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उमाशंकर मिश्र ने ‘अमर उजाला’ को कहा गुडबॉय, ‘विज्ञान प्रसार’ में नई जिम्‍मेदारी

अमर उजाला अखबार में करीब साढ़े छह साल की लंबी पारी के बाद उमाशंकर मिश्र को विज्ञान प्रसार में नई‍ जिम्‍मेदारी दी गई है। इससे पहले उमाशंकर मिश्र ग्रामीण विकास पर केंद्रित इन्‍फोडर्स की पत्रिका सोपान स्‍टेप में पांच वर्ष तक कार्य कर चुके हैं। को‍टा स्थित वर्धमान महावीर खुला विश्‍वविद्यालय से हिंदी वेब पत्रकारिता पर शोध कर रहे उमाशंकर मिश्र को खासतौर पर ग्रामीण विकास, कृषि एवं पर्यावरण संबंधी विषयों की रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। फिलहाल उमाशंकर विज्ञान प्रसार की इंडिया साइंस वायर (आईएसडब्‍ल्‍यू) नामक परियोजना से जुड़े हैं, जो देश में विज्ञान सबंधी खबरें और फीचर्स देने वाली देश की एकमात्र एजेंसी बनने की अग्रसर है।

अमर उजाला अखबार में करीब साढ़े छह साल की लंबी पारी के बाद उमाशंकर मिश्र को विज्ञान प्रसार में नई‍ जिम्‍मेदारी दी गई है। इससे पहले उमाशंकर मिश्र ग्रामीण विकास पर केंद्रित इन्‍फोडर्स की पत्रिका सोपान स्‍टेप में पांच वर्ष तक कार्य कर चुके हैं। को‍टा स्थित वर्धमान महावीर खुला विश्‍वविद्यालय से हिंदी वेब पत्रकारिता पर शोध कर रहे उमाशंकर मिश्र को खासतौर पर ग्रामीण विकास, कृषि एवं पर्यावरण संबंधी विषयों की रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। फिलहाल उमाशंकर विज्ञान प्रसार की इंडिया साइंस वायर (आईएसडब्‍ल्‍यू) नामक परियोजना से जुड़े हैं, जो देश में विज्ञान सबंधी खबरें और फीचर्स देने वाली देश की एकमात्र एजेंसी बनने की अग्रसर है।

उमाशंकर को आईएसडब्‍ल्‍यू के हिंदी सेक्‍शन में प्रमुख जिम्‍मेदारी मिली है। खबर है कि आईएसडब्‍ल्‍यू भारतीय मीडिया में विज्ञान एवं तकनीक संबंधी खबरों की कमी को दूर करने के लिए काम कर रही है और इसके साथ कई पेशेवर विज्ञान पत्रकार जुड़े हैं। फर्स्‍ट पोस्‍ट, डाउन टू अर्थ, इंडिया वाटर पोर्टल, स्‍पंदन फीचर्स और कैच न्‍यूज समेत कई नामचीन मीडिया संस्‍थान आईएसडब्‍ल्‍यू की निशुल्‍क सेवाएं सब्‍सक्राइब भी करने लगे हैं। उमाशंकर मिश्र अमर उजाला में काम करते हुए विज्ञान एवं तकनीक पर आधारित परिशिष्‍ट हाईटेक का करीब पांच साल तक संपादन कर चुके हैं। इसके अलावा कृषि आधारित शोध एवं विकास कार्यों पर लिखने का भी उन्‍हें काफी अनुभव है। कृषि एवं किसानों पर आधारित उनके आलेख हिंदी, अंग्रेजी एवं मराठी भाषाओं में देश की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। ऐसा लगता है कि पत्रकारिता में करीब 12 साल का अनुभव प्राप्‍त कर चुके उमाशंकर मिश्र अब पूरी तरह से विज्ञान पत्रकारिता के रंग में रंगने की ओर बढ़ रहे हैं।

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