कबीराना ताने-बाने को बुनता बेनियाबाग का मुशायरा

: शनिवार की रात भर होगी दिलों को जोड़ने की बातें :  बनारस के बेनियाबाग में हर साल आयोजित होने वाले मुशायरा यकीनन कई मायनों में खास है। इस साल ये मुशायरा 18 अक्टूबर यानि शनिवार को होने जा रहा है। सालों से आयोजित होते चले आ रहे मुशायरे का जादू यहां लोगो के सिर चढ़कर बोलता है। बेनियाबाग मुशायरे के डायस पर हिन्दुस्तान ही नहीं बल्कि सरहद पार के शायर भी अपना कलाम सुनाकर लोगो के दिलों में जगह बनाने की कोशिश करते है।

यहां कैफी आजमी से लेकर अली सरदार जाफरी तक अपना कलाम सुना चुके है, तो बशीर बद्र, निदां फाजली, मुनव्वर राना, मंजर भोपाली, सागर ख्ययामी जैसे नामचीन शायरों के कलाम लोगो के दिलों की जस्बात बन दाद पा चुके है, शायरों को सुनने का सुरूर इस कदर लोगों पर छाया रहता है, कि जाने-माने शायर राहत इंदौरी को सुनने के लिए हजारों की भीड़ रात भर इस इंतजार में रहती है, कि कब राहत आए और अपने खास अंदाज में कुछ अलग सुनाते हुए दिलो पर राहत बनकर छा जाए।

रात भर चलने वाले इस मुशायरे में लोग षिरकत कर शायरों को सुनते है, साथ ही वाह-वाह से लेकर हूटिंग का दौर भी रात भर चलता है। गंगा-घाट और विष्वनाथ मंदिर से चंद कदम दूर बेनियाबाग कें मैदान में जब शेर गूंजता है,

गूंजे कही शंख कही, कही आजान हो
जब ज्रिक एकता हो तो हिन्दुस्तान हो।

तो ऐसा लगता है, कि हालात कैसे भी हो, कबीर का ये शहर कबीराना ताने-बाने की डोर को थामे चल रहा है। स्व. राजीव गांधी की याद में आयोजित होने वाले इण्डो-पाक मुशायरे के कनवीनर अशफाक मेमन का कहना है कि काशी की सरजमीन पर ये मुशायरा साझी संस्कृति और साझी एकता का मिसाल है, जहां शायरी मोहब्बत, भाईचारे का पैगाम देती है।

1986 से शुरू हुए बेनियाबाग के मुशायरे ने 28 सालों से अपनी लय को बना रखा है। इस लम्बें सफर में कितने शायर यहां आये और चले गये लेकिन मकसदे मुशायरा यानि दिलो और तहजीबों को जोड़ने का जो सफर आज भी जारी है। जारी है, शायरी का सफर…. कुछ इस अंदाज में।                 

न रोको इसका रास्ता
इसे हर सिम्त आने दो,
मोहब्बत रंग है, खुष्बू है,
इसे फैल जाने दो……….

बनारस से भाष्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट. संपर्क: 09415354828

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