…जब मंत्री और वाराणसी के विधायक पर फूट पड़ा प्रोटोकॉल अधिकारी का गुस्सा

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अजय कुमार,लखनऊ

वाराणसी। उत्तर प्रदेश में नौकरशाही सरकार पर हावी है। बेलगाम नौकरशाही, जनता के चुने हुए नुमांइदों से कैसा व्यवहार करती है,यह किसी से छिपा नहीं है। अक्सर ही सांसदों/विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की अधिकारियों के अभद्र व्यवहार को लेकर नाराजगी सामने आती ही रहती है। इस बात का नजारा एक बार फिर गत दिनों तब देखने को मिला जब योगी के एक मंत्री के प्रोटोकाल में लगे अधिकारी को दो घंटे तक मंत्री जी का इंतजार क्या करना पड़ गया, जिसके चलते अधिकारी ने अपना आपा ही खो दिया। नाराज अधिकारी ने अपने एक वरिष्ठ अधिकारी से मोबाइल पर बातचीत के दौरान मंत्री जी के लिए जिस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग किया, वह इस लिए और भी चिंता का सबब है क्योंकि योगी सरकार का यह मंत्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की उत्तरी विधान सभा सीट से विधायक है। इतना ही नहीं यह विधायक सरकार से वेतन भी नहीं लेता है और मंत्री बनने के बाद भी लखनऊ में मंत्री आवास में रहने की बजाए विधायक निवास में ही रहता है।

बात उत्तर प्रदेश के स्टांप, न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन विभाग राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल की हो रही हैं जिनके गत दिवस महोबा आगमन को लेकर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की जिले की सीमा पर रिसीव करने के लिए ड्यूटी लगाई गई थी। राज्यमंत्री के ढाई घंटे देरी से पहुंचने पर प्रोटोकाॅल के तहत डयूटी पर लगाया गया प्रशासनिक अधिकारी आग बबूला हो गए। उच्चाधिकारी से मोबाइल पर बात करने के दौरान उसने राज्यमंत्री को काफी अपशब्द कहे और कहा ऐसे प्रोटोकॉल मैं कभी रिसीव नहीं करता, रद्दी की टोकरी में डाल देता था। बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल होने से अफसरों में हड़कंप मच गया। डीएम ने ऑडियो की जांच के आदेश दिए हैं।

दरअसल,राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल का शुक्रवार 11 जून 2021 को महोबा आगमन प्रस्तावित था। झांसी से सुबह छह बजे महोबा के लिए रवाना और साढ़े आठ बजे निरीक्षण भवन में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करनी थी। जिसको लेकर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। राज्यमंत्री ढाई घंटे विलंब से महोबा आए, देरी की वजह के कारणों के बारे में जब पता किया गया तो मालूम हुआ कि मंत्री जी को जगह-जगह रास्ते में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करनी पड़ रही थी,जिसे चाह कर भी मंत्री अनदेखा नहीं कर सकते थे।

इसी दौरान तेइया महोबकंठ के समीप रिसीव करने के लिए खड़े तहसील कुलपहाड़ के एक अधिकारी के पास अपर उपजिलाधिकारी का फोन लोकेशन लेने के लिए आया। फोन रिसीव करते ही अधिकारी भड़क गए और उन्होंने मंत्री को भला-बुरा कहते हुए अपशब्द कहे। दोनों अफसरों केे बीच हुई बातचीत का ऑडियो शुक्रवार की शाम सोशल मीडिया में वायरल हो गया। वायरल ऑडियो में तहसील कुलपहाड़ के अधिकारी ने कहाकि मंत्री जी के झांसी से निकलने का कार्यक्रम छह बजे का था और अभी तक वो मऊरानीपुर में चाय पी रहे हैं। मैं कितना समय तक उनका इंतजार करूं। अपशब्द कहते हुए बोले, मैंने कभी अंत्री-मंत्री का प्रोटोकॉल रिसीव ही नहीं किया है। मैं वापस लौट रहा हूं। पुलिस वाले हैं, वही देखेंगे। वहीं दूसरे अधिकारी से बातचीत के दौरान वही अधिकारी कहते है कि ऐसे लोग मंत्री बन जाते जिन्हें कुछ आता जाता नहीं है। उधर जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी रवैये से पहले से ही नाराज चल रहे तमाम जनप्रतिनिधियों ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारी को तत्काल निलंबित करने की मांग की है। विधायकों का कहना कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली यह साबित करती है कि प्रदेश में नौकरशाही बेलगाम हो गयी है। जनप्रतिनिधियों को निरंतर अपमानित किया जा रहा है।

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