गरीबों की गांड़ काटे बिना, अमीरों के अच्छे दिन कैसे आ सकते हैं भला…

Yashwant Singh : गरीबों की गांड़ काटे बिना

अमीरों के अच्छे दिन कैसे आ सकते हैं भला…

माल्याओं और अडानियों पर कृपा बरसाने वाले को

आर्थिक आतंकवाद नहीं दिखता…

उसे तो बस उस गरीब को जूतियाना है

जिसने बेहतरी की उम्मीद में वोट देकर

साठ साल से राज करने वाले चोट्टे कांग्रेसियों को किनारे किया…

उसे भारत माता की जय और जेएनयू मुर्दाबाद में जनता को फंसाए रखना है

ताकि असल मुद्दों पर बात ही न हो सके…

हमारा नेता जिंदाबाद का कोरस पैदा करते हैं साले भजपइये संघिये

बीच बीच में लेक्चर पेल रहे हैं कि हमारे नेता का अगले पचीस साल तक

राज चलेगा, फिर सब कुछ ठीक हो जाएगा..

इनके मंत्री, नेता, कार्यकर्ता, मीडिया, भक्त सब 24×7 गुणगान में अस्त व्यस्त हैं

वो लोकतांत्रिक तरीके से चुना गया बादशाह

धीरे धीरे तानाशाह में तब्दील हो रहा है…

वो अजब गजब काम करता है… वो लल्लनटाप फरमान जारी करता है…

वो हजारों करोड़ के बड़े चोर को देश से भाग जाने देता है…

वो देश की करोड़ों जनता को फर्जी राष्ट्रवाद में उलझाए रखता है….

वो अपने छोटे नेताओं को इलेक्शन के टिकट फेसबुक लाइक गिनकर देगा

प्रचार और ब्रांडिंग के भूखे भेड़िए को मार्क भाई याद हैं, थैंकलेस नहीं है ये

तकनीक के अंतरराष्ट्रीय आकाओं को तो खुश करना ही पड़ेगा

उसके हर नेता को लाइक बटोरने के लिए अब पेड प्रमोशन करना पड़ेगा.

वो कहता है कि वोट का क्या है, जनता देगी, जनता को ठीक से जानता है…

इसलिए वो हमेशा हाथ हवा में लहराकर हंसते कहता है- ‘जनता का क्या है..’

उसे भरोसा है देश की जनता के दिल ओ दिमाग पर… सोच और विचार पर…

मुल्ला कटुआ भारत माता राष्ट्रवाद जेएनयू पाकिस्तान मंदिर मस्जिद

इन्हीं चूतियापे पर न्योछावर है जनता, वो अटल सत्य मानता है इस फारमूले को

भुखमरी गरीबी सुसाइड मंजूर है इस जनता को लेकिन भारत माता के मुद्दे पर

हुए ध्रवीकरण में जय न बोलने वालों का साथ देना मंजूर नहीं, वो मानता है

वो फौलादी कहा जाने वाला डमरू अब मोम के पुतले तक सीमित हो गया है.

गोरी छोरियों से नपवा दिया अपना सीना… बावजूद इसके या इसके बाद ही

खुद को मान चुका है इस सदी का सबसे बड़ा अवतार, वो प्रचारित कराता है

वो जहां से जो कांड करते बढ़ चला था दिल्ली की ओर, वहां के फंडे याद हैं

यह राजगणित अब अखिल भारतीय स्तर पर लागू करने की तैयारी में जुटा है

वो बार बार लगातार बहुत तेजी से अपनी टीम को वार्मअप कर करा रहा

सूफीवाद बतियाने और गरीबों की जेब काटने में उसके हिसाब से कोई फर्क नहीं

वो जानता है राजनीति में चेहरा और दांत अलग अलग नकाबों में रखने होते हैं

वो सारी क्रांतिकारिता लगाता है कारपोरेट को उठाने और गरीबों को गिराने में

इस दरम्यां उसकी टीम लगी रहती है जनता को उलझाने में, उन्हीं मुद्दों के जरिए

जिससे मुक्त न हो पाई जनता आजादी के इतने दिनों बाद भी इत्ते प्रयोग करके…

आइए, अपनी जेब काटे जाने के इस भयावह लेकिन सच्चे दु:स्वप्न को भूलकर

खोजें उन देशद्रोहियों को जो अफजल गैंग के सदस्य हैं

और जो भारत माता की जय नहीं बोलते हैं

अबकी चुनाव माता रानी की कृपा से इसी ध्रवीकरण पर कट जाएगा…

हां, आपकी माता पिता भाई बहन के जो जमा पैसे हैं, उन पर ब्याज कम मिलेगा तो

समझ लेना, वो चला गया उस माता रानी के गुल्लक में जिसे माल्याओं-अडानियों

ने रखैल बना रखा है, छप्पन इंच वाले अपने लठैत की लाठी के दम पर.

-यशवंत

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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Comments on “गरीबों की गांड़ काटे बिना, अमीरों के अच्छे दिन कैसे आ सकते हैं भला…

  • यशवंत जी ने फाड दिया इनकी,भक्त कोमा मे है!!:D:D:D

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  • RAKESH KUMAR says:

    जबरदस्त सर –
    मुद्दो पर लड़ते लड़ते इंसान हो गया मुर्दा,
    कोई अपनी बात कहकर कुछ कर ना सका
    तो कोई अपनी बात का इंतजार करता रह गया

    सच कहा अपने जबसे मोदी सरकार आई है,
    तब से वो राष्ट्रभक्त होने की अपने ऊपर मोहर लगा रहे है
    क्या उससे पहले हमने कभी भारत माता की जय या वन्देमातरम नहीं कहा था…
    हम तो हमेशा बोलते आये है, इस सरकार में नया क्या हो रहा है, हर जीवित मुदे को मुर्दा बनाने में लगे हुए है, जनता का सारा ध्यान सिर्फ घटिया और फ़ालतू की भाषण बाज़ी में बीत रहा है, किसानो की बात करने वालो, अनपढ़ किसानो को खेती का गणित समझा रहा है, जो पूरी जिन्दगी अपनी फसल को अंगूठा लगाकर बेचता आया है, राजनीती करने वालो कभी भी गरीबी खत्म नहीं कर सकते, क्युकी गरीबी से राजनीती हमेशा हारती ही आई है, अगर देश से गरीबी खत्म हो गई तो सबसे पहले हमारे देश के कुछ जादा ही पढ़े लिखे नेता बेरोजगार हो जायेंगे, अब सर ऐसा कोन सा नेता है, जो बेरोजगार होना चाहेंगा, युवाओ को हमेशा हथियार की तरह उपयोग करने वाले हमारे नेता चुनावो में ऐसे जोशीले भाषण देते है, भारत माता की जय वन्देमातरम जय हिन्द और ना जाने क्या क्या, हमारा युवा इतना भावुक हो जाता है, उसकी बात सुनकर तुरंत वोट देने का फैसला कर लेता है, जो वो युवा अपने बाप की बात भी नहीं सुनता …

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  • Itny frustrationnnnnnnnnnnnn yashwant jiii spare some time for secular meditation
    moreover some constructive facts i want to elaborate
    After 68 years:
    1 OROP SETTLED
    2 BANGLADESH BORDER DISPUTE SOLVED
    3.MORE THAN 6000 VILLAGES ELECTRIFIED OUT OF 18540 NON ELECTRIFIED VILLAGES
    4. 34000 CRORES IN JAN DHAN YOJNA
    5. CROPS INSURANCE
    6. FARMERS ORIENTED BUDGET
    7. 20 RS PETROL AND 15 RS DIESEL RATE DECLINE
    8. INFLATION RATE DOWN
    9. RANK OF CORRUPTION FALLS FROM 80 TO 54
    10. cORRUPTION LESS DEFENCE DEAL

    OR MUJE LGTA H YAHI AAPKO HAZAM NAHI KAHI BHAI AAP B 10000 FORD FOUNDATION WALE TI NAHI TO JINKI PUNCHH(TAIL) PAR MODI GOVERMENT NE APNE PAIR(FOOT) RAKH DIYE H

    ANYWAY BE POSITIVE N USE SOCIAL LANGUAGE CRITICISM SHOULD BE CONSTRUCTIVE

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