जबरन रिटायर किए जाने को अमिताभ ठाकुर ने कैट में चुनौती दी

यूपी के पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने अपने अनिवार्य सेवानिवृति के आदेश को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की लखनऊ बेंच में चुनौती दी हैं. उन्हें गृह मंत्रालय, भारत सरकार के आदेश के क्रम में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 23 मार्च 2021 को अनिवार्य सेवानिवृति दी थी.

अमिताभ ने अपनी याचिका में कहा कि भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश शासन के आदेश पूरी तरह गलत हैं और मात्र उनके प्रति व्यक्तिगत तथा व्यवस्थाजन्य विद्वेष तथा पूर्वाग्रह के कारण पारित किये गए हैं, जिससे उनका पूरा परिवार दुष्प्रभावित हुआ है.

अमिताभ ने कहा कि यूपी शासन ने बिना कारण व आधार के मनमाने ढंग से उनका नाम चुन कर उन्हें सेवा से निकाले जाने की संस्तुति की, जिसे भारत सरकार ने अनुमोदित कर दिया. अतः जब उन्होंने इस आदेश से संबंधित अभिलेख मांगे तो दोनों सरकार द्वारा उन्हें अभिलेख देने से मना कर दिया गया.

अमिताभ ने कहा कि इस प्रकार से अभिलेख देने से मना करने से यह साफ़ हो जाता है कि दोनों सरकार के आदेश गलत हैं और इन्हें छिपाना चाहती हैं. अतः उन्होंने इस आदेश को ख़ारिज करते हुए उन्हें सेवा में वापस लिए जाने तथा उन्हें इस अवधि के समस्त सेवा लाभ दिए जाने की प्रार्थना की है.

Amitabh Thakur challenges Compulsory Retirement in CAT

Ex UP IPS officer Amitabh Thakur has challenged his Compulsory retirement order in the Lucknow bench of Central Administrative Tribunal (CAT). He was given compulsory retirement by the UP Government on 23 March 2021 in consequence to the Government of India decision.

Amitabh said in his petition that the Government of India and UP Government orders are completely incorrect. He said these orders have been passed merely for malafide intent because of personal and systemic bias against him, which has adversely affected his entire family.

Amitabh said the UP Government arbitrarily and randomly selected his name for Compulsory retirement, without any material and grounds before it, which was approved by the Central Government. This is the reason they refused to provide him the relevant records related with the orders.

Amitabh said this refusal to provide documents makes it apparent that the order is incorrect and the concerned Governments want to hide its facts. Hence he has prayed for quashing of the order and providing him all service related benefits for the given period.

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