पत्रकार-फिल्मकार विनोद कापड़ी ने सीएम योगी को लिखा खुला पत्र

प्रिय आदित्यनाथ योगी जी,

मेरा नाम विनोद कापड़ी है। अच्छा लगता है, इसलिए थोड़ी बहुत पत्रकारिता करता हूँ और छोटी मोटी फिल्में बनाता हूँ।

आपकी तरह एक हिंदू परिवार में मेरा जन्म हुआ है। आप ही की तरह उत्तराखंड का रहने वाला हूँ और आप ही तरह जाति से एक पहाड़ी राजपूत भी हूँ (वैसे मैं ये सब बिलकुल बताना नहीं चाहता था) लेकिन पता है क्या? जब से आप उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं, मैं डरा हुआ हूँ।

मैं जानता हूँ कि अगर क्षेत्र , धर्म और जाति की बात करें तो बतौर हिंदू उत्तराखंडी राजपूत मुझे तो आपके मुख्यमंत्री बनने पर बहुत खुशी होनी चाहिए और डरना तो बिलकुल नहीं चाहिए लेकिन मैं डरा हुआ हूँ आदित्यनाथ जी।

मैं और मेरा परिवार पिछले 32 साल से उत्तरप्रदेश के ही बरेली और नोएडा में रह रहा है। हमारा वोट नोएडा में है और आपको पता नहीं होगा कि इस बार के विधानसभा चुनावों में मैंने और मेरे पूरे परिवार (मेरी पत्नी के सिवाय) ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को वोट दिया था। इसलिए नहीं कि हम बीजेपी या मोदी समर्थक हैं बल्कि इसलिए कि पिछली दो सरकारों ने जिस तरह से राज्य को लूटा है, उसके बाद लगा कि उन लोगों को अब और लूट का मौक़ा नहीं मिलना चाहिए। कम से कम जो विकास की बात कर रहा है, उसे भी राज्य में एक मौक़ा दिया जा सकता है। लेकिन 18 मार्च को जैसे ही आपके नाम की घोषणा हुई, हमें लगा कि हमारे साथ बड़ा विश्वासघात हुआ है।

मेरी और आपकी उम्र तकरीबन बराबर ही है। जितने साल आपने राजनीति की है, उतने ही बरस मैंने पत्रकारिता भी की है। आपके चयन के बाद एक के बाद एक करके कई सारी घटनाएँ सामने आने लगी। चाहे वो ओमप्रकाश पासवान की हत्या हो या शारदा प्रसाद रावत और बाक़ियों की। मैं जानता हूँ कि आरोप अब तक सिद्ध नहीं हुए हैं पर उसके बाद की जो आपकी राजनीति रही है, उसके लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं है। वो तो आप खुलेआम करते हैं और डंके की चोट पर कहते हैं कि अगर मुसलमान एक हिंदू को मारेगा तो आपकी सेना सौ मुसलमान मारेगी। मुसलमान एक हिंदू बालिका को लेकर जाएगा तो आपकी सेना सौ मुस्लिम बालिकाओं को उठा ले जाएगी। और आपके भड़काए हुए समर्थक तो आपसे भी चार क़दम आगे निकल जाते हैं, जब वो ये कहते हैं कि क़ब्र खोद कर मृत मुस्लिम औरतों का बलात्कार किया जाएगा और यह सब होगा हिंदू और हिंदुत्व को बचाने के लिए। आपके नाम की घोषणा के वक्त ये सबकुछ मेरी आँखो के सामने घूमने लगा आदित्यनाथ जी। मुझे लगा कि ये तो बड़ी ग़लती हो गई है। लगा कि क़त्लेआम और मृत महिलाओं से रेप की बात करने वालों से तो वो लुटेरे ही ठीक थे।

अभी मैं ये सब सोच ही रहा था कि टीवी पर आपके एक समर्थक को लखनऊ से सुना – यूपी में रहना है तो योगी योगी कहना होगा।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये हो क्या रहा है? क्यों कहना होगा भाई? कोई ज़बरदस्ती है क्या? ये मेरी आस्था और निजता का सवाल है। मेरा जब मन होगा, मैं कहूँगा। और नहीं कहूँगा तो यूपी में नहीं रह पाऊँगा क्या?

मेरे साथ मेरी पत्नी भी बैठी हुई थी। हम चर्चा कर रहे थे कि सोचो जब हम इतने सक्षम होते हुए, हिंदू होते हुए इतने परेशान हैं तो इस वक्त बाकी लोगो का क्या हाल होगा?

बचपन से हमने तो यही सुना था कि हिंदू कोई धर्म नहीं, जीवन पद्दति है ..way of life है। इंसान को इंसान से प्यार करना है। सुख दुख में हाथ बंटाना है। पर जब आपके सारे पुराने बयान याद आने लगे तो मुझे समझ नहीं आया कि ये कौन सी जीवन पद्धति है, जिसमें हम एक के बदले सौ मारेंगे? ये कौन सी जीवन पद्धति है जिसमें हम मृत महिलाओ के शव क़ब्र से निकालकर उनके साथ बलात्कार करेंगे? मुझे आज भी अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा है कि बोलने की बात तो दूर कोई मृत या जीवित से बलात्कार जैसी घृणित बात सोच भी कैसे सकता है?

मैं जानता हूँ कि ये आपने नहीं कहा था पर आपकी मौजूदगी में तो कहा गया था। धीरे धीरे मेरा डर बढ़ने लगा। यही सोचकर कि जिन लोगों ने कभी क़त्लेआम की बात कही , आज उन्हीं बातों को कहने वाला मेरे राज्य का सबसे बड़ा रक्षक है।

मुझसे कोई भी कह सकता है कि जब मेरे या मेरे परिवार के क़त्लेआम की बात ही नहीं हुई है तो मैं क्यों डर रहा हूँ? पर मेरे ख़्याल से मुद्दा ये नहीं है। मेरे लिए मुद्दा ये है कि क़त्लेआम और बलात्कार की बात आखिर हुई ही क्यों? किसी भी सभ्य समाज में चाहे वो एक क़त्ल हो या सौ क़त्ल हों – उसकी बात ही क्यों होती है? और किसी ने एक क़त्ल कर भी दिया तो क़ानून है ना हमारे पास। क़ानून भी तो अपना काम कर सकता है। हम कौन होते हैं ये कहने वाले कि हम सौ मार डालेंगे? हम मृत के साथ रेप करेंगे।

और आप तो वैसे भी संन्यासी हैं, गुरू हैं, आपने दीक्षा हासिल की है, दुनिया को रास्ता दिखाते हैं। इतना तो आप भी समझते हैं कि नफ़रत का इलाज नफ़रत तो बिलकुल नहीं है।

मैं तो जिस परिवेश में पला बढ़ा, वहाँ तो राम मेरा दोस्त है तो रहीम मेरा भाई है। राम का क़त्ल होने पर कोई मेरे भाई रहीम और बाकी सौ रहीम को मारेगा तो मुझे डर तो लगेगा ही आदित्यनाथ जी। मैं तो कह रहा हूँ कि जिसने या जिस भीड़ ने राम को मारा, उसे क़ानून से सख़्त से सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए लेकिन बिना असली क़ातिल जाने हम खुद ही क़ानून हाथ में लेकर एक राम के बदले सौ बेक़सूर रहीम को मारने की बात करेंगे तो मुझे डर लगेगा आदित्यनाथ जी। सीमा को कोई एक भगा कर ले गया और उसके बदले में कोई सौ सबीना को भगाने की बात करेगा तो मुझे भी डर लगेगा आदित्यनाथ जी क्योंकि मैं, राम-रहीम, सीमा-सबीना उसी समाज, उसी शहर, उसी क़स्बे और उसी गाँव का हिस्सा हैं, जहाँ हम दशकों से साथ रहते आ रहे हैं।

मेरे मोहल्ले का एक भी घर जलेगा, मेरे मोहल्ले से एक भी कोई मरेगा तो मुझे भी डर लगेगा आदित्यनाथ जी। वो लोग नासमझ हैं जो ये समझते है कि दूसरे का घर जल रहा है और हमारा घर कभी नहीं जलेगा।

हमारे घर, हमारी दीवारें दशकों से, सदियों से एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। एक भी दीवार जलती है तो आग मेरे घर में भी आएगी। इसलिए मेरे डर को समझिए आदित्यनाथ जी। कर्फ़्यू लगेगा तो खाने पीने की दिक़्क़त मुझे भी होगी, हिंसा होगी तो मेरे बच्चे भी स्कूल नहीं जा पाएँगे, मुज़फ़्फ़रनगर जलेगा तो आँच नोएडा में भी आएगी। मैं इसीलिए डरा हुआ हूँ आदित्यनाथ जी।

मैं ये भी जानता हूँ कि पिछले कुछ दशकों में बहुत खतरनाक तुष्टिकरण हुआ है। और, इसी तुष्टिकरण ने समाज और देश को इतना बाँट दिया है। आप भी जानते हैं कि ये किन लोगो ने किया है और किस मक़सद से किया है। लेकिन आप ये भी जानते होंगे कि इसके लिए मैं या मेरे जैसे आम नागरिक रहीम या सबीना तो क़तई ज़िम्मेदार नहीं हैं। हम सब तो ना तीन में हैं और ना तेरह में लेकिन जब मारने और काटने की बात आती है तो हम ही

सबसे पहले निशाने पर आते है। जो गुनाह राजनैतिक दलों ने किए, उसकी सज़ा एक आम शहरी क्यों भुगते?

आदित्यनाथ जी, आपको पता नहीं होगा पर आपके नाम पर यकायक समाज के हर हिस्से में झुंड के झुंड पैदा हो गए हैं जो ये कहने लगे हैं कि अब पता चलेगा उन्हें भी। ये उन्हें कौन हैं आदित्यनाथ जी? ये उन्हें भी तो मेरे समाज, मेरे गाँव और मौहल्ले का हिस्सा ही हैं। फिर इस तरह से डराने और धमकाने वाले ये झुंड क्यों अचानक ऐसा बर्ताव कर रहे हैं ? मैं इस बर्ताव से भी डरा हुआ हूँ।

हो सकता है कि मेरी सारी आशंकाएँ बिलकुल निराधार साबित हों। हो सकता है कि मेरे सारे डर बेकार साबित हों। ये भी हो सकता है कि एक ज़िम्मेदार मुख्यमंत्री के तौर पर राजधर्म का पालन करते हुए आप मेरे जैसे तमाम डरे हुए लोगों को ग़लत साबित कर दें। यकीन मानिए मैं खुद प्रार्थना करूँगा कि आप मेरे डर को ग़लत साबित करें , मुझे ग़लत साबित करें और जिस दिन ये होगा , उस दिन मुझ से अधिक खुश और कोई नहीं होगा आदित्यनाथ जी।

उस दिन बिना किसी दबाव के मैं भी जय श्रीराम कहूँगा और मेरा भाई रहीम भी और मेरी बहन सबीना भी !!!

नई भूमिका के लिए मेरी तरफ से शुभकामनाएँ स्वीकार करें।

आपका
विनोद कापड़ी
नोएडा (उत्तर प्रदेश)

वरिष्ठ पत्रकार और फिल्मकार विनोद कापड़ी की एफबी वॉल से.



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Comments on “पत्रकार-फिल्मकार विनोद कापड़ी ने सीएम योगी को लिखा खुला पत्र

  • S. Alamdar Zaidi says:

    Dear Vinod Kapadi Ji,
    Aapki soch, aapke vicharon ko salam karta hoon. aapne itna khoobsoorat likha hai ki taafrrf karne ke liye shabd nahin mil rahe hain.
    aapne real facts ko pesh kar diya hai.
    aap bahut hi izzat ke layaq hain…

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