाषण का मीडिया ने किया बहिष्कार, राज्यसभा में मीडिया को जमकर दुत्कार

शरद यादव द्वारा कल राज्यसभा में मजीठिया वेज बोर्ड, मीडिया की आजादी और मीडिया मालिकों की धंधेबाजी पर दिए गए जोरदार भाषण को न किसी चैनल न दिखाया और न किसी अखबार ने छापा… आज राज्यसभा में मीडिया की इस हरकत की जमकर की गई निंदा 

जदयू नेता शरद यादव द्वारा बुधवार को राज्यसभा में उठाये गये जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के क्रियान्वयन के मुद्दे को आज देश भर के किसी भी बड़े समाचार पत्र ने एक लाईन नहीं प्रकाशित किया। मीडिया मालिकों की इस हरकत से राज्यसभा में आज विपक्ष का तेवर तल्ख दिखा। विपक्ष ने गुरुवार को राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया और कहा कि मीडिया ने उच्च सदन में कल चुनाव सुधारों पर हुई चर्चा के दौरान संपन्न रचनात्मक बहसों तथा सुझावों का प्रकाशन नहीं किया।

शरद यादव द्वारा कल राज्यसभा में मजीठिया वेज बोर्ड, मीडिया की आजादी और मीडिया मालिकों की धंधेबाजी पर दिए गए जोरदार भाषण को न किसी चैनल न दिखाया और न किसी अखबार ने छापा… आज राज्यसभा में मीडिया की इस हरकत की जमकर की गई निंदा 

जदयू नेता शरद यादव द्वारा बुधवार को राज्यसभा में उठाये गये जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के क्रियान्वयन के मुद्दे को आज देश भर के किसी भी बड़े समाचार पत्र ने एक लाईन नहीं प्रकाशित किया। मीडिया मालिकों की इस हरकत से राज्यसभा में आज विपक्ष का तेवर तल्ख दिखा। विपक्ष ने गुरुवार को राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया और कहा कि मीडिया ने उच्च सदन में कल चुनाव सुधारों पर हुई चर्चा के दौरान संपन्न रचनात्मक बहसों तथा सुझावों का प्रकाशन नहीं किया।

बैठक शुरू होने पर सपा के नरेश अग्रवाल ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश अपेक्षा करता है कि सदन में जो कुछ हुआ, उसकी खबर दी जाए। लेकिन जो खबरें दी जाती हैं, वह यह होती हैं कि सांसदों ने हंगामा किया और आसन के समक्ष आ गए। अगर आप नकारात्मक खबरें देते हैं तो सकारात्मक खबरें भी दिया करें। उन्होंने कहा कि जदयू के शरद यादव ने कल चुनाव सुधारों पर जो भी सुझाव दिए थे, बड़े समाचार पत्रों ने उनके बारे में एक शब्द भी प्रकाशित नहीं किया। आसन को चाहिए कि वह मीडिया को इस बारे में निर्देश दे। सपा नेता ने कहा आप डांट नहीं सकते लेकिन यह निर्देश दे सकते हैं कि जो भी सकारात्मक चर्चाएं होती हैं उनकी खबर दी जानी चाहिए।

शरद यादव ने कहा कि कई मुद्दों पर होने वाली अच्छी बहसें सदन की चारदीवारी के अंदर ही दफन हो जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया को दी गई आजादी पत्रकारों के लिए नहीं बल्कि मीडिया मालिकों के लिए आजादी बन गई है। उन्होंने मांग की कि सरकार को इस संबंध में एक कानून बनाना चाहिए कि मीडिया मालिक एक ही कारोबार करें। उप सभापति पी जे कुरियन ने कहा कि अगर मीडिया कोई खबर प्रकाशित नहीं कर रहा है तो इसमें आसन क्या कर सकता है। यादव ने कहा कि एक कानून बनाया जाना चाहिए जिसके अनुसार, मीडिया मालिकों को दूसरे कारोबार करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।


शरद यादव का मीडिया पर दिया गया चर्चित भाषण अगर आपने नहीं सुना तो जरूर सुनिए… नीचे दिए लिंक पर क्लिक करिए…

https://www.youtube.com/watch?v=L_cGrOGKhWY


कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि मीडिया ने लोगों के विचारों को संवेदनशील बनाने और लोक महत्व के मुद्दों पर संवादों का संतुलन सुनिश्चित कर लोकतंत्र में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन मीडिया में विपक्ष की राय को भी महत्व मिलना चाहिए। मनोनीत सदस्य एवं स्तंभकार स्वप्न दासगुप्ता ने कहा कि मीडिया को निर्देश देने की शुरुआत करना सरकार या संसद के लिए खतरनाक होगा। उनके इस कथन पर कई सदस्यों ने आपत्ति जताई। उप सभापति पी जे कुरियन ने कहा कि अगर समुचित नोटिस दिया जाए तो इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया पर आरोप लगाने का कोई औचित्य नहीं है।

उप सभापति पी जे कुरियन ने मलयालम में एक उक्ति कही और फिर उसका अंग्रेजी में अनुवाद बताते हुए कहा कि अगर कुत्ता आदमी को काटता है तो यह खबर नहीं है लेकिन अगर आदमी ने कुत्ते को काट लिया तो यह बड़ी खबर है। कुरियन ने कहा अगर आप ठीक से बैठें और संबोधित करें तो यह खबर नहीं है। लेकिन अगर आप संतुलित व्यवहार न करें तो यह खबर है। बहरहाल, मैं यह कहना चाहूंगा कि मीडिया हमारे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उन्हें जिम्मेदार होना चाहिए तथा ईमानदारीपूर्वक रिपोर्टिंग करना चाहिए।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

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1 Comment

1 Comment

  1. sanjay kumar singh

    March 25, 2017 at 10:32 am

    मीडिया पर शरद यादव का यह भाषण देश में मीडिया की स्थिति का बहुत ही सही चित्रण है। शरद यादव की चिन्ता और सुझाव जायज हैं। पर क्या कोई सुनेगा? जैसा कि इस भाषण के दौरान ही रविशंकर प्रसाद ने कहा, कोई आपकी आवाज नहीं रोक सकता। क्या यह माना जाए कि रविशंकर प्रसाद समझ ही नहीं रहे थे कि शरद यादव क्या कह रहे हैं या शरद यादव ने जो कहा वह सरकार के प्रतिनिधि होने के नाथ उन्हें पच नहीं रहा था। रविशंकर जी, मुद्दे को घुमाने से कुर्सी भले बची रहे, लोकप्रियता तो काम करने से ही मिलेगी। देश में स्वतंत्र मीडिया के सभी समर्थकों को चाहिए कि शरद यादव का खुलकर समर्थन करें।

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