इलाहाबाद में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वेलफेयर क्लब का गठन, धीरेन्द्र अध्यक्ष और छत्रपति सचिव बने

इलाहाबाद । इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े स्थानीय खबरनवीसों ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वेलफेयर क्लब के नाम से संस्था का गठन किया है। इसमें प्रमुख टीवी चैनल से जुड़े न्यूनतम दस वर्ष का अनुभव रखने वाले संवाददाताओं व कैमरामैनों को ही रखा गया है।

भारत समाचार चैनल के ब्यूरो इंचार्ज धीरेन्द्र द्विवेदी सर्वसम्मति से इस नवगठित संस्था के अध्यक्ष और सहारा समय के सीनियर रिपोर्टर छत्रपति शिवाजी सचिव चुने गए हैं। वरिष्ठं पत्रकार दिनेश सिंह को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, टोटल टीवी चैनल के रिपोर्टर आरिफ राजू को उपाध्यक्ष, आज तक चैनल के संवाददाता पंकज श्रीवस्तव व इंडिया टीवी चैनल के रिपोर्टर इमरान लईक को संयुक्त रूप से ज्वाइंट सेक्रेटरी और ईटीवी/न्यूज़ 18 चैनल के संवाददाता मनीष पालीवाल को कोषाध्यक्ष चुना गया है।

सहारा समय टीवी चैनल के वीडियो जर्नलिस्ट शिवेंद्र विक्रम और समाचार प्लस चैनल के ब्यूरो इंचार्ज रवींद्र कुमार को प्रचार सचिव की ज़िम्मेदारी दी गई है जबकि एपीएन न्यूज़ चैनल के ब्यूरो प्रमुख आलोक सिंह ऑडिटर होंगे। ईटीवी उर्दू/न्यूज़ 18 उर्दू के ब्यूरो प्रमुख मुश्ताक आमिर, सहारा समय चैनल के ब्यूरो इंचार्ज सुशील तिवारी, न्यूज़ 18/ईटीवी के ब्यूरो इंचार्ज सर्वेश दुबे, न्यूज़ नेशन चैनल के ब्यूरो प्रमुख मानवेन्द्र सिंह और डीडी न्यूज़ चैनल के संवाददाता राजीव खरे को सलाहकार मंडल में रखा गया है।

न्यूज़ 24 चैनल के रिपोर्टर पंकज चौधरी, ज़ी न्यूज़ चैनल के संवाददाता आनंद राज, एनडीटीवी चैनल के रिपोर्टर नितिन गुप्ता, लाइव टुडे चैनल के ब्यूरो इंचार्ज सैयद आकिब रज़ा, न्यूज़ 18 चैनल के वीडियो जर्नलिस्ट संजीव मिश्र, अंग्रेजी चैनल टाइम्स नाउ के स्थानीय प्रमुख वीरेन्द्र राज, डीडी न्यूज़ के रिपोर्टर राजकुमार रॉकी, न्यूज़ 18 चैनल के वीडियो जर्नलिस्ट रवीन कुमार मोनू और इंग्लिश न्यूज़ चैनल रिपब्लिक के स्थानीय संवाददाता विमल श्रीवास्तव को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है। एबीपी न्यूज़ चैनल के संवाददाता मोहम्मद मोईन और इंडिया वॉयस चैनल के रिपोर्टर शोएब रिज़वी को संस्था में विशेष आमंत्रित के तौर पर जगह दी गई है। इन दोनों पर पुरानी और सर्व स्वीकार्यता वाली दूसरी संस्थाओं से सहयोग लेने का दायित्व होगा।

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार दिनेश सिंह, मुश्ताक आमिर और सुशील तिवारी ने संस्था के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए बताया कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वेलफेयर क्लब का गठन सिर्फ डिजिटल मीडिया के पत्रकारों व कैमरामैनों में आपसी समन्वय स्थापित करने के लिए किया गया है, ताकि फील्ड में कवरेज के दौरान होने वाली पेशेगत समस्याओं से बचा जा सके। इसका गठन किसी दूसरी संस्था के विरोध अथवा उसके समकक्ष खड़े होने के लिए कतई नहीं है।

क्लब की बैठक तेरह सितम्बर को संस्था के कार्यालय में होगी। उसमें कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण की रूपरेखा तय की जाएगी। इसका दायित्व मुश्ताक आमिर, मानवेन्द्र सिंह, सर्वेश दुबे, सुशील तिवारी और आलोक सिंह की पांच सदस्यीय कमेटी के जिम्मे होगा। दिनेश सिंह संस्था का विज़न ड्राफ्ट तैयार करेंगे। इमरान लईक, पंकज श्रीवास्तव और सैयद आकिब रज़ा ने बैठक में शामिल सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

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Comments on “इलाहाबाद में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वेलफेयर क्लब का गठन, धीरेन्द्र अध्यक्ष और छत्रपति सचिव बने

  • Ashish kumar Srivastava says:

    Pls my help दिवयाग बच्चों का धन खाया है साक्षय के साथ लगातार शिकायत की थी और कोई कायवाही नहीं किया गया है जिसमें फजी बिल लाकर दिवयाग बच्चों का धन खाया है 9415897920

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  • इलाहबाद में इलेक्ट्रॉनिक चैनल के भाटा-काला के बीच सोशल वार शुरू

    इलाहाबाद में इनदिनों इलेक्ट्रानिक मीडिया संगठन बनाने की चल रही है होड़, संगठन बनाने को लेकर इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों दो गुट हुए आमने सामने एक दूसरे पर लगा रहे है आरोप। दोनों गुटो में इनदिनों चैनलो में काम कर रहे पत्रकारों का ठेकेदार बनने की चल रही लड़ाई में अब सोशल मीडिया में भी ये दोनों गुट अब एक दूसरे पर तीखी प्रतिक्रिया वायरल कर रहे है। आपको बताते चले की ये वही लोग है जिन लोगो ने अभी तक अपने निजी स्वार्थ के चलते इलाहाबाद में ऐसे ऐसे फर्जी लोगो को ही पत्रकार बना डाला जिन्होंने मीडिया में सिर्फ गंदगी फैलाने का काम किया है इनके बनाये हुए पत्रकारों में टैक्सी ड्राइवर से लेकर अंडा बेचने वाले तक है। अभी तक तो इन लोगो ने फर्जी पत्रकारों की फ़ौज तैयार की और अब उन्ही लोगो को शामिल करके संगठन बना कर अपनी एक नई दुकान सजाने की तैयारी में है। दराअसल ये सारा ताना बाना 2019 में इलाहाबाद में लगने वाले कुंभ मेले का है, क्योंकि इस विशाल आयोजन में प्रशासन की तरफ से पत्रकारों को सुविधाएं मुहैया कराए जाती है और इन्ही सुविधाओं को अपने लिए और अपने अपने चेलो के लिए हासिल करने और पूरे मेले में अपना कब्जा बनाये रखने केलिए ये सारी कवायत की जा रही है। इलाहाबाद में पिछले कई सालों से इलेक्ट्रनिक मीडिया क्लब के नाम से एक गुट काफी सक्रिय है जिसने काकस पत्रकारों की फ़ौज खड़ी कर दी तो वही हाल ही में बने एक और इलेक्ट्रानिक मीडिया संगठन बना कर दूसरे गुट ने भी अपनी सक्रीय भूमिका जाहिर कर दी। खासबात ये है कि इस नए बने इलेक्ट्रानिक मीडिया संगठन में ज्यादातर सदस्य और पदाधिकारी ऐसे है जो पहले दूसरे गुट से जुड़े थे। वर्चस्व की इस लड़ाई ने इनदिनों इलाहाबाद में सोशल मीडिया में काफी धूम मचा रखी है।
    सोशल मीडिया पर वायरल किया गया मैसेज इस प्रकार है।👇

    “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब ”
    को तोड़ने की साजिश एक बार फिर हुई नाकाम

    पद लिप्सा के लिए गुरु- शिष्य की साजिश

    पिछले 10 सालों से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब चैनलों व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की एक प्रतिष्ठित संस्था है । जो भाईचारे ,आपसी सहयोग की मिसाल बन गया।
    इसकी दो खास विशेषताएं हैं । पहली की किसी भी तरह कोई पदाधिकारी अपनी मोनोपोली नहीं बना सकता । जैसे अन्य पत्रकार संगठनों में है कि कोई एक व्यक्ति पद पर काबिज हो गया तो वह एन केन प्रकारेण लगातार पद पर अपना कब्जा बनाए रखता है ।अध्यक्ष और सचिव को हर हाल में 1 साल का अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद दूसरे साल में पद से हटना पड़ेगा। और कार्यकारिणी में उसे उस साल कोई जगह नहीं मिलेगी। वह चुनाव नहीं लड़ सकता ।
    दूसरी खास विशेषता है, की यहां वर्किंग जनर्लिस्ट ही चुनाव लड़ सकता है और संस्था की अगुवाई कर सकता है।
    एक खास सोच और वर्ग वाले व्यक्तियों ने पिछले कई साल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब की साख और आपसी एकता तोड़ने की कई बार साजिश रची। जैसे सब्जियों में “भाटा” अपने को सर्वश्रेष्ठ समझता है और गुण नही होता है। उसी तरह पत्रकारों का भाटा पिछले कई साल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब को तोड़ने की कोशिश करते रहा। वह कभी भी सफल नहीं हो पाया। आज दूसरे को फर्जी और 10 साल से कम अगर किसी के पास अनुभव है तो उसे पत्रकारिता के लिए अयोग्य घोषित करने वाले यह लोग कभी पत्रकारों की भर्ती और फर्जी पत्रकार सेंटर चलाते थे। नकाश कोने से लेकर पत्रकारिता का अंडा बेचने वाले आज महान पत्रकार स्वयं को घोषित किये पड़े हैं।
    हालात यह है कि अब यह वेलफेयर की दुकान चलाने लगे हैं। इस वेलफेयर की दुकान में ऐसे-ऐसे गुरु शिष्य और वेलफेयर हुए हैं कि पत्रकारिता भी शर्मिंदा हो जाए। कभी दूसरे को साइकिल चोर कहने वाले और बताने वाले आज दोनों एक साथ है …. शायद अब साइकिल चोर से चोर का ठप्पा हट गया है और जिसने दूसरे को साइकिल चोर कहा वह अब गुरु हो गया है।

    इस वेलफेयर की मिसाल पत्रकारिता की एकता तो इलाहाबाद में ऐसी है जिसमें आज जो “घोड़े” की तरह कूद कर वेलफेयर की बात कर रहे हैं उनके ऊपर महान गुरू और कथित पत्रकारों का मसीहा मुकदमा लिखाने के लिए sp से आग्रह कर रहा था… ऐसे करेंगे वेलफेयर आज भी मेरे पास वह रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी है …मतलब परस्तों की ऐसी जमात मैंने पहले कभी नहीं देखी थी..
    इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के गठन के समय एक सिंह साहब थे जैसे ही उन्हें लगा की न्यूज़ रिपोर्टर क्लब उन को ज्यादा तवज्जो दे रहा है 1 महीने के अंदर उनका ईमान बदल गया… पत्रकारिता और एकता की क्रांति दोगलई में तब्दील हो गई… महान पत्रकार तो यह इतने थे… इतने बड़े आयोजन गुरु कहे तो ज्यादा अच्छा होगा हंस जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका में इनके मान सम्मान और पत्रकारिता का काला इतिहास लिखा गया… इन्होंने उस समय आधा दर्जन से ऊपर पत्रकारों की नौकरी खा ली …बेरोजगार हो गए जो इनके चक्कर में मुख्यालय के पत्रकार आये… आखिर संस्था कब तक इनका बोझ ढोती… उस प्रतिष्ठित संस्था से बोरिया बिस्तर बांध दिया… पत्रकारिता के लिए एक डंडा पकड़ लिए हैं और अब पत्नी हंता के नाम से विख्यात महान पत्रकार वेलफेयर का हिस्सा हो गए हैं….

    देश विदेश के मीडिया से जुड़े पत्रकारों को 25 जनवरी को बुलाकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब ने इलाहाबाद के पत्रकारिता का इतिहास रच दिया।… भारी पत्रकारों को यह बात रास नहीं आ रही थी कि “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब” बिना बैसाखी के… बिना वसूली के …आखिर पत्रकारिता के उच्च मानदंडों पर अपनी साख कायम करने में सफल रहा।
    पद और लोभ से ग्रसित शिष्य को जब यह ज्ञात हो गया कि हर हाल में यहां उनकी दाल नहीं गलेगी. .. हर हाल में 1 साल का कार्यकाल पूरा होने के पश्चात उन को हटना ही पड़ेगा… बड़ा प्रयास किया पद पर बने रहने के लिए …क्लब के नियमों के तहत अध्यक्ष और सचिव को हर हाल में 1 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा नहीं चुना जा सकता है। एक साजिश रची गयी । इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के पदाधिकारी होने का सुख भोग लिया और पहचान पत्रकार नेता की बन गयी,,, तो प्रयास करने लगे किसी तरह कार्यकाल 1 साल से बढ़कर 2 साल हो जाय। मत विभाजन में यह प्रस्ताव गिर गया कि कार्यकारिणी का कार्यकाल 1 साल से बढ़ाकर 2 साल नही किया जायेगा,,,,अरमानो पर पानी फिर गया। इसके पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नेतृत्व को खत्म करने की साजिश भी नाकाम हो चुकी थी इसमें भी गुरु शिष्य और गुरु के चेले खास वर्ग और सोच रखने वाले व्यक्ति ही शामिल थे।
    दूसरे ही दिन बैठक कर वेलफेयर क्लब का गठन हो गया। यह पद लिप्सा और गद्दारी नहीं तो और क्या ?
    मजे की बात है सारे प्रयासों के बावजूद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब की एकता और उसकी साख को खत्म नहीं कर सके तो उसके नाम का दुरुपयोग करने लगे ! मिलते जुलते नाम का कुछ फायदा तो हो ही जाएगा ।
    इसी से समझ लीजिए कि अलग झुंड बनाकर कुछ चंद लोगों ने संगठन खड़ा करने का प्रयास किया उस संगठन का पूरा नाम भी नहीं लिखा प्रयाग इलेक्ट्रॉनिक….. खा गए नियत और तिकड़म जिसके DNA में हो उस से अपेक्षा ही क्या ? बहरहाल नकल तो नकल ही रहती है चमक चाहे जितनी ही हो आज भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब में सदस्यों का सामंजस्य उसी तरह है जैसे परिवार है । आज भी सदस्य सुख दुख में एक दूसरे के साथ खड़े होते हैं। और जन्मदिन व अन्य खुशियां मनाते हैं । नकल करने वाले नकल तो कर सकते हैं लेकिन भावना की आत्मा कहां से लाएंगे…
    लोग कहते हैं जिनको अगवाई का झंडा दिया था उन्होंने निजी स्वार्थ देखा,,, क्लब के सदस्यों का हित छोड़ दिया । एक हत्याकांड में क्लब के कई सदस्यों का मोबाइल टूट गया दूसरी तरफ से मिलकर क्लब के सदस्यों के साथ दगा किया, ऐसा वेलफेयर किस काम का कि अपने कैमरे की बैटरी क्षतिग्रस्त हुई तो पूरा कैमरा वसूल लिया… और दूसरे का फोन नष्ट हो गया तो पुलिस के साथ बगल में बैठ गए ?
    इसी वेलफेयर गैंग के एक खास सदस्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब में 2 साल पहले एक पदाधिकारी थे.. डायरी छपवाने के नाम से लाखों रुपया बाजार से उठ गया …डायरी गायब हो गई …बेईमानी की हद !!! जब उनका क्लब का रास्ता बंद कर दिया गया तो कहीं ना कहीं उन्हें जाना ही था , न्यूज़ रिपोर्टर क्लब ने लिया नहीं ….इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब का रास्ता बंद हो गया …ऐसे में कुछ ना कुछ बचाव के लिए करना ही था…

    एक खास सोच व वर्ग के लोग,,,, कुंभ का आयोजन, वसूली में कोई दिक्कत ना आए… इससे अच्छा वेलफेयर कहां हो सकता है,,,
    राज-पाट मुबारक हो …हमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया परिवार के साथ अपना सुख दुख बांटने दीजिए…. हमारा इतिहास रहा कि पत्रकारिता और पत्रकारों पर कोई संकट आया तो उसे लड़कर न्याय लिया… चाहे रितेश सिंह और अरविंद राणा का मामला रहा हो …जिसमें कुख्यात मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर विपक्ष में रहे …उन से लड़कर अपने साथियों को न्याय दिलाया और चाहे अतरसुइया में दारोगा को सस्पेंड कराना पड़ा या अपने साथियों का अन्य तरह से हितलाभ करना पड़ा… हमने अपने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया परिवार के दम पर कर लिया … यह वही दोगले हैं जिन्होंने कुंभ में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए अलग से कैंप की व्यवस्था हो जाए विरोध में खड़े थे इनके मुंह पर उस समय कालिख पोत गई इनकी साजिश उस समय नाकाम हो गई जब इतिहास बना और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को अलग से कैंट आवंटित हुआ बाद में यह परजीवी कीड़े पहुंचकर उस में लाभ लिए …. इन्होंने तो उस समय के सूचना विभाग और न्यूज़ रिपोर्टर क्लब के पदाधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची थी कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को आवंटित ना हो पाए ….छोड़ दीजिए हमें हमारे हाल पर,,, हम समर्थ हैं ,,,हमारे पास पत्रकारिता की अग्नि है … इतिहास खुल गया तो वह चेहरे बेनकाब हो जाएंगे जो आज वेलफेयर का दम भरते हैं… बहुत कुछ नहीं करना सिर्फ इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उस घटना को याद कर लेना जिसमें संगीत विभाग के प्रोफ़ेसर के मसले पर इसी वेलफेयर क्लब के 2 सदस्य दूसरे के खिलाफ FIR दर्ज करा रहे थे …किसी भी आदमी की फितरत नहीं बदली जा सकती… आज नहीं तो कल अगर बिच्छू है तो वह डंक मारेगा ही…

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