टेलीग्राफ की लीड हेडिंग : जैसी मीडिया, वैसे प्रधानमंत्री : कोई सवाल नहीं

संजय कुमार सिंह-

जर्मन प्रसारणकर्ता, डायशे वेले के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संपादक रिचर्ड वाल्कर ने सोमवार को एक ट्वीट में इस मुद्दे को प्रमुखता दी। “मोदी और स्कोल्ज बर्लिन में प्रेस के समक्ष उपस्थित होंगे – दोनों सरकारों के बीच हुए 14 करार की घोषणा करेंगे पर भारतीय पक्ष के दबाव में शून्य सवालों के जवाब देंगे।” रिपोर्टर्स सैन्स फ्रंटीयर्स ने जब प्रेस स्वतंत्रता के मामले में भारत को 180 देशों में 150वें स्थान पर रखा तो वाल्कर ने इस रिपोर्ट को रेखांकित किया। द टेलीग्राफ ने भारत के नीचे रह गए 30 देशों के नाम छापे हैं। और नरेन्द्र मोदी से पूछा है, इस स्थिति के लिए साथियों का दबाव है?

द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया है, “…. 2014 से हिन्दू राष्ट्रवादी अधिकारों के मूर्त रूप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, के शासन वाले दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में प्रेस की आजादी संकट में है।” इंटरनेट पर मौजूद आजतक की इस खबर में इस तथ्य का कोई उल्लेख नहीं है। वाकई, दुनिया भर में भारत का डंका बज रहा है। भक्त गण सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालकर बता भी रहे हैं पर वास्तविकता कुछ और है जो सब नहीं बता पाते हैं। आज तक की खबर से नहीं पता चलेगा कि मीडिया किसी दबाव में है पर मुद्दा गोल है। पेश है, खबर का शुरुआती हिस्सा (साभार) कॉपी-पेस्ट।

World Press Freedom Index यानी प्रेस की आजादी के मामले में भारत 150वें पायदान पर पहुंच गया है. 180 देशों की इस लिस्ट में भारत पिछले साल 142वीं रैंक पर था. इतना ही नहीं भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन प्रेस की आजादी के मामले में और पीछे हैं. नार्वे इस लिस्ट में पहले नंबर पर है. वैश्विक मीडिया निगरानीकर्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रेस की आजादी के मामले में नेपाल में भारत, चीन और पाकिस्तान से काफी अच्छी स्थिति है. नेपाल इस लिस्ट में 30 अंक चढ़कर 76 वे नंबर पर पहुंच गया है. पिछले साल नेपाल 106वें पायदान पर था.

PAK भारत से पीछे

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का नंबर भारत से पीछे है. प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में पाकिस्तान 157वें, श्रीलंका 146वें, बांग्लादेश 162वें, म्यांमार 176वें और चीन 175वें नंबर पर है. ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (आरएसएफ) के मुताबिक, इस साल नार्वे पहले नंबर पर है. जबकि डेनमार्क दूसरे, स्वीडन तीसरे, एस्टोनिया चौथे और फिनलैंड 5वें नंबर पर है. जबकि इस लिस्ट में आखिरी नंबर उत्तरी कोरिया का है. उत्तर कोरिया 180वें नंबर पर है. प्रेस की आजादी के मामले में रूस 155वीं रैंक पर है. वहीं, पिछले साल रूस 150वें नंबर पर था. चीन इस बार दो पायदान ऊपर चढ़ा है. चीन पिछले साल 177वे नंबर पर था.



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