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बिना कारण पत्रकारों को निकालने पर राज्यसभा टीवी को नोटिस

हाईकोर्ट ने राज्यसभा सचिवालय और राज्यसभा टीवी के अधिकारियों से मांगा जवाब

दिल्ली : हाल ही में राज्यसभा टीवी से बिना कारण बाहर किये गये कर्मचारियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने राज्य सभा सचिवालय और राज्य सभा टीवी के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि संस्थान ने बिना कोई पूर्व सूचना दिये और बिना कोई कारण बताये अचानक से बाहर का रास्ता दिखा दिया जो कि कानून का उल्लंघन है। इनमें से एक याचिकाकर्ता का तो कॉन्ट्रेक्ट भी अभी समाप्त नहीं हुआ था। ये कॉन्ट्रैक्ट 2022 तक का था लेकिन राज्यसभा टीवी ने उनको भी बिना नोटिस दिये निकाल दिया।

आपको बता दें कि संसद के उच्च सदन राज्य सभा के चैनल राज्यसभा टीवी ने अपने कर्मचारियों को बिना कोई नोटिस दिये बिना कोई कारण बताये अचानक से संस्थान से बाहर कर दिया था। इसके खिलाफ कर्मचारियों में बहुत रोष है।

कर्मचारियों ने राज्यसभा सभापति और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडु समेत तमाम अधिकारियों को अपने साथ हुए अन्याय के बारे में पत्र भी लिखा था लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं दिया गया।

राज्यसभा टीवी के कर्मचारियों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, भारतीय मजदूर संगठन आदि ने भी उपराष्ट्रपति से फैसले को वापस लेने का अनुरोध किया था। इसमें कहा गया था कि कोरोना काल में देश के उच्च सदन के टीवी चैनल में कार्यरत पत्रकारों को निकालना दुर्भाग्यपूर्ण है।

एक तरफ प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति ने कोरोना काल के दौरान अपील की थी कि कोई भी संस्थान कर्मचारियों को नौकरी से ना निकाले, दूसरी ओर कानून बनाने वाली संस्था देश के उच्च सदन राज्यसभा के टीवी चैनल से ही कर्मचारियों को निकाल दिया गया। ये संस्थान की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। साथ ही सवाल ये भी उठता है कि जब देश की संसद में कानूनों की अवेहलना की जाएगी तो बाकी देश में क्या मापदंड बनेंगे।

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