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ज़ी न्यूज़ की अजमेर कांड पर डाक्यूमेंट्री यूट्यूब से ग़ायब!

राजेन्द्र गुंजल-

दो दिन पहले जी न्यूज चैनल पर प्रसारित अजमेर के अश्लील फोटो कांड पर आधारित डाक्यूमेंट्री The Black Chapter of Ajmer अचानक हटा दी गई है । इस डाक्यूमेंट्री के लिंक को डीलिंक कर दिया गया है ।

कुछ दिन पहले ही जी न्यूज की एक टीम ने शैलेन्द्र पांडे के नेतृत्व में इस डाक्यूमेंट्री को कड़ी मेहनत से बनाया था । इस डाक्यूमेंट्री को लेकर शहर के राजनीतिक हलकों में अच्छी खासी सुगबुगाहट रही । खासतौर पर कांग्रेसी खेमा कुछ सहमा हुआ था , और भाजपाई खेमा उत्साहित । वजह साफ है कि जिन लड़कियों को अश्लील फोटोज के जरिए ब्लैकमेल किया गया था , वे सभी हिन्दू थीं । दूसरी ओर उन्हें ब्लैकमेल करने वाले सभी मुस्लिम थे । इतना ही नहीं उनमें से ज्यादातर तत्कालीन युवक कांग्रेस के पदाधिकारी भी थे ।

राजस्थान विधानसभा के चुनाव इसी साल दिसम्बर में होने हैं । चुनाव में सिर्फ चार महीने रह गए हैं । ऐसे में इस डाक्यूमेंट्री का उपयोग होना तय माना जा रहा था । जाहिर है भाजपाई इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते । दूसरी ओर कांग्रेसियों की जान सांसत में थी । फौरी तौर पर यही लग रहा था कि इस डाक्यूमेंट्री का फायदा भाजपा उठाने में सफल हो जाएगी । लगता है इसका फायदा उठाने के लिए भाजपा भी तैयार बैठी थी । इस डाक्यूमेंट्री में अलवर के सांसद बाबा बालक नाथ ने भगवा वस्त्र धारण करके ब्लैकमेल कांड पर अपनी टिप्पणी दी । यह अलग बात है कि जब यह कांड हुआ था तब वह आठ साल के बच्चे थे । सोमवार को दिन भर डाक्यूमेंट्री का लिंक शेयर होकर वायरल हो गया ।

मंगलवार को इस लिंक को ओपन करने की कोशिश की गई तो पता चला कि इसे डीलिंक कर दिया गया है । अब इसे कोई नही देख सकता है । हालांकि इसका प्रोमो अभी भी यूट्यूब पर उपलब्ध है । डाक्यूमेंट्री प्रसारण के कुछ घंटों में ही यूट्यूब से गायब होने पर राजनीतिक हलकों में खुसर-पुसर शुरू हो गई ।

दरअसल इस डाक्यूमेंट्री में उन सभी लोगों के विचारों को शामिल किया गया था, जो किसी न किसी रूप में इस ब्लैकमेल कांड से वाकिफ थे । इसमें इस कांड को कवर करने वाले पत्रकारों , राजनीतिक नेताओं , जांच करने वाले पुलिस अधिकारी और न्यायाधीश आदि के विचार शामिल किए गए थे । जाहिर है यह डाक्यूमेंट्री ब्लैकमेल कांड पर एक पुख्ता दस्तावेज के रूप में सामने आई ।

इस डाक्यूमेंट्री में एक दैनिक समाचार पत्र के मालिक ने यह रहस्योद्घाटन कर दिया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत ने उन्हें फ़ोन करके ब्लैकमेल कांड की खबरें प्रकाशित नहीं करने का आग्रह किया था । पर उन्होंने श्री शेखावत को ऐसा करने से साफ मना कर दिया और उनके अखबार में खबरें बदस्तूर छपना जारी रहा । अखबार मालिक ने यह राज भी खोला कि श्री शेखावत के इशारे पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने उनकी सुरक्षा के लिए दो गार्ड भी भेजे । पर उन्होंने सुरक्षा लेने से इन्कार कर दिया । हालांकि अजमेर के मीडिया जगत को इसकी जानकारी रही है । पर अखबार मालिक के बयान से पब्लिक डोमेन में इसका व्यापक प्रसार हो गया । ऐसे में यह नेरेटिव सेट होने में देर नहीं लगती कि तत्कालीन भाजपा सरकार ने अपराधियो के साथ वह सख्ती नहीं बरती , जितनी बरती जानी चाहिए थी ।

इसी डाक्यूमेंट्री में मेरे विचार भी शामिल किए गए थे । मैंने बताया कि नगर परिषद के तत्कालीन सभापति वीर कुमार ने सर्किट हाउस में ठहरे श्री शेखावत को इस कांड की पूरी जानकारी फोटोग्राफ सहित दी थी । पर श्री शेखावत ने कोई दिलचस्पी नहीं ली । उनकी बेरुखी से वीर कुमार काफी निराश होकर तमतमाये हुए कमरे से बाहर आए । यह नजारा उस वक्त सर्किट हाउस में मौजूद सभी पत्रकारों ने अपनी आंखों से देखा । जबकि वीर कुमार उनसे कठोर कार्रवाई की आस लगाए बैठे थे । मैंने अपने वक्तव्य में इसी बात को रेखांकित किया कि मुल्जिम युवा कांग्रेस के पदाधिकारी थे । सरकार भाजपा की थी । ऐसे में भाजपाई कार्यकर्ताओं को तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत से पार्टी लाइन के तहत सख्त कार्रवाई की उम्मीद थी ।

इस डाक्यूमेंट्री से साफ हो गया कि अगर तत्कालीन भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए होते तो आज इस कांड का नतीजा कुछ और ही होता । डाक्यूमेंट्री प्रसारित होने के बाद लोगों ने बड़े कौतुहल से देखी ।

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा होने लगी कि कहीं यह दांव भाजपा को उल्टा न पड़ जाए । इस बात को भी याद रखना होगा कि जी मीडिया और एस्सेल समूह के मालिक सुभाष चन्द्रा गोयल भाजपा के समर्थन से राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं ।

बहरहाल The Black Chapter of Ajmer शीर्षक से बनी डाक्यूमेंट्री अब नहीं देखी जा सकेगी ।

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