अखबारों के प्रॉपर्टी सप्लीमेंट का वजन कम हो गया है!

Samarendra Singh : अखबारों के प्रॉपर्टी सप्लिमेंट का वजन कम हो गया है. बस थोड़े ही विज्ञापन दिखते हैं. प्रायोजित खबरों की संख्या भी घट गई है. उन विज्ञापनों में भी इनवेस्टर क्लिनिक या प्रॉपटाइगर जैसी निवेश कंपनियों के विज्ञापन ज्यादा हैं. मतलब प्रॉपर्टी का भाव मंदा है. इसे और मंदा होना चाहिए. इन कंपनियों ने एक अदद घर का सपना दिखा कर न जाने कितने लोगों के जीवन से वर्तमान की अनगिनत खुशियां छीन ली हैं. लोग खून-पसीना लगा कर पैसे बनाते हैं और मकान की किश्त चुकाते हैं. जालसाज कंपनियां लोगों को समय पर फ्लैट नहीं देती. ना घोषित ब्याज देती हैं. ऊपर से अलग-अलग बहाने से दाम बढ़ाती चली जाती हैं. उपभोक्ताओं के खिलाफ इतनी बड़ी और भद्दी साजिश शायद ही किसी कारोबार में रची गई हो. और इस साजिश में सरकार और बैंक सब शामिल हैं.

नोएडा के सेक्टर 73-74-75-76 … नोएडा एक्सटेंशन चले जाइये… ग्रेटर नोएडा चले जाइये… लाखों की संख्या में फ्लैट बन रहे हैं. 50-60-70-80 लाख के फ्लैट. कुछ तो करोड़ दो करोड़ रुपये की मांग करते हैं. कहां है इतना पैसा… किन लोगों के पास है इतना पैसा और कितने लोगों के पास है इतना पैसा… दरअसल यह सीधे तौर पर धोखाधड़ी का मामला है. कुछ जालसाज प्रोजेक्ट में काली कमाई लगा कर उसे शुरु करा देते हैं और फिर कुछ निवेश कंपनियां दस-बीस फीसदी भुगतान करके बड़ी संख्या में फ्लैट ब्लॉक कर देती हैं. बिल्डर-ब्रोकर-बैंकर और खादीधारी की मिलीभगत से दाम बढ़ाने का खेल शुरू हो जाता है. मेट्रो की घोषणा होने लगती है. चार लेन की सड़क-आठ लेन की बनने लगती है. और लोग इस जाल में फंस जाते हैं.

बीस-पच्चीस साल हो गए हैं. नोएडा से ग्रेटर नोएडा के बीच की 25 किलोमीटर सड़क भी पूरी तरह आबाद नहीं हुई है. लेकिन यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण बन गया है. उधर दिल्ली से नब्बे किलोमीटर दूर धारुहेड़ा में विला बेचे जा रहे हैं. बिल्डर माफिया कहता है कि दिल्ली बस एक घंटे दूर… हद है बेशर्मी की. कोई सुरक्षा नहीं. अच्छे अस्पताल और अच्छे स्कूलों की बात रहने दीजिए. बुनियादी पब्लिक ट्रांसपोर्ट तक मुहैया नहीं कराया जाता है. बस किसानों की जमीन कब्जा करो. औने-पौने दाम कर खरीदो और फिर सरकार के सहयोग से ग्राहकों को मूर्ख बनाओ. लेकिन मूर्ख बनाने का ये खेल ज्यादा दिन चलेगा नहीं. जमीन पर सबको आना ही होगा. बस थोड़े दिन और.

एनडीटीवी में काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार समरेंद्र सिंह के फेसबुक वॉल से.


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Comments on “अखबारों के प्रॉपर्टी सप्लीमेंट का वजन कम हो गया है!

  • Bilkul Sahi kaha aapne. Properties ke daam badhaane me Media bhi shamil hai… Banks, broker aur vyawastha sabne milkar aam aadmi ke liye ek chota sa bhi ghar khareedna muskil kar diya hai…..

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