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नए नए विषयों पर चैनलों का ध्यान क्यों नहीं जाता?

हमारे समाज में हर व्यक्ति न तो गहराई से राजनीति समझता है न परदे के पीछे की राजनीति और न परदे पर हर राजनीतिक ख़बर देखने में उसकी दिलचस्पी होती है. ठीक वैसे ही ,जैसे स्पोर्ट्स और बिजनेस की ख़बरें हर दर्शक या रेडियो का श्रोता या अख़बार का पाठक पसंद नहीं करता. अपनी अपनी चाहत है.

लेकिन इस स्थापित तथ्य पर हमारे मीडिया हाउस चलाने वाले शायद ध्यान नहीं देना चाहते. आप देखिए रोज़ ही एक ही विषय घूम फिरकर सारे चैनलों में छाया रहता है. देखा देखी. ऐसा क्यों होता है? हमारे दर्शक ,पाठक या श्रोता की पसंद का चैनल,समाचारपत्र अथवा एफएम रेडियो क्यों ध्यान नहीं रखते. मीडिया भी एक इंडस्ट्री है और हर इंडस्ट्री अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए सर्वे कराती है, लेकिन कोई चैनल ऐसा क्यों नहीं करता? आज सुबह अखबार पढ़ते ये ख़्याल दिमाग़ में देर तक चक्कर लगाते रहे.

अगर आज की ही उन ख़बरों को देखूं जो अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण हैं और लोगों के लिए भी उपयोगी मगर उन पर आज शायद ही कोई ध्यान दे. यहां कुछ नमूने आज के पेश हैं –

1 . अमेरिका के साथ इन दिनों अनेक देशों का व्यापारिक तनाव चल रहा है. भारत ने अपने हित देखे हैं ,चीन ने अपने हित देखे हैं. अन्य देश भी देख रहे हैं. ट्रंप की मानसिक अस्थिरता के चलते अमेरिकी साख़ पर सवाल खड़े हुए हैं. भारत ने पिछले दिनों 29 वस्तुओं पर आयात शुल्क़ बढ़ा दिया था अमेरिका ने छह जुलाई को भारतीय विदेश और रक्षा मंत्री के साथ वार्ता अचानक रद्द कर कूटनीतिक चोट की है. इसके अमेरिका -भारत के रिश्तों पर दूरगामी असर क्या होंगे? इस पर कहीं चर्चा क्यों नहीं?

2. भारत में साठ साल से चला आ रहा विश्व विद्यालय अनुदान आयोग खत्म कर उच्च शिक्षा आयोग बनाया जा रहा है. अनेक राज्यों में दशकों से ये आयोग काम कर रहे हैं. उन्होंने अब तक क्या किया? नए आयोग से क्या फायदे होंगे? पुराने से क्या नुकसान थे. भारतीय उच्च शिक्षा की चुनौतियां क्या हैं? उनमें किस तरह सुधार की ज़रुरत है? इस पर कितने चैनलों ने बहस या चर्चा छेड़ी?

3. संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर में मानव अधिकारों के उल्लंघन की बात कही है. भारत ने इसे खारिज कर दिया है. इसके परदे के पीछे की कहानी क्या है. अरसे तक संयुक्त राष्ट्र इस मामले में भारत के प्रति नरम रहा है. फिर इस रिपोर्ट की वजह क्या? पाकिस्तान में गाजर मूली की तरह आम आदमी को अफगान सीमा पर मारा जाता है. उस पर और अनेक देशों पर ध्यान क्यों नहीं गया ,जहां मानव अधिकारों की स्थिति बेहद खराब है. पाक अधिकृत कश्मीर में मानव अधिकारों की कौन परवाह करता है? चीन ,अनेक अफ्रीकी देशों में मानव अधिकार कितने सुरक्षित हैं – इन पर क्यों कोई चर्चा किसी चैनल में नहीं छेड़ी गई?

4. 3 -जी और 4 -जी तकनीक के मामले में भारत पिछड़ गया था. अब 5 -जी की तैयारी चल रही है. भारत में नई डिज़िटल पॉलिसी तैयार हो रही है. क्या इस पर चैनलों में कोई चर्चा दिखाई दी है? कम से कम मुझे तो नहीं मिली.

5. नीति आयोग के मुताबिक़ भारत इस समय इतिहास के सबसे बड़े जल संकट से गुज़र रहा है. पचहत्तर फीसदी घरों में पानी नहीं है. साठ करोड़ लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं. कुल पानी का सत्तर फीसदी पीने लायक नहीं है. इस पर भी कही गंभीरता से कोई खबर नहीं दिखाई दी.

6. कितने लोगों ने ऑक्सीटोसिन का नाम सुना होगा. एक जुलाई से सरकार इसके उत्पादन को प्रतिबंधित कर रही है. यह हारमोन प्रसव पीड़ा कम करता है और मां बनने वाली महिलाओं में दूध बनने की क्षमता बढ़ाता है. लेकिन भारत के अनेक राज्यों में गाय और भैंस में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए इस इंजेक्शन का इस्तेमाल होता है.. यही नहीं पंजाब ,उत्तरप्रदेश,राजस्थान और मध्यप्रदेश समेत अनेक राज्यों में सब्ज़ियों का आकार और वज़न बढ़ाने के लिए इस इंजेक्शन का इस्तेमाल होता है. क्या आपको कहीं भी इस विषय पर चर्चा देखने को मिली?

7. ईरान से भारत कभी भी तेल का आयात बंद नहीं कर सकता. उसके अनेक कारण हैं. कूटनीतिक,व्यापारिक ,राजनीतिक और सामरिक. अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो देश ईरान से तेल आयात करेंगे ,उन पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. इसका भारत पर और भारत -अमेरिकी रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? क्या यह भी एक चर्चा का विषय नहीं बनता.

ये तो कुछ विषय हैं. ऐसे अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विषय हैं जो भारतीय दर्शक जानने का अधिकार रखते हैं. अगर मीडिया इंडस्ट्री कुछ सार्वजनिक उत्पाद पैदा कर रही है तो उपभोक्ता के नाते दर्शक,पाठक और श्रोता के भी कुछ उपभोक्ता हक़ हैं. इन पर समाज को ध्यान देना ही होगा.

लेखक राजेश बादल वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं.

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2 Comments

2 Comments

  1. Diwan Singh Bisht

    June 29, 2018 at 3:02 am

    Bilkul sahi baat kahi hai sir… aaj es terah ki mudde kahi nahi milte hai.. na dekhne ko na hi padne ko… esi liye aaj log News ko seriously nahi lete hai..

    Regards

  2. AshokK Sharma

    June 29, 2018 at 8:28 am

    आंखें खोल दीं आपने, मतिभ्रम के सारे बादल हटा दिए

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