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सुब्रत राय को जेल से बाहर रखना है तो 600 करोड़ जमा करो : सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय से कहा कि यदि उन्हें जेल से बाहर रहना है तो वह सेबी-सहारा रिफंड खाते में अगले साल 6 फरवरी तक 600 करोड रुपए जमा करायें। साथ ही न्यायालय ने उन्हें आगाह किया कि धनराशि जमा कराने में विफल रहने पर उन्हें फिर जेल में लौटना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रतो रॉय के पैरोल को 6 फरवरी 2017 तक बढ़ा दिया है।  प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि यदि सहारा समूह निवेशकों की बकाया राशि का भुगतान करने के लिये संपत्ति बेचने में असफल रहा तो वे इसके लिये ‘रिसीवर’ नियुक्त करने पर विचार कर सकते हैं।

उच्चतम न्यायालय ने सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय से कहा कि यदि उन्हें जेल से बाहर रहना है तो वह सेबी-सहारा रिफंड खाते में अगले साल 6 फरवरी तक 600 करोड रुपए जमा करायें। साथ ही न्यायालय ने उन्हें आगाह किया कि धनराशि जमा कराने में विफल रहने पर उन्हें फिर जेल में लौटना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रतो रॉय के पैरोल को 6 फरवरी 2017 तक बढ़ा दिया है।  प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि यदि सहारा समूह निवेशकों की बकाया राशि का भुगतान करने के लिये संपत्ति बेचने में असफल रहा तो वे इसके लिये ‘रिसीवर’ नियुक्त करने पर विचार कर सकते हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘यदि आप (सहारा समूह) संपत्ति बेचने में असफल रहे तो न्यायालय रिसीवर नियुक्त करना बेहतर समझेगी।’’ साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि वह किसी व्यक्ति को जेल में नहीं रखना चाहती। न्यायालय ने शुरू में राय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा कि दो महीने के लिये सेबी के पास एक हजार करोड रूपए जमा करायें अन्यथा वह रिसीवर नियुक्त करेगी, परंतु बाद में पीठ ने दो फरवरी, 2017 तक जमा कराने वाली राशि घटाकर छह सौ करोड रूपए कर दी। इससे पहले, मामले की सुनवाई शुरू होते ही सिब्बल ने कहा कि सहारा समूह ने न्यायालय के पहले के निर्देशानुसार धनराशि जमा कर दी है और पुन:भुगतान के बारे में नया कार्यक्रम न्यायालय में पेश किया है। इस पर न्यायालय ने सेबी की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता अरविन्द दातार और इस मामले में न्याय मित्र शेखर नफडे को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि 2012 से लंबित इस मामले का एक इतिहास है। न्यायालय ने सेबी और न्याय मित्र से कहा कि वे इस सवाल का जवाब दें कि क्या पुन:भुगतान के कार्यक्रम के मामले में यह समूह और लाभ का हकदार है। समूह ने कहा कि उसके पास एक लाख 87 करोड रुपए की संपत्ति है। इस पर पीठ ने कहा, ‘आप अभी बकाया देनदारी का भुगतान करने में असमर्थ हैं। साथ ही पीठ ने सिब्बल से सहारा समूह के मुखिया की मां की मृत्यु होने के कारण जेल से बाहर आये राय द्वारा जमा करायी गयी राशि के बारे में जानना चाहा।

सिब्बल ने कहा, ‘मैंने इसके बाद से 1200 करोड रूपए जमा करायें हैं। अब तक 11 हजार करोड रूपए जमा करा दिये गये हैं और अभी 11036 करोड जमा कराना शेष है।’ सिब्बल ने कहा कि सेबी के अनुसार अभी भी 14000 करोड रुपए बकाया हैं। इस बीच, पीठ ने कहा कि समूह सर्किल रेट से 90 फीसदी कम पर अपनी संपत्ति बेचने के लिये वह उससे संपर्क कर सकता है।

गौरतलब है कि सहारा समूह काफी वक्त से सेबी के साथ एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं जिसके तहत उन्हें निवेशकों को 24 हज़ार करोड़ रुपये लौटाने हैं। सहारा ने अभी तक 11 हज़ार करोड़ रुपये लौटा दिए हैं। सहारा ने अपनी रिपेमेंट योजना कोर्ट के सामने रखी है और कहा है कि कंपनी बाकी की रकम ढाई साल में जमा कर देगी। 68 साल के रॉय को मार्च 2014 में तब गिरफ्तार कर लिया गया था जब सहारा ने कोर्ट के एक आदेश का पालन नहीं किया था। इस आदेश में कहा गया था कि सहारा उन लाखों छोटे निवेशकों को पैसा लौटाए जिन्हें वे बॉन्ड बेचे गए थे जो गैरकानूनी की गैरकानूनी थे।

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