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लीवर की बीमारी से पीड़ित वरिष्ठ पत्रकार आदित्य अवस्थी का निधन

नई दिल्ली। लीवर की बीमारी से पीड़ित वरिष्ठ पत्रकार आदित्य अवस्थी का निधन हो गया। वह 62 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है। 13 सितंबर 1954 को बिहार के भागलपुर में जन्में अवस्थी ने कानपुर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम. ए. करने के बाद अपनी पत्रकारिता की शुरुआत राष्ट्रीय संवाद समिति ‘समाचार’ के माध्यम से की और उसके बाद राजधानी से प्रकाशित होने वाले सांध्य टाइम्स के साथ 1979 में उसकी शुरुआत से ही जुड़े गये।

नई दिल्ली। लीवर की बीमारी से पीड़ित वरिष्ठ पत्रकार आदित्य अवस्थी का निधन हो गया। वह 62 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है। 13 सितंबर 1954 को बिहार के भागलपुर में जन्में अवस्थी ने कानपुर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम. ए. करने के बाद अपनी पत्रकारिता की शुरुआत राष्ट्रीय संवाद समिति ‘समाचार’ के माध्यम से की और उसके बाद राजधानी से प्रकाशित होने वाले सांध्य टाइम्स के साथ 1979 में उसकी शुरुआत से ही जुड़े गये।

अवस्थी की दिल्ली की राजनीति में काफी पकड़ थी। अवस्थी ने कई किताबें लिखी। उनकी पहली पुस्तक दिल्ली के पर्यावरण पर ‘काली धूप’ थी। आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए भी श्री अवस्थी ने जनजागृति और जनरुचि से संदर्भित पटकथाओं और वृत्तकथाओं पर खूब लिखा। उनकी अन्य लोकप्रिय पुस्तिकाओं में प्रौढ़ शिक्षा प्रचार-प्रसार के लिए ‘कानून और हम’, ‘वोट का अधिकार’, ‘मास्टर प्लान’ और  ‘दिल्ली के गरीब’ आदि शामिल है। उन्हें 1997 में सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए राष्ट्रपति के आर नारायणन द्वारा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ‘स्वर्ण कमल’ से सम्मानित किया गया।

सांध्य टाइम्स से शैक्षिक सेवानिवृति लेने के बाद अवस्थी महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के रोहिणी के साथ जुड़ गये और वहां सेन्टर फॉर मीडिया स्टडीज के कार्यकारी निदेशक के पद पर काम किया। उनकी अन्य पुस्तकों में ‘नीली दिल्ली प्यासी दिल्ली’, ‘दिल्ली क्रांति के 150 वर्ष’, ‘भारत की परमाणु यात्रा’, ‘कहानी दिल्ली मेट्रो की’ तथा ‘दास्तान-ए-दिल्ली’ भी काफी लोकप्रिय हुई। इसके अलावा ‘लालकिले की प्राचीर से’ दो खंडों में प्रकाशित पुस्तक भी लिखी। इस पुस्तक में अवस्थी ने यह बताने का प्रयास किया कि आजादी के 60 वर्षों में हमने क्या खोया और क्या पाया।

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