क्या बरखा दत्त ‘मोजो’ में इंटर्नशिप करने वालों का शोषण करती हैं?

दीपांकर-

अदिति ने बरखा दत्त के आर्गेनाइजेशन मोजो के बारे में कहा है: “ये हार्डवर्किंग जर्नलिज्म नहीं है बल्कि ये शोषण है, इंटर्नशिप करने वालों पर इतना लोड दे दिया जाता है कि एक दो दिन में भाग खड़े होते हैं.”

इसके पहले भी बरखा दत्त पर कई तरह के आरोप लग चुके हैं जिसमें एम्प्लॉई को पैसा ना देने वाले को शुरू शुरू में डिफेंड करना तक शामिल रहा है.

बरखा जी ने टीवी में काम किया है, जहां आजकल लोग समाचार पढ़ते हुए जिम भी कर रहे हैं, स्टूडियो में वर्कआउट भी कर रहे हैं.

तो बात ये है कि कुछ लोग काम करते हुए दिखते रहना चाहते हैं, अच्छा काम कितना कर रहें हैं इससे खास मतलब नहीं होता, बेसिकली काम दिमाग में घुस जाता है.

कोई अच्छा जर्नलिस्ट हो इसका मतलब ये नहीं कि वो अच्छा बॉस भी होगा.

लेबर लॉ पर ज्ञान देना, वर्किंग आवर बढ़ाने पर सरकार का विरोध करना अलग बात है, अपने ऑर्गेनाइजेशन में उसे लागू करना दूसरी बात.



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One comment on “क्या बरखा दत्त ‘मोजो’ में इंटर्नशिप करने वालों का शोषण करती हैं?”

  • Wow. The person who was supposedly exploited isn’t even speaking for themselves. Every field expects interns to work harder. And given how hard Barkha works herself, anyone should guess what would be expected of them. I am sure they were not “invited” by her but chose to work with her obviously for the brand she is and for the experience they could get. If they wanna rekax.. Then why join a journalist who works from streets. Join the sophisticated AC journalist who work only in the studio. India has all kinds available. Choose what you like.

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