श्री अभिमन्यु शर्मा जी,
महाप्रबंधक / संपादक
दैनिक जागरण, जम्मू।
महोदय,
मुझे आज फोन पर सूचना मिली है कि मेरे 50 हजार रुपये के लोन के संदर्भ में आप गारंटी लेने वाले मेरे सहयोगियों को प्रताडि़त कर रहे हैं। आपने उनसे यह झूठ भी बोला है कि लोन के संदर्भ में मुझे नोटिस जारी हो चुका है, जबकि उस संदर्भ में मुझे कोई नोटिस नहीं मिला है। इस संदर्भ में आपका ध्यान निम्न बातो पर दिलाना चाहता हूं।

(पत्र लेखक पत्रकार श्रीकांत सिंह की फाइल फोटो)
1- मेरे लगभग 25 अर्जित अवकाश बाकी हैं, लेकिन सूचित करने के बावजूद आपने मेरा फरवरी माह का वेतन जारी नहीं किया, जबकि संस्थान में आपके संबंधी बिना सूचित किए गायब रहते हैं फिर भी आप उनका पूरा वेतन जारी कर देते हैं। संस्थान ने आपको इतनी पावर दी है तो उसका दुरुपयोग आप क्यों कर रहे हैं। इसका जवाब आपको आदरणीय प्रधान संपादक संजय गुप्त जी को देना होगा।
2- लोन के नियमानुसार गारंटी देने वाले कर्मचारी के वेतन से कटौती तभी की जा सकती है, जब लोन लेने वाले कर्मचारी ने या तो नौकरी छोड़ दी है या उसे निकाल दिया गया हो। मान्यवर, आपको अभी यह भी पता नहीं है कि न तो मैंने नौकरी छोड़ी है और न ही मुझे निकाला गया है। जबकि आपको मेल से यह सूचित कर चुका हूं कि किस वजह से मुझे नोएडा में रुकना पड़ा है। दूसरी बात यह कि गारंटी लेने वाले कर्मचारी के वेतन से कटौती तभी की जा सकती है, जब एक वर्ष में लोन की अदायगी न की गई हो। आप हमें यह बताएं कि आप जनहित जागरण छापने वाले अखबार के संपादक हैं या किसी चिटफंड कंपनी के रिकवरी एजेंट। क्यों न मैं संस्थान की अनयिमितताओं को सेवी में ले जाऊं, जहां आप से सवाल जवाब किया जाए।
3- आपकी हरकतों से यह साफ पता चल रहा है कि आप माननीय सुप्रीम कोर्ट का अपमान करने पर उतारू हैं। आप तुरंत यह बताएं कि क्यों न आपके खिलाफ एक शिकायत माननीय सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाई जाए।
4- अंतिम बात आपको यह बतानी है कि दैनिक जागरण के हजारों कर्मचारी माननीय सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का मामला दर्ज करा चुके हैं और वे राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट भी हो चुके हैं। कई श्रमिक यूनियनों ने हमारा समर्थन किया है। आपकी एक छोटी सी हरकत औद्योगिक अशांति पैदा कर सकती है, जो संस्थान पर बहुत भारी पड़ेगी। उसके लिए सिर्फ और सिर्फ आप जिम्मेवार होंगे। कल ही मैं इस मुद्दे को यूनियन नेताओं के समक्ष रखूंगा। आप तुरंत जवाब दें अन्यथा आप जानें और आपका काम जाने।
धन्यवाद। कुछ बुरा लगा हो तो उसे अन्यथा न लें। मैं आपको धमका नहीं रहा हूं, सूचित भर कर रहा हूं। मुझे भरोसा है कि आपका विवेक अवश्य जागेगा।
श्रीकांत सिंह
मुख्य उपसंपादक
संपादकीय विभाग
दैनिक जागरण
दैनिक जागरण में कार्यरत Shrikant Singh के फेसबुक वॉल से.
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